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वहीदा रहमान ने किया खुलासा: 'मुझे जीने दो' की शूटिंग में सुनील दत्त के रौद्र रूप से घबरा गई थीं, नरगिस से की थी शिकायत

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वहीदा रहमान ने किया खुलासा: 'मुझे जीने दो' की शूटिंग में सुनील दत्त के रौद्र रूप से घबरा गई थीं, नरगिस से की थी शिकायत

सारांश

चंबल घाटी की शूटिंग के दौरान सुनील दत्त डाकू के किरदार में इस कदर डूब गए कि वहीदा रहमान को नरगिस से उनकी शिकायत करनी पड़ी। फिर एक दिन बीएसएफ के साथ उनके अचानक आने का राज़ खुला — और सेट पर खलबली मच गई।

मुख्य बातें

वहीदा रहमान ने टॉक शो 'जीना इसी का नाम है' में 'मुझे जीने दो' की शूटिंग का रोचक किस्सा साझा किया।
सुनील दत्त ठाकुर जरनैल सिंह के किरदार में इतने डूबे कि असल जिंदगी में भी डाकू जैसा व्यवहार करने लगे थे।
शूटिंग चंबल घाटी में टेंट लगाकर हुई थी; नरगिस अपने ढाई साल के बेटे संजय दत्त के साथ सेट पर आई थीं।
सुनील दत्त बीएसएफ कमांडर के साथ लौटे और हथियारबंद जवानों के साथ महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
दोनों कलाकारों ने 'रेशमा और शेरा' , 'एक फूल चार कांटे' सहित कई फिल्मों में साथ काम किया।
सुनील दत्त का निधन 25 मई 2005 को मुंबई के बांद्रा स्थित आवास पर दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।

अभिनेत्री वहीदा रहमान ने टॉक शो 'जीना इसी का नाम है' में एक ऐसा किस्सा साझा किया जो हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की एक अनोखी झलक पेश करता है। उन्होंने बताया कि फिल्म 'मुझे जीने दो' की शूटिंग के दौरान अभिनेता सुनील दत्त इतने गहरे किरदार में डूब गए थे कि उनका व्यवहार सेट पर सबको चौंका देता था — यहाँ तक कि उनकी पत्नी नरगिस से भी वहीदा को शिकायत करनी पड़ी थी।

चंबल घाटी में टेंट लगाकर हुई थी शूटिंग

वहीदा रहमान ने बताया कि सुनील दत्त हमेशा अपनी फिल्मों के लिए असाधारण और जीवंत लोकेशन चुनते थे। 'मुझे जीने दो' की शूटिंग चंबल घाटी में हुई, जहाँ पूरी टीम टेंट लगाकर रहती थी। फिल्म में सुनील दत्त ठाकुर जरनैल सिंह का किरदार निभा रहे थे — एक डाकू का रोल — और वे उसे असल जिंदगी में भी जीने लगे थे। उन्होंने बताया, 'वह न हंसते थे, न मुस्कुराते थे, और पूरी तरह अपने रोल में डूबे रहते थे।'

नरगिस से की थी शिकायत

कुछ दिनों बाद नरगिस अपने छोटे बेटे संजू (संजय दत्त) के साथ शूटिंग लोकेशन पर पहुँचीं। उस समय संजय दत्त करीब ढाई साल के थे। वहीदा ने उन्हें देखते ही शिकायत कर दी। उन्होंने कहा, 'नरगिस, अपने पति को समझाइए। ये असल जिंदगी में भी डाकू की तरह क्यों व्यवहार कर रहे हैं? बिल्कुल हिटलर जैसे हो गए हैं। हर समय पूछते रहते हैं — कहाँ जा रहे हो? क्यों आ रहे हो?'

