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क्या शेखर कपूर फिर से 'बैंडिट क्वीन' जैसी फिल्म बनाना चाहेंगे?

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क्या शेखर कपूर फिर से 'बैंडिट क्वीन' जैसी फिल्म बनाना चाहेंगे?

सारांश

निर्देशक शेखर कपूर ने अपनी प्रसिद्ध फिल्म 'बैंडिट क्वीन' की शूटिंग की यादें साझा की हैं। उन्होंने अभिनेत्री सीमा बिस्वास से मिलने के अनुभव को भी साझा किया, जिसमें उस विशेष फिल्म के दौरान के गहन अनुभवों का जिक्र किया। जानिए, क्यों शेखर अब ऐसी फिल्में बनाने से कतराते हैं।

मुख्य बातें

शेखर कपूर ने 'बैंडिट क्वीन' के अनुभवों को साझा किया।
फिल्म बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सीमा बिस्वास के साथ हालिया मुलाकात ने पुरानी यादों को ताज़ा किया।

मुंबई, 28 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। निर्देशक शेखर कपूर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अक्सर अपनी पुरानी फिल्में याद करते हैं। शुक्रवार को उन्होंने फिल्म बैंडिट क्वीन की शूटिंग से जुड़ी यादें साझा की और अभिनेत्री सीमा बिस्वास से फिर से मिलने का अनुभव भी बताया।

अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर सीमा के साथ एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा, "फिल्म 'बैंडिट क्वीन' मेरे जीवन की सबसे गहन फिल्मों में से एक रही है और शायद मैं भविष्य में ऐसी कोई फिल्म नहीं बना पाऊंगा, क्योंकि उस दौरान सभी कलाकार उस गहनता का अनुभव कर रहे थे।"

निर्देशक ने बताया कि उनकी सीमा बिस्वास से मुलाकात गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में हुई। उन्होंने कहा, "सीमा बिस्वास से गोवा में मिलकर बहुत अच्छा लगा और यह अजीब है कि फिल्म बैंडिट क्वीन के दौरान जो तीव्र अनुभव हुए थे, वे आज भी मेरे मन में जीवित हैं। मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि शूटिंग के समय सीमा ने क्या महसूस किया। उनका किरदार निभाने का तरीका अद्वितीय था।"

शेखर ने सीमा की प्रशंसा करते हुए कहा, "सीमा से मिलकर हमने बहुत सी बातें कीं, लेकिन उनके साथ सहज बातचीत करना कोई आसान कार्य नहीं था, जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं। सीमा को मुझे सहज करना पड़ा।"

उन्होंने आगे लिखा, "मैं आज भी फिल्म निर्माण की यादों को महसूस कर सकता हूं और कई बार वही यादें मुझे परेशान भी करती हैं। इसलिए जब लोग मुझसे पूछते हैं, 'अब ऐसी फिल्म कब बनाओगे?' तो मेरा उत्तर होता है कि कभी नहीं।"

निर्देशक ने बताया कि फिल्म बनाते समय वे स्वयं को हर किरदार में ढाल लेते हैं। फिल्म बनाना सरल कार्य नहीं है। कभी-कभी मुझे लगता है कि शायद मुझे चार्टर्ड अकाउंटेंट ही बने रहना चाहिए था।

ज्ञात हो कि शेखर कपूर मनोरंजन उद्योग में आने से पहले एक विदेशी कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

शेखर कपूर की अनुभवी दृष्टि और उनकी फिल्म निर्माण प्रक्रिया पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। 'बैंडिट क्वीन' जैसी फिल्में न केवल एक कहानी कहती हैं, बल्कि उन गहरे अनुभवों को भी दर्शाती हैं जो कलाकारों ने साझा किए हैं। ऐसे अनुभव फिल्म उद्योग की पहचान होते हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेखर कपूर ने 'बैंडिट क्वीन' के बारे में क्या कहा?
शेखर कपूर ने बताया कि 'बैंडिट क्वीन' उनके जीवन की सबसे गहन फिल्मों में से एक थी और वे भविष्य में ऐसी फिल्म नहीं बनाना चाहते।
सीमा बिस्वास के साथ शेखर कपूर की मुलाकात का अनुभव कैसा रहा?
शेखर कपूर ने सीमा बिस्वास से गोवा में मिले और उनके साथ बातचीत करते समय उन्हें सहज महसूस कराने का प्रयास करना पड़ा।
शेखर कपूर ने फिल्म निर्माण को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि फिल्म बनाना सरल नहीं है और वे हर किरदार में ढल जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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