'फूल और कांटे' की मधु बोलीं: जो उस दौर में रोमांस था, आज वही छेड़छाड़ और जेल की राह है
सारांश
मुख्य बातें
90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री मधु ने हिंदी सिनेमा में महिलाओं की बदलती छवि पर बेबाक राय रखते हुए कहा कि उनकी सुपरहिट फिल्म 'फूल और कांटे' में जो व्यवहार उस समय 'रोमांस' कहलाता था, आज की कानूनी और सामाजिक नज़र से वह सीधे छेड़छाड़ और उत्पीड़न की श्रेणी में आएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अभिनेता राम चरण की फिल्म 'पेड्डी' में जान्हवी कपूर की प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
मधु का 'फूल और कांटे' पर खुलासा
मधु ने बताया कि फिल्म के शुरुआती गानों में हीरो और उसके दोस्त कॉलेज में नायिका का पीछा करते हैं, उसे परेशान करते हैं और सीटियाँ बजाते हैं। उन्होंने कहा, 'उस समय इन दृश्यों को रोमांस का हिस्सा माना गया था, लेकिन अगर आज ऐसा कुछ होता, तो वह लड़का जेल में होता।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिल्म में उनका किरदार अंततः उसी लड़के से प्यार करने लगता है जो उसे लगातार परेशान करता है — और उस दौर में इसे प्रेम कहानी का स्वाभाविक हिस्सा माना गया।
समाज की सोच और सिनेमा का आईना
मधु ने कहा, 'सिनेमा हमेशा समाज की सोच को दिखाता है। जैसे-जैसे समाज बदलता है, वैसे-वैसे फिल्मों की कहानियाँ, किरदार और उन्हें दिखाने का तरीका भी बदलता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर समाज किसी चीज़ को स्वीकार नहीं करता, तो धीरे-धीरे वह फिल्मों से भी गायब होने लगती है।
80-90 के दशक के सिनेमा पर नज़रिया
अभिनेत्री ने कहा कि 80 और 90 के दशक की फिल्मों में बलात्कार के दृश्य बेहद आम थे और लगभग हर दूसरी फिल्म में ऐसे दृश्य देखने को मिल जाते थे। उनके अनुसार, उस दौर में इन दृश्यों पर न तो बड़े सवाल उठाए जाते थे और न ही दर्शकों के बीच कोई व्यापक बहस होती थी। उन्होंने कहा, 'आज का समय पूरी तरह बदल चुका है और अब ऐसे दृश्यों को पहले की तरह स्वीकार नहीं किया जाता।'
आज के फिल्मकारों की ज़िम्मेदारी
मधु ने यह भी कहा कि आज अगर किसी फिल्म में कोई गंभीर घटना दिखाई भी जाती है, तो उसे बहुत सावधानी के साथ पेश किया जाता है। उनके अनुसार, अब फिल्मकार इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी संवेदनशील विषय को दिखाते समय गलत संदेश न जाए। उन्होंने कहा कि आज लोगों के बीच महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अधिक जागरूकता है, इसलिए फिल्मों को भी उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।
आज का दर्शक अधिक जागरूक
मधु ने यह भी स्वीकार किया कि 'फूल और कांटे' के समय किसी ने यह नहीं कहा कि फिल्म छेड़छाड़ को बढ़ावा दे रही है — उल्टा दर्शकों ने फिल्म को खूब प्यार दिया और यह बड़ी हिट बन गई। लेकिन उन्होंने जोड़ा कि आज का दर्शक पहले से कहीं अधिक जागरूक है और वह ऐसी चीज़ों पर सवाल उठाता है। गौरतलब है कि 'पेड्डी' विवाद के बीच यह बयान बॉलीवुड में महिला प्रस्तुति की बहस को नई गहराई देता है।