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सुनील दत्त और संजय दत्त के अनसुने किस्से: 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग में पिता-पुत्र का अनोखा बंधन

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सुनील दत्त और संजय दत्त के अनसुने किस्से: 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग में पिता-पुत्र का अनोखा बंधन

सारांश

सुनील दत्त और संजय दत्त की जोड़ी सिर्फ पर्दे पर नहीं, सेट के पीछे भी उतनी ही जीवंत थी। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग के वो किस्से — जहाँ पिता ने बेटे को हर टेक में नया एग्जाम दिया — भारतीय सिनेमा के सबसे गर्मजोशी भरे पारिवारिक अध्यायों में से एक हैं।

मुख्य बातें

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को पंजाब के झेलम जिले (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग के दौरान सुनील दत्त ने मज़ाक में निर्देशक से कहा था — 'घर पर मैं इसे पहले ही बहुत डांट देता हूं, सेट पर मत डांटिए।' 1957 में फिल्म 'मदर इंडिया' ने उन्हें स्टारडम दिलाया; इसी फिल्म के सेट पर नरगिस से उनका परिचय हुआ, जो बाद में शादी में बदला।
सुनील दत्त ने बस कंडक्टर से लेकर रेडियो और फिर फिल्मों तक का सफ़र तय किया।
वे कई बार लोकसभा सांसद चुने गए और 2005 में उनका निधन हुआ।

बॉलीवुड के महान अभिनेता सुनील दत्त और उनके बेटे संजय दत्त के बीच का रिश्ता हमेशा से अपने आप में एक अलग कहानी रहा है — और फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग के दौरान यह बंधन और भी गहरा और यादगार बन गया। पर्दे पर पिता-पुत्र की जोड़ी ने दर्शकों के दिल जीते, लेकिन सेट के पीछे के किस्से उतने ही मज़ेदार और भावनात्मक थे।

सेट पर पिता का अनोखा अंदाज़

फिल्म की शूटिंग के दौरान सुनील दत्त का एक मशहूर किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बनता है। जब कभी निर्देशक संजय दत्त को किसी दृश्य को लेकर फटकार लगाते, तो सुनील दत्त मज़ाकिया लहजे में कह देते — 'घर पर मैं इसे पहले ही बहुत डांट देता हूं, अब आप लोग इसे सेट पर मत डांटिए।' यह जुमला सेट पर हँसी की लहर दौड़ा देता था और दोनों के बीच की सहज केमिस्ट्री को दर्शाता था।

कहा जाता है कि सुनील दत्त शूटिंग के दौरान जानबूझकर संजय के संवाद बदल देते थे, ताकि वह हर दृश्य में नया कुछ सीखें। इस पर संजय दत्त अक्सर मज़ाक में कहते थे — 'पापा के साथ शूटिंग मतलब हर टेक में नया एग्जाम।'

सुनील दत्त: संघर्ष से स्टारडम तक

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को पंजाब के झेलम जिले के खुर्द गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। बचपन में ही पिता का निधन हो जाने से उनका जीवन कठिनाइयों से घिरा रहा। 1947 के विभाजन के दौरान उन्होंने अपने परिवार के साथ भारत आने का दर्दनाक सफ़र तय किया।

आजीविका के लिए उन्होंने बस कंडक्टर की नौकरी से लेकर छोटे-मोटे काम तक किए। पढ़ाई के साथ-साथ मेहनत जारी रखते हुए वे रेडियो से जुड़े, जहाँ उनकी आवाज़ और व्यक्तित्व को पहचान मिली। इसी सीढ़ी से वे फिल्मों तक पहुँचे और 1955 में फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' से अपने अभिनय सफ़र की शुरुआत की।

मदर इंडिया और नरगिस से प्रेम

1957 में आई फिल्म 'मदर इंडिया' ने सुनील दत्त को रातोंरात स्टार बना दिया। गुस्सैल बेटे 'बिरजू' का उनका किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर है। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री नरगिस से हुई, जो आगे चलकर शादी में बदल गई। दोनों के तीन संतानें हुईं — संजय दत्त, प्रिया दत्त और नम्रता दत्त

उतार-चढ़ाव और वापसी

अपने करियर में सुनील दत्त ने कई सुपरहिट फिल्में दीं, लेकिन फिल्म 'रेशमा और शेरा' की असफलता के बाद वे कर्ज़ में भी डूबे। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से एक बार फिर उद्योग में अपनी पहचान मज़बूत की।

राजनीति में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और कई बार लोकसभा सांसद चुने गए। 2005 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका काम और उनका इंसानी स्वभाव आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा है।

पिता-पुत्र की विरासत

'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में पर्दे पर साथ आई इस जोड़ी ने दर्शकों को एक ऐसा भावनात्मक अनुभव दिया जो सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी का प्रतिबिंब था। सुनील दत्त की परवरिश और संजय दत्त की ज़िंदगी की उठा-पटक — दोनों मिलकर भारतीय सिनेमा की एक अनूठी दास्तान बनाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विभाजन की पीड़ा झेलकर, गरीबी से लड़कर और फिर अपने बेटे की परवरिश करते हुए एक पूरी पीढ़ी के संघर्ष का प्रतीक है। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के वे किस्से इसलिए भी मायने रखते हैं क्योंकि वे बताते हैं कि स्क्रीन पर दिखने वाली केमिस्ट्री असल ज़िंदगी की गहरी जड़ों से आती है। बॉलीवुड में पिता-पुत्र की जोड़ियाँ अक्सर प्रचार का हिस्सा बनती हैं, लेकिन सुनील-संजय का रिश्ता उससे परे था — यह अनुशासन, प्रेम और विरासत का एक जीवंत दस्तावेज़ था।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील दत्त और संजय दत्त ने 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में साथ काम किया था?
हाँ, 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में सुनील दत्त और संजय दत्त ने पर्दे पर पिता-पुत्र की भूमिका निभाई थी, जो वास्तविक जीवन में भी उनका रिश्ता था। इस जोड़ी ने दर्शकों के बीच गहरा भावनात्मक प्रभाव छोड़ा।
सुनील दत्त का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को पंजाब के झेलम जिले के खुर्द गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। 1947 के विभाजन के दौरान वे अपने परिवार के साथ भारत आए।
सुनील दत्त की सबसे यादगार फिल्म कौन सी मानी जाती है?
1957 में आई फिल्म 'मदर इंडिया' को उनके करियर की सबसे यादगार फिल्म माना जाता है, जिसमें उन्होंने गुस्सैल बेटे 'बिरजू' का किरदार निभाया। इसी फिल्म के सेट पर उनकी मुलाकात अभिनेत्री नरगिस से हुई, जिनसे उन्होंने बाद में शादी की।
सुनील दत्त का निधन कब हुआ?
सुनील दत्त का निधन 2005 में हुआ। वे अपने अभिनय के अलावा कई बार लोकसभा सांसद भी रहे और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे।
'मुन्ना भाई एमबीबीएस' सेट पर सुनील दत्त का कौन सा किस्सा मशहूर है?
जब निर्देशक संजय दत्त को किसी दृश्य पर फटकार लगाते, तो सुनील दत्त मज़ाक में कहते — 'घर पर मैं इसे पहले ही बहुत डांट देता हूं, अब आप लोग इसे सेट पर मत डांटिए।' यह जुमला सेट पर हँसी का कारण बनता था और दोनों के बीच की सहज केमिस्ट्री को दर्शाता था।
राष्ट्र प्रेस
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