हिजाब और पहनावे पर बहस: रजा मुराद बोले — 'किसने क्या पहना, इस पर निशाना नहीं साधना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने लखनऊ में 30 अगस्त को पहनावे और खान-पान को सार्वजनिक विवाद का विषय बनाने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद, जिसमें यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई है, यह मुद्दा कानूनी सीमाओं से निकलकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। मुराद ने स्पष्ट कहा कि किसी के लिबास या खान-पान को निशाना बनाना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश पर रजा मुराद का रुख
रजा मुराद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जिस छात्रा ने याचिका दायर की थी, उसके पास सर्वोच्च न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा, 'कई बार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया है। अगर उसे लगता है कि उसके साथ इंसाफ नहीं हुआ है, तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे उसके लिए खुले हैं और सुप्रीम कोर्ट का जो भी निष्पक्ष फैसला होगा, उसे हमें मानना चाहिए।' उन्होंने इस पूरे मामले को न्यायिक प्रक्रिया पर छोड़ने की वकालत की।
पहनावा और खान-पान — निजी जीवन का हिस्सा
मुराद ने दो-टूक कहा कि कोई क्या पहनता है और क्या खाता है, यह पूरी तरह उसका निजी मामला है। उनके शब्दों में, 'मैं क्या पहनता हूं, मैं क्या खाता हूं — यह मेरी निजी जिंदगी है और इसे जीने का मुझे पूरा हक है। मेरे घर में क्या पक रहा है, यह मेरी चारदीवारी का मामला है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पहनावे में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए, लेकिन इस सीमा के भीतर व्यक्ति को पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए।
विवाद को हवा देने की संस्कृति पर चिंता
वरिष्ठ अभिनेता ने उस प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई जिसमें लोग जानबूझकर विवादित बयान देकर चर्चा में बने रहते हैं। उन्होंने कहा, 'विवादित बात करेंगे तो विवाद फैलता जाएगा। विवाद को फैलाना आजकल एक रिवाज बन गया है।' उनका मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ आत्म-संयम और स्व-नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है। गौरतलब है कि बॉलीवुड में भी हाल के वर्षों में पहनावे को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं।
बॉलीवुड के विवादों पर नजरिया
हाल ही में कृति सेनन और कंगना रनौत से जुड़े पहनावे के विवादों पर टिप्पणी करते हुए मुराद ने कहा कि कुछ विवाद स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जबकि कुछ जानबूझकर पैदा किए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'हर एक्शन का रिएक्शन होता है। कोई ऐसी बात नहीं होनी चाहिए जिससे सुनने वाला या जिसके बारे में कहा जा रहा है, वह आहत महसूस करे।'
काम और समाजसेवा से पहचान बनाने की अपील
मुराद ने लोगों से अपील की कि वे विवाद के बजाय अपने काम, प्रदर्शन और समाजसेवा के जरिए पहचान बनाएं। उनके शब्दों में, 'अपना काम कीजिए — देश के प्रति, देशवासियों के प्रति। अपना कर्तव्य निभाइए और चर्चा में रहिए। इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि किसने क्या पहना है और कौन क्या खा रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर सामाजिक बहस तेज होती जा रही है।