17 जुलाई 2026
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श्रेया घोषाल का भजन 'सिद्धा भजो' रिलीज़: पिता की यादों से जुड़ी आवाज़ ने दिलों को छुआ

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श्रेया घोषाल का भजन 'सिद्धा भजो' रिलीज़: पिता की यादों से जुड़ी आवाज़ ने दिलों को छुआ

सारांश

श्रेया घोषाल का नया भजन 'सिद्धा भजो' सिर्फ संगीत नहीं — यह एक बेटी की अपने पिता को श्रद्धांजलि है। बचपन से घर में गूँजती इस धुन को आवाज़ देते हुए वे भावुक हो उठीं और बोलीं, इस भजन ने उनके पिता की अनगिनत यादें ताज़ा कर दीं।

मुख्य बातें

गायिका श्रेया घोषाल का भजन 'सिद्धा भजो' हाल ही में रिलीज़ हुआ और श्रोताओं में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है।
श्रेया ने बताया कि यह भजन उनके पिता का सबसे प्रिय भजन रहा है और बचपन से वे इसे घर में सुनती आई हैं।
रिकॉर्डिंग के दौरान श्रेया ने खुद को एक गायिका से ज़्यादा एक बेटी के रूप में महसूस किया।
भजन का संदेश आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक शांति पर केंद्रित है, जिसे श्रेया ने आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में विशेष रूप से प्रासंगिक बताया।
श्रेया के अनुसार उनके पिता ने हमेशा परिवार को आध्यात्मिकता , शांति और सकारात्मक सोच का महत्व सिखाया।

गायिका श्रेया घोषाल का नया भजन 'सिद्धा भजो' रिलीज़ होते ही श्रोताओं के बीच गहरी छाप छोड़ रहा है। मुंबई में इस भजन को लेकर बात करते हुए श्रेया ने बताया कि यह गीत उनके लिए महज़ एक संगीत प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अपने पिता की सबसे प्रिय धुन को दुनिया तक पहुँचाने का एक भावुक प्रयास है। भजन की रिकॉर्डिंग के दौरान वे एक गायिका से ज़्यादा एक बेटी की भूमिका में थीं।

भजन से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव

श्रेया ने बताया, 'सिद्धा भजो' में आध्यात्मिकता की गहराई और सादगी का अनूठा संगम है। उनके अनुसार, यह भजन इंसान को अपने भीतर झाँकने और आत्म-चिंतन का संदेश देता है। उन्होंने कहा, 'जब मैं इसकी रिकॉर्डिंग कर रही थी, तब मुझे एक अलग तरह की शांति महसूस हुई।'

पिता की याद और बचपन की अनुभूति

गायिका ने भावुक होते हुए कहा कि 'सिद्धा भजो' उनके पिता का सर्वाधिक प्रिय भजन रहा है। बचपन से घर में इस भजन की गूँज सुनते-सुनते वे इसके आध्यात्मिक संदेश को आत्मसात करती रहीं। उन्होंने कहा, 'जब मुझे इस भजन को गाने का मौका मिला तो मेरे मन में अपने पिता की कई यादें ताजा हो गईं।' श्रेया ने बताया कि उनके पिता ने हमेशा परिवार को आध्यात्मिकता, शांति और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया।

आज की भागदौड़ में भजन की प्रासंगिकता

श्रेया का मानना है कि आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में यह भजन विशेष रूप से ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'हर कोई भागदौड़ और ज़िम्मेदारियों में उलझा रहता है। ऐसे समय में यह भजन लोगों को कुछ पल रुककर खुद के बारे में सोचने और अपने भीतर की आवाज़ सुनने की प्रेरणा देता है।' उन्हें उम्मीद है कि जिस सुकून का एहसास उन्हें इस भजन ने कराया, वही अनुभव श्रोताओं को भी होगा।

बेटी की आवाज़ में पिता की पसंद

श्रेया ने स्पष्ट किया कि 'सिद्धा भजो' को रिकॉर्ड करते समय वे केवल एक गायिका नहीं थीं — वे एक बेटी थीं, जो अपने पिता की पसंद और उनकी सोच को अपनी आवाज़ के ज़रिये दुनिया तक पहुँचाने की कोशिश कर रही थीं। यह भजन श्रेया के संगीत सफर में एक नई और गहरी परत जोड़ता है, जो आने वाले समय में उनके प्रशंसकों के दिलों में और गहरी जगह बनाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे महज़ व्यावसायिक धार्मिक रिलीज़ से अलग करती है। हालाँकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह भावनात्मक जुड़ाव दीर्घकालिक श्रोता आधार तैयार करता है या यह केवल एक भावनात्मक लहर तक सीमित रहता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रेया घोषाल का भजन 'सिद्धा भजो' किस बारे में है?
'सिद्धा भजो' एक आध्यात्मिक भजन है जो आत्म-चिंतन और भीतरी शांति का संदेश देता है। श्रेया घोषाल के अनुसार इस भजन में आध्यात्मिकता की गहराई और सादगी का संगम है।
श्रेया घोषाल का 'सिद्धा भजो' से इतना गहरा जुड़ाव क्यों है?
श्रेया ने बताया कि यह भजन उनके पिता का सबसे प्रिय भजन रहा है और वे बचपन से इसे घर में सुनती आई हैं। रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें पिता की कई यादें ताज़ा हो गईं।
श्रेया घोषाल ने 'सिद्धा भजो' की रिकॉर्डिंग के अनुभव के बारे में क्या कहा?
श्रेया ने कहा कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें एक अलग तरह की शांति महसूस हुई और वे केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक बेटी के रूप में गा रही थीं जो अपने पिता की पसंद को दुनिया तक पहुँचाना चाहती थीं।
श्रेया घोषाल के अनुसार आज के समय में यह भजन क्यों ज़रूरी है?
श्रेया का मानना है कि आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में लोग अपने आप से दूर हो जाते हैं। यह भजन श्रोताओं को कुछ पल रुककर आत्म-चिंतन करने और भीतर की आवाज़ सुनने की प्रेरणा देता है।
'सिद्धा भजो' श्रेया घोषाल के पिता से कैसे जुड़ा है?
श्रेया के पिता का यह सबसे प्रिय भजन रहा है। उनके पिता ने परिवार को हमेशा आध्यात्मिकता, शांति और सकारात्मक सोच का महत्व सिखाया, और यह भजन उन्हीं मूल्यों का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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