घाट पर खाने के दौरान अचानक आया तूफ़ान

वहीदा ने बताया कि तीन दिन बाद शूटिंग के दौरान वे, निरूपा रॉय और नरगिस घाट पर बैठकर खाना खा रही थीं। तभी सुनील दत्त वहाँ आए और ऊँची आवाज़ में बोले, 'मिसेज दत्त, उठिए… आप सब भी उठिए… वहीदा जी, उठिए।' वहीदा ने मज़े लेते हुए कहा कि शुक्र है उन्होंने उन्हें 'वहीदा जी' कहा। नरगिस के पूछने पर उन्होंने बस इतना कहा, 'आप बहुत सवाल पूछती हैं, बस उठिए।' पूरी टीम एक-दूसरे का मुँह देखती रह गई।

बीएसएफ के साथ लौटे सुनील दत्त, खुला राज़

कुछ देर बाद सुनील दत्त बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के एक कमांडर के साथ लौटे। उनके चेहरे के भाव देखकर ही सबको अंदाज़ा हो गया कि मामला गंभीर है। उन्होंने कहा, 'लेडीज, जल्दी उठिए और जीप में बैठ जाइए।' एक जीप आगे थी और दूसरी पीछे — महिलाओं को बीच वाली जीप में बैठाया गया और चारों ओर हथियारबंद जवान तैनात थे।

सुनील दत्त और वहीदा रहमान का साझा सफ़र

वहीदा रहमान और सुनील दत्त ने 'एक फूल चार कांटे', 'मुझे जीने दो', 'मेरी भाभी', 'दर्पण', 'रेशमा और शेरा' और 'ज़िंदगी ज़िंदगी' जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया। दिग्गज अभिनेता एवं राजनेता सुनील दत्त का 25 मई 2005 को निधन हो गया था। मुंबई के बांद्रा स्थित अपने आवास पर नींद में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। उनकी यादें और उनसे जुड़े किस्से आज भी उनके चाहने वालों के दिलों में ज़िंदा हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बस कलाकार किरदार को जी लेता था। सुनील दत्त का चंबल में डाकू बन जाना और बीएसएफ के साथ टीम को सुरक्षित करना — दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं: वे फिल्म और ज़िम्मेदारी, दोनों को पूरी शिद्दत से निभाते थे। आज जब स्टार्स के 'प्रोफेशनलिज़्म' की बहस होती है, तो ऐसे किस्से याद दिलाते हैं कि पुराने दौर में सेट सिर्फ काम की जगह नहीं, एक जीवन-अनुभव था।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वहीदा रहमान ने सुनील दत्त के बारे में क्या किस्सा सुनाया?
वहीदा रहमान ने बताया कि 'मुझे जीने दो' की शूटिंग के दौरान सुनील दत्त डाकू के किरदार में इतने डूब गए थे कि असल जिंदगी में भी उनका व्यवहार रौद्र हो गया था। इससे घबराकर वहीदा ने नरगिस से उनकी शिकायत की थी।
'मुझे जीने दो' की शूटिंग कहाँ हुई थी?
फिल्म 'मुझे जीने दो' की शूटिंग चंबल घाटी में हुई थी, जहाँ पूरी टीम टेंट लगाकर रहती थी। सुनील दत्त अपनी फिल्मों के लिए हमेशा असाधारण और जीवंत लोकेशन चुनते थे।
बीएसएफ का उस शूटिंग किस्से से क्या संबंध था?
एक दिन सुनील दत्त अचानक सेट पर आए और महिलाओं को तुरंत जीप में बैठने को कहा। कुछ देर बाद वे बीएसएफ कमांडर के साथ लौटे और हथियारबंद जवानों के बीच महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, जिससे पता चला कि इलाके में कोई गंभीर खतरा था।
सुनील दत्त और वहीदा रहमान ने कौन-कौन सी फिल्मों में साथ काम किया?
दोनों ने 'एक फूल चार कांटे', 'मुझे जीने दो', 'मेरी भाभी', 'दर्पण', 'रेशमा और शेरा' और 'ज़िंदगी ज़िंदगी' सहित कई फिल्मों में साथ काम किया।
सुनील दत्त का निधन कब और कैसे हुआ?
दिग्गज अभिनेता एवं राजनेता सुनील दत्त का निधन 25 मई 2005 को हुआ था। मुंबई के बांद्रा स्थित अपने आवास पर नींद में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनका निधन हो गया।
राष्ट्र प्रेस
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