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एनआईए का बड़ा एक्शन: मोथाबारी न्यायिक अधिकारी हमला मामले में टीएमसी विधायक सबीना यास्मीन को 24 सितंबर का समन

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एनआईए का बड़ा एक्शन: मोथाबारी न्यायिक अधिकारी हमला मामले में टीएमसी विधायक सबीना यास्मीन को 24 सितंबर का समन

सारांश

चुनाव पूर्व एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मोथाबारी में न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले की जांच में एनआईए ने टीएमसी विधायक सबीना यास्मीन को 24 सितंबर को तलब किया है। इससे पहले उनके पति महबूब आलम को भी समन जा चुका है। मामले में 23 आरोपी और दो चार्जशीट दाखिल हैं।

मुख्य बातें

एनआईए ने मोथाबारी न्यायिक अधिकारी हमला मामले में टीएमसी विधायक सबीना यास्मीन को 24 सितंबर 2026 को पूछताछ के लिए तलब किया।
हमला इस वर्ष अप्रैल में मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुआ था।
भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों को BDO कार्यालय में कई घंटों तक बंधक बनाए रखा और उनके वाहनों पर हमला किया।
एनआईए दो चार्जशीट ( 54 और 11 पृष्ठ ) दाखिल कर चुकी है; कुल 23 आरोपी , 12 मामले दर्ज।
आरोपियों पर BNS 2023 के तहत हत्या की कोशिश, बंधक बनाने और सरकारी काम में बाधा सहित कई गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं।
इससे पहले विधायक के पति महबूब आलम को भी एनआईए का समन मिल चुका था।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबारी में न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले की जांच में सख्ती बरतते हुए सुजापुर विधानसभा क्षेत्र की तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक सबीना यास्मीन को 24 सितंबर 2026 को पूछताछ के लिए पेश होने का समन जारी किया है। यह मामला इस वर्ष अप्रैल में विधानसभा चुनाव से पूर्व हुई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान सामने आया था, जब एक हिंसक भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों पर हमला कर उन्हें घंटों बंधक बनाए रखा था।

मुख्य घटनाक्रम

इस वर्ष अप्रैल में मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक के अंतर्गत मोथाबारी में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारी स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के कार्यालय में कार्यवाही कर रहे थे। इसी दौरान एक हिंसक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें कई घंटों तक बंधक बनाए रखा।

प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को भी अवरुद्ध कर दिया। जब पुलिस ने न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की, तो उनके वाहनों पर भी हमला किया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

एनआईए की जांच और कार्रवाई

इस संवेदनशील मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ले ली। एजेंसी अब तक इस मामले में दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है — एक 54 पृष्ठों की और दूसरी 11 पृष्ठों की — जिनमें कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इस मामले में कुल 12 प्राथमिकियाँ दर्ज की गई थीं।

इससे पहले एनआईए ने विधायक सबीना यास्मीन के पति महबूब आलम को पूछताछ के लिए समन भेजा था। अब विधायक को स्वयं 24 सितंबर 2026 को एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

आरोप और कानूनी धाराएँ

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत आरोप तय किए गए हैं। इनमें हत्या की कोशिश, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, उत्पीड़न, सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य-पालन से रोकना, अवैध रूप से बंधक बनाना और सरकारी कामकाज में बाधा डालना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद

न्यायिक अधिकारियों पर हमले के बाद पश्चिम बंगाल की तत्कालीन राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेतृत्व को व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। हालाँकि, TMC के एक धड़े ने इस हमले को उन लोगों का स्वतःस्फूर्त आक्रोश बताने की कोशिश की, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। आलोचकों का कहना है कि यह तर्क न्यायिक अधिकारियों पर हुई हिंसा को उचित नहीं ठहरा सकता।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक हिंसा के मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस जारी है। सबीना यास्मीन की 24 सितंबर को एनआईए के समक्ष उपस्थिति और उनके बयान से इस जांच को नई दिशा मिल सकती है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई इस पूछताछ के नतीजों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कानून के शासन पर सीधा प्रहार है — और एनआईए का टीएमसी विधायक तक पहुँचना यह संकेत देता है कि जांच अब राजनीतिक संरक्षण के सवाल तक आ गई है। गौरतलब है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का विरोध वैध हो सकता है, लेकिन न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी उस सीमा को पार करती है। असली परीक्षण यह होगा कि क्या एनआईए की जांच सत्ता संरचना तक पहुँचती है या केवल निचले स्तर के आरोपियों पर ही सिमट जाती है — पश्चिम बंगाल में अतीत में ऐसे मामले अधूरे रह जाने का रिकॉर्ड रहा है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोथाबारी न्यायिक अधिकारी हमला मामला क्या है?
यह मामला इस वर्ष अप्रैल में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक स्थित मोथाबारी में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हुए हमले से संबंधित है। एक हिंसक भीड़ ने BDO कार्यालय में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा और उनके वाहनों पर हमला किया।
एनआईए ने सबीना यास्मीन को क्यों समन भेजा है?
सबीना यास्मीन मालदा जिले की सुजापुर विधानसभा सीट से टीएमसी विधायक हैं और इस मामले में एनआईए उनसे पूछताछ करना चाहती है। इससे पहले एजेंसी उनके पति महबूब आलम को भी समन भेज चुकी है।
इस मामले में कितने आरोपी हैं और क्या आरोप लगाए गए हैं?
एनआईए ने दो चार्जशीट दाखिल की हैं जिनमें कुल 23 आरोपी हैं। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत हत्या की कोशिश, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, अवैध रूप से बंधक बनाना और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप हैं।
एसआईआर प्रक्रिया क्या होती है और इससे विवाद क्यों हुआ?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव से पहले मतदाता सूची की जाँच-पड़ताल की प्रक्रिया है। मोथाबारी में कथित तौर पर कुछ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से नाराज भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों पर हमला किया।
टीएमसी का इस मामले में क्या रुख रहा है?
टीएमसी के एक धड़े ने इस हमले को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर भड़के लोगों का स्वतःस्फूर्त गुस्सा बताने की कोशिश की। हालाँकि, इस तर्क की व्यापक आलोचना हुई और एनआईए की जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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