30 अगस्त 2026
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हिजाब और पहनावे पर बहस: रजा मुराद बोले — 'किसने क्या पहना, इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए'

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हिजाब और पहनावे पर बहस: रजा मुराद बोले — 'किसने क्या पहना, इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए'

सारांश

बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने साफ कहा — किसी के पहनावे या खान-पान पर निशाना साधना निजी स्वतंत्रता का हनन है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब आदेश पर उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा जताया और विवाद से चर्चा पाने की संस्कृति को नकारा।

मुख्य बातें

वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने 30 अगस्त को कहा कि किसी के पहनावे या खान-पान पर सार्वजनिक निशाना साधना उचित नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब-यूनिफॉर्म आदेश पर मुराद ने कहा — याचिकाकर्ता के पास सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार है।
मुराद के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ आत्म-संयम और स्व-नियंत्रण भी जरूरी है।
कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़े बॉलीवुड ड्रेस विवादों पर कहा — कुछ विवाद जानबूझकर पैदा किए जाते हैं।
उन्होंने अपील की कि लोग काम, प्रदर्शन और समाजसेवा से पहचान बनाएं, विवाद से नहीं।

बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने लखनऊ में 30 अगस्त को पहनावे और खान-पान को सार्वजनिक विवाद का विषय बनाने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद, जिसमें यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई है, यह मुद्दा कानूनी सीमाओं से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। मुराद ने स्पष्ट कहा कि किसी के लिबास या खान-पान को निशाना बनाना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट के आदेश पर रजा मुराद का रुख

रजा मुराद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जिस छात्रा ने याचिका दायर की थी, उसके पास सर्वोच्च न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, 'कई बार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। अगर उसे लगता है कि उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे उसके लिए खुले हैं और सुप्रीम कोर्ट का जो भी निष्पक्ष फैसला होगा, उसे हमें मानना चाहिए।' उन्होंने इस पूरे मामले को न्यायिक प्रक्रिया पर छोड़ने की वकालत की।

पहनावा और खान-पान — निजी जीवन का हिस्सा

मुराद ने दो-टूक कहा कि कोई क्या पहनता है और क्या खाता है, यह पूरी तरह उसका निजी मामला है। उनके शब्दों में, 'मैं क्या पहनता हूं, मैं क्या खाता हूं — यह मेरी निजी जिंदगी है और इसे जीने का मुझे पूरा हक है। मेरे घर में क्या पक रहा है, यह मेरी चारदीवारी का मामला है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहनावे में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए, लेकिन इस सीमा के भीतर व्यक्ति को पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।

विवाद को हवा देने की संस्कृति पर चिंता

वरिष्ठ अभिनेता ने उस प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई जिसमें लोग जानबूझकर विवादित बयान देकर चर्चा में बने रहते हैं। उन्होंने कहा, 'विवादित बात करेंगे तो विवाद फैलता जाएगा। विवाद को फैलाना आजकल एक रिवाज बन गया है।' उनका मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ आत्म-संयम और स्व-नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। गौरतलब है कि बॉलीवुड में भी हाल के वर्षों में पहनावे को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं।

बॉलीवुड के विवादों पर नजरिया

हाल ही में कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़े पहनावे के विवादों पर टिप्पणी करते हुए मुराद ने कहा कि कुछ विवाद स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जबकि कुछ जानबूझकर पैदा किए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'हर एक्शन का रिएक्शन होता है। कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए जिससे सुनने वाला या जिसके बारे में कहा जा रहा है, वह आहत महसूस करे।'

काम और समाजसेवा से पहचान बनाने की अपील

मुराद ने लोगों से अपील की कि वे विवाद के बजाय अपने काम, प्रदर्शन और समाजसेवा के जरिए पहचान बनाएं। उनके शब्दों में, 'अपना काम कीजिए — देश के प्रति, देशवासियों के प्रति। अपना कर्तव्य निभाइए और चर्चा में रहिए। इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि किसने क्या पहना है और कौन क्या खा रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर सामाजिक बहस तेज होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह दरअसल उस बड़े सवाल को छूती है जिसे मुख्यधारा की बहस अक्सर नजरअंदाज करती है — कि क्या सार्वजनिक विमर्श में निजी पहचान को बार-बार केंद्र में लाना सामाजिक ध्रुवीकरण को और गहरा करता है। न्यायिक प्रक्रिया पर उनका भरोसा सराहनीय है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि नीति-निर्माता और सार्वजनिक हस्तियाँ यह तय करें कि संस्थागत अनुशासन और व्यक्तिगत आस्था के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए — क्योंकि यह सवाल सिर्फ एक हाईकोर्ट के आदेश से नहीं सुलझेगा।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रजा मुराद ने हिजाब विवाद पर क्या कहा?
रजा मुराद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और याचिकाकर्ता के पास सर्वोच्च न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निष्पक्ष फैसला सभी को मानना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का हिजाब आदेश क्या है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि यूनिफॉर्म के साथ हिजाब नहीं पहना जाना चाहिए। इस आदेश के बाद यह मुद्दा कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।
क्या पहनावा और खान-पान निजी मामला है?
रजा मुराद के अनुसार, कोई क्या पहनता है और क्या खाता है — यह पूरी तरह उसका निजी मामला है। उन्होंने कहा कि इस पर सार्वजनिक निशाना साधना उचित नहीं, बशर्ते पहनावे में अश्लीलता न हो।
बॉलीवुड में पहनावे के विवादों पर रजा मुराद की क्या राय है?
मुराद ने कहा कि कुछ विवाद स्वाभाविक होते हैं और कुछ जानबूझकर पैदा किए जाते हैं ताकि चर्चा में रहा जा सके। उन्होंने कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़े विवादों के संदर्भ में कहा कि हर एक्शन का रिएक्शन होता है और किसी को आहत करने वाली बात नहीं कहनी चाहिए।
रजा मुराद के अनुसार लोगों को किस तरह चर्चा में रहना चाहिए?
मुराद का मानना है कि लोगों को अपने काम, प्रदर्शन और समाजसेवा के जरिए पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद पैदा करके चर्चा में रहना कोई सार्थक रास्ता नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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