नाना पाटेकर को याद कर भावुक हुए पवनदीप राजन: 'उन्होंने सिर्फ शरीर त्यागा, दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद फिल्म जगत में शोक की गहरी लहर है। प्रसिद्ध गायक पवनदीप राजन ने 11 अक्टूबर 2026 को पटना में नाना पाटेकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी फिल्में और उनसे मिली सीख आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। पवनदीप ने इस मौके पर कहा कि नाना भले ही अब शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनका काम और उनकी यादें अमर हैं।
पवनदीप राजन की भावुक श्रद्धांजलि
पवनदीप राजन ने कहा, 'हमारे बीच के बड़े कलाकार नाना पाटेकर हमसे काफी दूर चले गए हैं। ये तो विधि का विधान है, ऐसा सबके साथ होना ही है। उनके जाने के बाद ऐसा महसूस नहीं होता कि वह हमेशा के लिए दुनिया से चले गए हैं। उनकी फिल्मों को देखने पर ऐसा लगता है, जैसे वह आज भी हमारे बीच मौजूद हैं।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'नाना पाटेकर लोगों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगे। उन्होंने केवल अपना शरीर त्यागा है, लेकिन उनका काम और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।'
सादगी और खेती से था गहरा लगाव
पवनदीप ने नाना पाटेकर के व्यक्तित्व के उस पक्ष का भी उल्लेख किया जो उन्हें आम जनमानस से जोड़ता था। उन्होंने कहा, 'नाना आम इंसान की तरह रहते थे और उन्हें खेती करना पसंद था। खेती से उनका लगाव उनके सादगी भरे स्वभाव को दिखाता है। युवाओं ने नाना से काफी कुछ सीखा है और आने वाली पीढ़ियां भी उनके जीवन और काम से बहुत कुछ सीखेंगी।'
यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग के तमाम कलाकार नाना के निधन पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कर रहे हैं। उनकी सादगी और ज़मीन से जुड़ाव उन्हें बाकी सितारों से अलग करता था।
नाना पाटेकर का सिनेमाई सफर
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में प्रदर्शित फिल्म 'गमन' से अपने फिल्मी करियर की नींव रखी। इसके पश्चात उन्होंने 'अंकुश', 'परिंदा', 'प्रहार', 'क्रांतिवीर', 'तिरंगा', 'अपहरण', 'टैक्सी नंबर 9211' और 'वेलकम' जैसी चर्चित फिल्मों में अविस्मरणीय भूमिकाएँ निभाईं।
गौरतलब है कि मीरा नायर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म 'सलाम बॉम्बे!' ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 1991 में प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
फिल्म जगत और प्रशंसकों पर असर
नाना पाटेकर का निधन केवल एक कलाकार की विदाई नहीं है — यह उस पीढ़ी के एक मज़बूत स्तंभ का जाना है जिसने हिंदी सिनेमा को गहराई और ज़मीनी यथार्थ से जोड़ा। उनकी भूमिकाओं में जो सामाजिक संवेदनशीलता दिखती थी, वह उन्हें महज़ एक अभिनेता से कहीं आगे ले जाती थी।
आने वाले समय में उनकी विरासत उनकी फिल्मों, उनके सामाजिक कार्यों और उन अनगिनत कलाकारों के ज़रिए जीवित रहेगी जिन्होंने उनसे प्रेरणा ली।