रणदीप हुड्डा की 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर': अनसुने किस्से और संघर्ष
सारांश
Key Takeaways
- रणदीप हुड्डा ने 32 किलो वजन घटाया।
- फिल्म की स्क्रिप्ट तीन दिन में तैयार की गई।
- अभिनेता ने अपनी संपत्ति का हिस्सा भी बेचा।
- फिल्म को कई विवादों का सामना करना पड़ा।
मुंबई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता रणदीप हुड्डा की निर्देशन में बनी पहली फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' को रिलीज हुए अब 2 वर्षशारीरिक और मानसिक रूप से मेहनत की, बल्कि अपनी संपत्ति का एक हिस्सा भी बेच दिया। आज हम इस फिल्म से जुड़े कुछ अनसुने किस्सों का जिक्र करेंगे।
फिल्म में वीर सावरकर का किरदार निभाने के लिए अभिनेता ने महत्वपूर्ण बदलाव किए। काला पानी की सजा के दौरान सावरकर की स्थिति को दर्शाने के लिए उन्होंने 32 किलो वजन घटाया और केवल एक बार भोजन करते थे। उन्होंने अंधेरे कमरे में रहकर किरदार की भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश की।
फिल्म बनाने से पहले, अभिनेता ने व्यापक अनुसंधान किया और पाया कि सावरकर के बारे में अंग्रेजी साहित्य में बहुत कम जानकारी है। इसलिए उन्होंने विभिन्न किताबें पढ़कर एक प्रारंभिक स्क्रिप्ट तैयार की, लेकिन संवाद के लिए उन्हें अपने सह-लेखक के साथ मिलकर तीन दिन में पूरी स्क्रिप्ट लिखनी पड़ी। वे रोज़ाना 12 घंटे काम करते थे।
बहुत से लोगों को यह नहीं पता है कि 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' की बायोपिक बनाते समय कई शुभचिंतकों ने अभिनेता को सलाह दी थी कि वे ऐसी फिल्म न करें, क्योंकि इससे उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, अभिनेता ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब इतने लोग मना कर रहे थे, तो उन्हें लगा कि अब फिल्म बनानी ही पड़ेगी। उन्होंने फिल्म में अपना तन, मन और धन तीनों लगा दिए।
फिल्म रिलीज के बाद विवादों में रही और इसका कलेक्शन भी अपेक्षाकृत कम रहा। इस दौरान अभिनेता को बॉलीवुड से भी सहयोग नहीं मिला, और फिल्म के निर्देशक महेश मांजरेकर ने रचनात्मक मतभेद के कारण फिल्म छोड़ दी थी। अंततः अभिनेता ने खुद फिल्म को डायरेक्ट करने का निर्णय लिया।