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रणदीप हुड्डा ने दी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि, आमरण अनशन के संदर्भ में किया उल्लेख

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रणदीप हुड्डा ने दी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि, आमरण अनशन के संदर्भ में किया उल्लेख

सारांश

बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर एक भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि सावरकर का निधन आमरण अनशन के चलते हुआ, जिससे उनके प्रति गहरा सम्मान प्रकट हुआ। जानें उनके संघर्ष और फिल्म के अनुभव के बारे में।

मुख्य बातें

रणदीप हुड्डा ने वीर सावरकर की जीवनी पर फिल्म बनाई।
सावरकर ने आमरण अनशन किया था।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता प्राप्त की।
हुड्डा ने किरदार के लिए वजन कम किया।
सावरकर का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण था।

मुंबई, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2024 में बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने वीर सावरकर की जीवनी को पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के जरिए कदम रखा था।

यह फिल्म विशेष इसलिए थी क्योंकि अभिनेता ने केवल अभिनय नहीं किया, बल्कि इसके लिए गहन अनुसंधान और उत्पादन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। फिल्म को आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर अपने बजट को प्राप्त करने में सफल रही। अब वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर, अभिनेता ने उन्हें एक भावुक श्रद्धांजलि दी है।

रणदीप हुड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिल्म से संबंधित सावरकर की तस्वीरें साझा की हैं। उन्होंने एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि सावरकर का निधन आमरण अनशन के कारण हुआ।

उन्होंने लिखा, "आमरण अनशन कई लोगों ने किए, लेकिन सावरकर ही इस परिदृश्य में अद्वितीय हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि सावरकर जी ने अपनी मृत्यु तक उपवास किया या दूसरे शब्दों में समाधि ले ली और अंततः "26 फरवरी 1966" को इस दुनिया को छोड़ दिया। आज मैं उन्हें स्मरण कर रहा हूँ।"

रणदीप हुड्डा के मन में सावरकर के प्रति गहरा सम्मान है क्योंकि उन्होंने यह फिल्म अपने गुस्से के साथ बनाई थी। अभिनेता ने कहा कि पहले वे फिल्म करने के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि उनकी और सावरकर की शारीरिक विशेषताएँ मेल नहीं खाती थीं, लेकिन जब उन्होंने सावरकर और स्वतंत्रता पर लिखी गई किताबें पढ़ीं, तो उनके भीतर गुस्से का ज्वाला भड़क उठी।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि स्वतंत्रता कैसे प्राप्त हुई? 1946 से 1952 तक कई देशों को स्वतंत्रता मिली, और यह स्वतंत्रता शांति से नहीं मिली।

अभिनेता का कहना है कि हमारे देवी-देवताओं के हाथों में शस्त्र हैं, लेकिन वे हिंसा के प्रतीक नहीं हैं, लेकिन जब बात धर्म या अस्तित्व की रक्षा की आती है, तो हथियार उठाना गलत नहीं है।

रणदीप हुड्डा के लिए सावरकर का किरदार निभाना आसान नहीं था क्योंकि अपने किरदार को यथार्थवादी बनाने के लिए उन्होंने वजन काफी घटाया और लगभग डेढ़ साल तक अंडरवेट रहे। इस दौरान उनके शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव भी दिखाई दिए। अभिनेता के बदलते रूप को देखकर फैंस भी चिंतित हो गए थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी बताता है कि कैसे इतिहास के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों का स्मरण करना आवश्यक है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर सावरकर का आमरण अनशन कब हुआ?
वीर सावरकर का आमरण अनशन उनकी मृत्यु से पहले हुआ, और वे '26 फरवरी 1966' को इस दुनिया को छोड़ गए।
रणदीप हुड्डा ने सावरकर पर फिल्म क्यों बनाई?
रणदीप हुड्डा ने सावरकर की कहानी को पेश करने के लिए गुस्से और सम्मान के साथ फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' बनाई।
क्या फिल्म को आलोचना का सामना करना पड़ा?
हाँ, फिल्म को आलोचना का सामना करना पड़ा, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।
रणदीप हुड्डा ने अपने किरदार के लिए क्या किया?
रणदीप हुड्डा ने अपने किरदार को वास्तविकता के करीब लाने के लिए अपना वजन बहुत कम किया।
सावरकर का महत्व क्या है?
वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण नेता थे, जिन्होंने कई विचारों और आंदोलनों को प्रेरित किया।
राष्ट्र प्रेस
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