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सुनील दत्त की जयंती: 'भारत की विविधता सबसे बड़ा खजाना है' — प्रसार भारती आर्काइव वीडियो वायरल

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सुनील दत्त की जयंती: 'भारत की विविधता सबसे बड़ा खजाना है' — प्रसार भारती आर्काइव वीडियो वायरल

सारांश

सुनील दत्त की जयंती पर प्रसार भारती के आर्काइव से एक पुराना वीडियो सामने आया जिसमें वे भारत की विविधता को देश का सबसे बड़ा खजाना बताते हैं। उनका संदेश — जज्बातों का धागा ही देश को जोड़ता है — आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

मुख्य बातें

सुनील दत्त की 6 जून को जयंती; प्रसार भारती आर्काइव का पुराना वीडियो सामने आया।
वीडियो में उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग मज़हब, भाषाएँ, रिवाज और लोकगीत देश का सबसे बड़ा खजाना हैं।
उनके अनुसार देश की एकता का आधार जज्बातों का धागा है, जिसे स्वार्थी तत्व तोड़ने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने अपील की कि विविधता को कभी विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए।
सुनील दत्त अभिनेता के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में भी जाने जाते थे।

दिवंगत अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुनील दत्त की 6 जून को जयंती के अवसर पर प्रसार भारती के आर्काइव से एक पुराना वीडियो सामने आया है, जिसमें वे भारत की एकता, विविधता और राष्ट्रीय भावनाओं पर गहरी बातें करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में सुनील दत्त ने भारत की बहुरंगी संस्कृति को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया और लोगों से अपील की कि वे इसे कभी विभाजन का कारण न बनने दें।

एकता का धागा: जज्बातों की बात

सुनील दत्त ने वीडियो में कहा कि आज भी अगर यह देश एक-दूसरे से बंधा हुआ है, तो वह धागा हमारे जज्बातों का है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए इन भावनाओं को छेड़ देते हैं और उन्हें गलत रास्ते पर ले जाते हैं, जिससे देश को नुकसान होता है और मासूम नागरिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने लोगों से प्रार्थना की कि वे देश और नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए गलत राह न अपनाएँ। उनके शब्दों में: 'कम से कम जज्बातों को सामने रखकर और देश को सामने रखकर उन्हें गलत रास्ते पर नहीं लगाना चाहिए।'

विविधता को बताया सबसे बड़ा खजाना

सुनील दत्त ने भारत की विविधता की एक खूबसूरत तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग मज़हब, अलग-अलग भाषाएँ, अलग-अलग लिबास, अलग-अलग रिवाज और लोकगीत हैं। दुनिया भले ही इसे अलग तरह का देश कहे, लेकिन उनके अनुसार यही विविधता भारत का सबसे बड़ा खजाना है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है और इसे हर हाल में बनाए रखना चाहिए। गौरतलब है कि यह संदेश आज के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में भी उतना ही प्रासंगिक माना जा रहा है।

सामाजिक सद्भाव के अग्रदूत

सुनील दत्त केवल एक सफल फिल्म अभिनेता नहीं थे — वे एक संवेदनशील इंसान और समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और शांति के लिए अनेक प्रयास किए। बच्चों की मदद से लेकर शांति मार्च तक, उनका योगदान बहुआयामी रहा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता दी और संसद में आम नागरिकों की आवाज़ उठाई।

प्रसार भारती आर्काइव: इतिहास की झलक

प्रसार भारती के आर्काइव से सामने आए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक एकता और विविधता को लेकर बहस जारी है। सुनील दत्त के ये विचार, जो दशकों पहले कहे गए थे, आज भी उतनी ही गहराई से महसूस किए जा रहे हैं।

उनकी जयंती पर इस वीडियो का सामने आना एक ऐसे नेता और कलाकार की विरासत को याद दिलाता है, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी भारत की साझा संस्कृति को मजबूत करने में लगाई।

संपादकीय दृष्टिकोण

दशकों पुराने ये शब्द एक आईना बन जाते हैं। उनकी जयंती पर इस वीडियो का वायरल होना यह भी बताता है कि जनता अभी भी ऐसी आवाज़ों की तलाश में है जो विभाजन नहीं, जोड़ने की बात करें।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील दत्त की जयंती कब है?
सुनील दत्त की जयंती 6 जून को मनाई जाती है। वे दिवंगत अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री थे जिन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए जीवनभर काम किया।
प्रसार भारती आर्काइव वीडियो में सुनील दत्त ने क्या कहा?
वीडियो में सुनील दत्त ने भारत की विविधता — अलग-अलग मज़हब, भाषाएँ, रिवाज और लोकगीत — को देश का सबसे बड़ा खजाना बताया। उन्होंने यह भी कहा कि देश की एकता का आधार जज्बातों का धागा है जिसे स्वार्थी तत्वों से बचाना ज़रूरी है।
सुनील दत्त सामाजिक कार्यों के लिए क्यों जाने जाते थे?
सुनील दत्त ने फिल्मी करियर के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, शांति मार्च और बच्चों की मदद जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने आम नागरिकों के मुद्दे उठाए।
सुनील दत्त के अनुसार भारत की विविधता कमज़ोरी है या ताकत?
सुनील दत्त के अनुसार भारत की विविधता उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत और खजाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विविधता को कभी विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए।
यह वीडियो अभी क्यों चर्चा में है?
सुनील दत्त की जयंती (6 जून) के अवसर पर प्रसार भारती के आर्काइव से यह पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें उनके राष्ट्रीय एकता संबंधी विचार हैं। सामाजिक एकता की चर्चा के बीच यह वीडियो व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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