स्वानंद किरकिरे की थिएटर वापसी: पाँच साल बाद 'यो ब्रदर, दिस इज 95' से पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल में धमाका
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायक-लेखक स्वानंद किरकिरे करीब पाँच साल के अंतराल के बाद एक बार फिर थिएटर के मंच पर कदम रखने जा रहे हैं। उनका नया म्यूजिकल प्ले 'यो ब्रदर, दिस इज 95' पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल में प्रीमियर होगा, जिसमें 1995 के भारत के छोटे शहरों की कहानी को व्यंग्य, डार्क ह्यूमर और लोक संगीत के माध्यम से पेश किया जाएगा।
नाटक की कहानी और पृष्ठभूमि
इस म्यूजिकल प्ले की पटकथा और निर्देशन दोनों स्वानंद किरकिरे ने खुद किए हैं। नाटक उस दौर में सेट है जब भारत में आर्थिक उदारीकरण के शुरुआती बदलाव दिखाई देने लगे थे और छोटे शहरों के युवा सेल्स की दुनिया में अपने लिए जगह बनाने की जद्दोजहद में थे। नाटक में बाज़ार, उपभोक्तावाद और बदलती महत्वाकांक्षाओं के बीच आम लोगों की ज़िंदगी को हास्य और संगीत के ज़रिए दर्शाया गया है।
किरकिरे के अनुसार, '''यो ब्रदर, दिस इज 95' उस दौर की कहानी है, जब भारत में सफलता के मायने बदलने लगे थे। हम आकांक्षाओं, अवसरों और उपभोक्तावाद की एक नई दुनिया में कदम रख रहे थे। टारगेट, इंसेंटिव और ग्रोथ जैसे शब्द रोज़मर्रा की बातचीत का हिस्सा बनने लगे थे।''
सामाजिक बदलाव का आईना
किरकिरे ने यह भी कहा, ''मुझे यह देखना दिलचस्प लगता है कि उस समय जो बदलाव सिर्फ आर्थिक लग रहे थे, उन्होंने धीरे-धीरे हमारे रिश्तों, महत्वाकांक्षाओं और खुद को या दूसरों को आंकने के तरीके को भी प्रभावित किया। इस नाटक में हम कुछ युवा सेल्सपर्सन की ज़िंदगी के ज़रिए इसी बदलाव को हास्य, संगीत और थोड़ी असहजता के साथ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।''
नाटक में वैक्यूम क्लीनर को एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। किरकिरे के शब्दों में, ''इस नाटक में वैक्यूम क्लीनर सिर्फ एक सामान नहीं है, बल्कि यह ऐसे समाज का प्रतीक है, जो खुद को बेचने, खरीदने और नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रहा है। असल में यह आम लोगों, उनके सपनों और उन समझौतों की कहानी है, जो वे अपने सफर में करते हैं।''
कलाकारों की भरी-पूरी मंडली
स्वानंद किरकिरे के साथ इस म्यूजिकल प्ले में स्टैंडअप कॉमेडियन आकाश गुप्ता, गरिमा दिवाकर, चिन्मय चंद्रांशु, ईशा पांडे, अभिषेक कौशल, रवि महाशब्दे, आयशा चौहान, संजीव विल्सन, चकोरी द्विवेदी, अप्सरा खान और चिन्मया शर्मा भी नज़र आएंगे। यह मंडली नाटक को एक जीवंत और बहुआयामी अनुभव बनाने का वादा करती है।
पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल का महत्व
किरकिरे ने पृथ्वी थिएटर फेस्टिवल का हिस्सा बनने पर विशेष उत्साह जताया। उनका कहना है कि यह मंच हमेशा से लाइव परफॉर्मेंस और अर्थपूर्ण कहानियों को सम्मान देता आया है। गौरतलब है कि पृथ्वी थिएटर मुंबई के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित स्थान रखता है, और इसका वार्षिक फेस्टिवल देश भर के रंगकर्मियों के लिए एक अहम पड़ाव माना जाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी थिएटर में प्रयोगधर्मी म्यूजिकल प्ले की माँग बढ़ रही है और दर्शक ऐसी कहानियों की तलाश में हैं जो उनकी जड़ों और सामाजिक स्मृतियों से जुड़ें। स्वानंद किरकिरे की यह वापसी हिंदी रंगमंच जगत के लिए एक उल्लेखनीय पल बनने की ओर अग्रसर है।