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AIIA निदेशक पीके प्रजापति का आह्वान: स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ, 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 2026 संपन्न

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AIIA निदेशक पीके प्रजापति का आह्वान: स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ, 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 2026 संपन्न

सारांश

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने नई दिल्ली में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 2026 का समापन किया। निदेशक पीके प्रजापति ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया और प्रतिभागियों को सामूहिक शपथ दिलाई।

मुख्य बातें

AIIA निदेशक पीके प्रजापति ने 2 अक्टूबर 2026 को 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के समापन पर स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक थीम 'स्वच्छता में सभा, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' के तहत चला।
संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, कर्मचारियों, रोगियों और उनके परिचारकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई।
अस्पताल परिसर में अपशिष्ट पृथक्करण, घरेलू खाद निर्माण और 3R पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुए।
समापन समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय की डीन मंजुषा राजगोपाला और AMS राजा राम महतो सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के निदेशक पीके प्रजापति ने 2 अक्टूबर 2026 को 'स्वच्छता ही सेवा' (SHS) अभियान 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता और साफ-सफाई केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हम सबकी साझा जवाबदेही है। उन्होंने संस्थान के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे स्वच्छता को अपने रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएँ। अभियान के समापन पर भाग लेने वाले सदस्यों को स्वच्छता की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई।

अभियान का स्वरूप और अवधि

AIIA के स्वास्थ्यवृत्त एवं योग विभाग द्वारा आयोजित यह पखवाड़ा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चला। अभियान की केंद्रीय थीम थी — 'स्वच्छता में सभा, स्वच्छ भारत, विकसित भारत'। इसका उद्देश्य संस्थान परिसर और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को सुदृढ़ करना था।

मुख्य गतिविधियाँ और भागीदारी

अभियान में संकाय सदस्य, पीएचडी शोधार्थी, स्नातकोत्तर शोधार्थी, कर्मचारी, रोगी और उनके परिचारक — सभी ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। AIIA परिसर में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया और कार्यालय परिसर तथा आंतरिक क्षेत्रों की सफाई श्रमदान गतिविधियों के तहत की गई, जिससे स्वैच्छिक सेवा और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बल मिला।

अस्पताल के प्रतीक्षा क्षेत्रों में रोगियों और उनके परिचारकों के लिए अपशिष्ट पृथक्करण, घरेलू खाद निर्माण, रिड्यूस-रियूज-रीसाइक्ल (3R) और एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने के विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। परिसर के अंदर और आसपास के चिन्हित स्थानों पर सार्वजनिक स्थलों की सफाई और जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित किया गया।

समापन समारोह में उपस्थित गणमान्य

समापन दिवस के कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की डीन एवं निदेशक मंजुषा राजगोपाला, डीन रिसर्च राजगोपाला, AMS राजा राम महतो और संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे। अभियान में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता बनाए रखने, अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जिम्मेदार रहने और एक स्वच्छ, स्वस्थ व टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण में योगदान देने की शपथ ली।

आम जनता पर असर और व्यापक संदेश

यह अभियान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब केंद्र सरकार 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत देशभर में स्वच्छता को संस्थागत स्तर पर मजबूत करने का प्रयास कर रही है। गौरतलब है कि आयुर्वेद जैसे पारंपरिक चिकित्सा संस्थानों द्वारा इस तरह की पहल स्वच्छता के सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलू को भी रेखांकित करती है। AIIA के निदेशक प्रजापति ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बननी चाहिए।

आने वाले समय में संस्थान इस तरह की जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से अपने शैक्षणिक और चिकित्सा कार्यक्रमों में शामिल करने की दिशा में कदम उठाने की योजना बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या ये वार्षिक अभियान दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में तब्दील हो पाते हैं। जागरूकता कार्यक्रम और शपथ समारोह तब ही प्रभावी होते हैं जब उनके पीछे निरंतर निगरानी और जवाबदेही का तंत्र हो। यह भी गौर करने योग्य है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा की दृष्टि से स्वच्छता केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का मूलभूत सिद्धांत है — जिसे अभियान की मुख्यधारा कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 2026 क्या है?
'स्वच्छता ही सेवा' (SHS) अभियान 2026 एक राष्ट्रीय स्वच्छता पखवाड़ा है जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चला। AIIA ने इसे 'स्वच्छता में सभा, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' थीम के तहत आयोजित किया, जिसमें स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण जागरूकता पर ज़ोर दिया गया।
AIIA ने इस अभियान में क्या-क्या गतिविधियाँ आयोजित कीं?
AIIA ने परिसर में श्रमदान, अपशिष्ट पृथक्करण, घरेलू खाद निर्माण, 3R (रिड्यूस-रियूज-रीसाइक्ल) और एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। अस्पताल के प्रतीक्षा क्षेत्रों में रोगियों और उनके परिचारकों को भी इन कार्यक्रमों में शामिल किया गया।
AIIA निदेशक पीके प्रजापति ने स्वच्छता पर क्या कहा?
निदेशक पीके प्रजापति ने कहा कि स्वच्छता और साफ-सफाई हम सबकी साझा जिम्मेदारी है और सभी को इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने समापन समारोह में प्रतिभागियों को सामूहिक स्वच्छता शपथ भी दिलाई।
इस अभियान में कौन-कौन शामिल हुए?
अभियान में AIIA के संकाय सदस्य, पीएचडी एवं स्नातकोत्तर शोधार्थी, कर्मचारी, रोगी और उनके परिचारक सभी ने भाग लिया। समापन समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय की डीन मंजुषा राजगोपाला और AMS राजा राम महतो भी उपस्थित रहे।
यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन से कैसे जुड़ा है?
यह अभियान केंद्र सरकार के 'स्वच्छ भारत मिशन' की व्यापक पहल का हिस्सा है, जो हर वर्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच मनाया जाता है। AIIA जैसे संस्थानों की भागीदारी इस मिशन को संस्थागत स्तर पर मज़बूत करती है और स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के अंतर्संबंध को उजागर करती है।
राष्ट्र प्रेस
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