श्रेया घोषाल का भजन 'सिद्धा भजो' रिलीज़: पिता की यादों से जुड़ी आवाज़ ने दिलों को छुआ
सारांश
मुख्य बातें
गायिका श्रेया घोषाल का नया भजन 'सिद्धा भजो' रिलीज़ होते ही श्रोताओं के बीच गहरी छाप छोड़ रहा है। मुंबई में इस भजन को लेकर बात करते हुए श्रेया ने बताया कि यह गीत उनके लिए महज़ एक संगीत प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अपने पिता की सबसे प्रिय धुन को दुनिया तक पहुँचाने का एक भावुक प्रयास है। भजन की रिकॉर्डिंग के दौरान वे एक गायिका से ज़्यादा एक बेटी की भूमिका में थीं।
भजन से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव
श्रेया ने बताया, 'सिद्धा भजो' में आध्यात्मिकता की गहराई और सादगी का अनूठा संगम है। उनके अनुसार, यह भजन इंसान को अपने भीतर झाँकने और आत्म-चिंतन का संदेश देता है। उन्होंने कहा, 'जब मैं इसकी रिकॉर्डिंग कर रही थी, तब मुझे एक अलग तरह की शांति महसूस हुई।'
पिता की याद और बचपन की अनुभूति
गायिका ने भावुक होते हुए कहा कि 'सिद्धा भजो' उनके पिता का सर्वाधिक प्रिय भजन रहा है। बचपन से घर में इस भजन की गूँज सुनते-सुनते वे इसके आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करती रहीं। उन्होंने कहा, 'जब मुझे इस भजन को गाने का मौका मिला तो मेरे मन में अपने पिता की कई यादें ताजा हो गईं।' श्रेया ने बताया कि उनके पिता ने हमेशा परिवार को आध्यात्मिकता, शांति और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया।
आज की भागदौड़ में भजन की प्रासंगिकता
श्रेया का मानना है कि आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में यह भजन विशेष रूप से ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'हर कोई भागदौड़ और ज़िम्मेदारियों में उलझा रहता है। ऐसे समय में यह भजन लोगों को कुछ पल रुककर खुद के बारे में सोचने और अपने भीतर की आवाज़ सुनने की प्रेरणा देता है।' उन्हें उम्मीद है कि जिस सुकून का एहसास उन्हें इस भजन ने कराया, वही अनुभव श्रोताओं को भी होगा।
बेटी की आवाज़ में पिता की पसंद
श्रेया ने स्पष्ट किया कि 'सिद्धा भजो' को रिकॉर्ड करते समय वे केवल एक गायिका नहीं थीं — वे एक बेटी थीं, जो अपने पिता की पसंद और उनकी सोच को अपनी आवाज़ के ज़रिये दुनिया तक पहुँचाने की कोशिश कर रही थीं। यह भजन श्रेया के संगीत सफर में एक नई और गहरी परत जोड़ता है, जो आने वाले समय में उनके प्रशंसकों के दिलों में और गहरी जगह बनाएगा।