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फादर्स डे 2025: कंवर ढिल्लों ने साझा की पिता की वो सीख — 'तकनीक नहीं, असली जिंदगी से सीखो'

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फादर्स डे 2025: कंवर ढिल्लों ने साझा की पिता की वो सीख — 'तकनीक नहीं, असली जिंदगी से सीखो'

सारांश

फादर्स डे से पहले टीवी अभिनेता कंवर ढिल्लों ने खुलासा किया कि उनके पिता ₹100 लेकर मुंबई आए थे और कभी 'पहचान' का इस्तेमाल नहीं किया। उनकी सीख — तकनीक नहीं, असली जिंदगी के अनुभव ही बच्चों को मजबूत बनाते हैं।

मुख्य बातें

टीवी अभिनेता कंवर ढिल्लों ने फादर्स डे (21 जून 2025) से पहले पिता की प्रेरणादायक सीख साझा की।
पिता ने करियर में कभी अपनी पहचान या प्रभाव का उपयोग नहीं किया — खुद की मेहनत पर जोर दिया।
बचपन में मोबाइल और गैजेट्स से दूर रखा; पिता का मानना था कि वास्तविक जीवन के अनुभव ज्यादा जरूरी हैं।
पिता महज ₹100 लेकर मुंबई आए थे और कई शिफ्ट काम करके परिवार को बेहतर जीवन दिया।
कंवर ने पिता को संदेश दिया — 'अब आराम करें और जिंदगी एंजॉय करें।'

टीवी अभिनेता कंवर ढिल्लों ने फादर्स डे (21 जून) से पहले अपने पिता से मिली जीवन-मूल्यों की सीख साझा की है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी भी अपनी पहचान या प्रभाव का उपयोग करके उनके करियर को आसान नहीं बनाया — और यही कठिन राह उनके व्यक्तित्व की नींव बनी।

खुद की मेहनत पर भरोसा

कंवर ढिल्लों ने बताया, 'मेरे पिता ने कभी मुझे कोई शॉर्टकट नहीं सिखाया और न ही अपनी पहचान का इस्तेमाल करके मुझको काम दिलाया। करियर के शुरुआती दौर में मुझे उनकी इस सोच का महत्व समझ नहीं आता था। कई बार लगता था कि थोड़ा सहारा मिल जाए तो रास्ता आसान हो जाएगा, लेकिन समय के साथ मैंने महसूस किया कि पिता का यह फैसला मेरे लिए बहुत जरूरी था।'

उन्होंने आगे कहा, 'जब आप अपनी सफलता, असफलता और गलतियों की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तभी असली सीख मिलती है और आप मजबूत बनते हैं। मेहनत से मिली सफलता ज्यादा टिकाऊ होती है और उसमें आत्म-संतोष भी ज्यादा होता है।'

तकनीक नहीं, वास्तविक अनुभव

अभिनेता ने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि उनके पिता ने उन्हें और उनके भाई को मोबाइल फोन व अन्य गैजेट्स से दूर रखा, ताकि पढ़ाई और खेल-कूद पर ध्यान केंद्रित रहे। उनके पिता का दृढ़ मत था कि बच्चों को तकनीक से ज्यादा वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखना चाहिए।

कंवर ने कहा, 'उनकी इस सख्त, लेकिन संतुलित परवरिश ने हमारे व्यक्तित्व को मजबूत बनाया। खेलों में भाग लेने से हमें अनुशासन और टीम भावना दोनों मिली।'

गिरकर उठने की प्रेरणा

कंवर ढिल्लों ने बताया कि उनके पिता का एक और अटल विश्वास था — 'जिंदगी में गिरना और चोट खाना गलत नहीं है, बल्कि असली सीख तब मिलती है जब इंसान गिरकर फिर से उठता है।' उन्होंने कहा कि इस सोच ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और मुश्किल समय में हार न मानने की प्रेरणा दी।

₹100 लेकर मुंबई आए थे पिता

अभिनेता ने अपने पिता के संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने बताया, 'मेरे पिता ने बहुत सीमित संसाधनों के साथ अपनी जिंदगी शुरू की थी। वह महज ₹100 लेकर मुंबई आए थे और धीरे-धीरे मेहनत और लगन से परिवार के लिए एक अच्छा जीवन बनाया।' कंवर ने बताया कि उनके पिता कई-कई शिफ्ट में काम करते थे और लंबे समय तक घर से दूर रहते थे, ताकि बच्चों को बेहतर जीवन मिल सके।

पिता को फादर्स डे का संदेश

फादर्स डे के अवसर पर कंवर ढिल्लों ने अपने पिता के लिए कहा, 'हमें आप पर गर्व है और हम आपसे बहुत प्यार करते हैं। अब आप थोड़ा आराम करें और जिंदगी को खुलकर एंजॉय करें।' उन्होंने यह भी जताया कि वे खुद भी अपने पिता की तरह एक जिम्मेदार पारिवारिक व्यक्ति बनना चाहते हैं। आने वाले समय में कंवर ढिल्लों की यह सोच उनके निजी और पेशेवर जीवन दोनों को दिशा देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनुभव' वाला दर्शन आज के डिजिटल-फर्स्ट पालन-पोषण के माहौल में एक विपरीत आवाज़ है। यह भी उल्लेखनीय है कि मनोरंजन उद्योग में जहाँ 'नेपोटिज्म' पर बहस जारी है, वहाँ एक स्थापित परिवार का होते हुए भी पिता का यह फैसला — कि बेटे को खुद रास्ता बनाना होगा — एक साहसिक और विरल उदाहरण है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंवर ढिल्लों के पिता ने उन्हें सबसे बड़ी क्या सीख दी?
कंवर ढिल्लों के अनुसार उनके पिता की सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपनी सफलता, असफलता और गलतियों की जिम्मेदारी खुद लो। पिता ने कभी अपनी पहचान का उपयोग करके उनके लिए काम नहीं दिलाया, ताकि वे आत्मनिर्भर बनें।
कंवर ढिल्लों के पिता ने बचपन में गैजेट्स से दूर क्यों रखा?
उनके पिता का मानना था कि बच्चों को तकनीक से ज्यादा वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखना चाहिए। इसीलिए कंवर और उनके भाई को मोबाइल फोन व गैजेट्स नहीं दिए गए और उनका ध्यान पढ़ाई व खेल-कूद पर रखा गया।
कंवर ढिल्लों के पिता मुंबई कैसे आए थे?
कंवर ढिल्लों ने बताया कि उनके पिता महज ₹100 लेकर मुंबई आए थे। मेहनत और लगन से उन्होंने धीरे-धीरे परिवार के लिए एक अच्छा जीवन बनाया और कई-कई शिफ्ट में काम किया।
फादर्स डे 2025 पर कंवर ढिल्लों ने पिता को क्या संदेश दिया?
फादर्स डे (21 जून 2025) के अवसर पर कंवर ढिल्लों ने कहा कि वे अपने पिता से बस इतना कहना चाहते हैं कि 'हमें आप पर गर्व है, हम आपसे बहुत प्यार करते हैं और अब आप आराम करें व जिंदगी खुलकर एंजॉय करें।'
कंवर ढिल्लों कौन हैं?
कंवर ढिल्लों टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने अभिनेता हैं। वे अपनी मेहनत और अनुशासन के लिए पहचाने जाते हैं और फादर्स डे के मौके पर अपने पिता की प्रेरणादायक जीवन-यात्रा को सार्वजनिक रूप से साझा किया।
राष्ट्र प्रेस
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