सुनील लहरी ने त्योहारों पर दी देशवासियों को बधाई, कहा-हमारी एकता से जलती है दुनिया
सारांश
Key Takeaways
- सुनील लहरी ने एकता और सद्भावना का संदेश दिया।
- भारत में कई त्योहार एक साथ मनाए जा रहे हैं।
- गुड़ी पड़वा, उगादी और चेटीचंद जैसे त्योहारों का महत्व।
- आपसी प्रेम और सम्मान को बढ़ावा देने की आवश्यकता।
मुंबई, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर भारत में कई महत्वपूर्ण त्योहार एक साथ मनाए जा रहे हैं। इस विशेष मौके पर प्रसिद्ध अभिनेता सुनील लहरी ने सभी देशवासियों को त्योहारों का महत्व समझाते हुए बधाई दी।
अभिनेता ने गुरुवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने कहा, "आज हमारे देश में एक साथ कई पर्व मनाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र और उसके चारों ओर के राज्यों में 'गुड़ी पड़वा' बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 'उगादी' का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। सिंधी समुदाय 'चेटीचंद' मना रहा है जबकि पूरे देश में ईद को लेकर उत्साह है। आज से चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ हो गया है।"
सुनील लहरी ने आगे कहा कि हम सभी मिलकर सभी त्योहारों का जश्न मना रहे हैं, और यही देखकर दुनिया को जलन होती है। कुछ लोग हमारे बीच फूट डालने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमें ऐसा नहीं होने देना चाहिए। हमें एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करना चाहिए और आपसी प्रेम और सद्भावना बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने सभी को इन त्योहारों की ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। अभिनेता ने वीडियो में लिखा, "देश में विभिन्न त्योहारों को एक साथ अपनी-अपनी परंपरा से प्रेम से मनाया जा रहा है, यही हमारी विविधता में एकता को दर्शाता है। आप सभी को त्योहारों की बधाई।"
ज्ञात हो कि 'गुड़ी पड़वा' महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह दिन नई शुरुआत, फसल की कटाई, और समृद्धि का प्रतीक है, जिसे घरों के बाहर 'गुड़ी' (विजय ध्वज) फहराकर और विशेष पकवानों के साथ मनाया जाता है।
'उगादी' मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मनाया जाने वाला हिंदू नववर्ष है। मान्यता है कि इस दिन ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इसे नई शुरुआत का पर्व माना जाता है।
'चेटीचंद' सिंधी नववर्ष का पर्व है, जो भगवान झूलेलाल (वरुण देव का अवतार) के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। उन्हें सिंधी लोग अपना संरक्षक संत और जल देवता मानते हैं।
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा की जाती है। इस दौरान ईद का त्योहार भी आता है। भारत में ऐसे कई अवसर आते हैं जब विभिन्न समुदाय मिलकर खुशियों का जश्न मनाते हैं।