23 अगस्त 2026
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम से खांसी में राहत: आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे, तनाव भी होगा कम

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अनुलोम-विलोम प्राणायाम से खांसी में राहत: आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे, तनाव भी होगा कम

सारांश

बारिश के मौसम में खांसी से परेशान हैं? आयुष मंत्रालय का कहना है कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम न केवल खांसी में राहत देता है, बल्कि तनाव, चिंता कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में भी कारगर है। साथ ही मंत्रालय ने मौसमी बीमारियों के गंभीर लक्षणों पर तत्काल डॉक्टरी सलाह लेने की अपील की है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय के अनुसार अनुलोम-विलोम प्राणायाम बारिश के मौसम में खांसी की समस्या में राहत दे सकता है।
नियमित अभ्यास से एकाग्रता, ऊर्जा में वृद्धि और तनाव व चिंता के स्तर में कमी आती है।
अभ्यास के दौरान गहरी और धीमी सांस लेने पर ध्यान देना चाहिए; बारी-बारी से दोनों नथुनों का उपयोग करें।
तेज बुखार, सांस में तकलीफ, गंभीर निर्जलीकरण या लगातार उल्टी होने पर बिना देरी डॉक्टर से मिलें।
रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड और वजन की नियमित निगरानी से हृदय रोग के जोखिम को समय रहते पहचाना जा सकता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम बारिश के मौसम में होने वाली खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं में प्रभावी राहत दिला सकता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, ऊर्जा का स्तर सुधरता है और तनाव व चिंता में कमी आती है। 23 अगस्त को जारी इस जानकारी में मौसमी बीमारियों के प्रति सतर्क रहने की अपील भी की गई।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम क्या है और कैसे करें

अनुलोम-विलोम एक प्राचीन योगिक श्वास तकनीक है जिसमें बारी-बारी से दोनों नथुनों से सांस ली और छोड़ी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के दौरान गहरी और धीमी सांस लेने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह तकनीक श्वसन तंत्र को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है।

खांसी और श्वसन समस्याओं में लाभ

मंत्रालय का कहना है कि नियमित अनुलोम-विलोम अभ्यास से खांसी से जुड़ी परेशानियों में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है। बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी की शिकायत आम होती है और अधिकांश लोग तुरंत दवाओं की ओर रुख करते हैं। आयुष मंत्रालय इस परंपरागत योग पद्धति को एक सहायक उपाय के रूप में अपनाने की सलाह देता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

केवल शारीरिक लाभ ही नहीं, आयुष मंत्रालय के अनुसार यह प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता में सुधार, मानसिक ऊर्जा में वृद्धि और तनाव व चिंता के स्तर में कमी देखी गई है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब शहरी जीवन में मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

मौसमी बीमारियों में सतर्कता ज़रूरी

मंत्रालय ने बदलते मौसम में स्वास्थ्य संकेतों को नजरअंदाज न करने की चेतावनी भी दी है। मंत्रालय के अनुसार, तेज बुखार के साथ उलझन, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में पानी की भारी कमी या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता गंभीर जटिलताओं और जीवन के जोखिम को कम कर सकती है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए भी जागरूकता की अपील

इसी क्रम में आयुष मंत्रालय ने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी। मंत्रालय के अनुसार, रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड और शरीर के वजन की नियमित निगरानी से हृदय संबंधी जोखिम कारकों को समय रहते पहचाना जा सकता है। जागरूकता, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों से बचाव संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि प्राणायाम एक सहायक उपाय है, चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं। मंत्रालय ने स्वयं गंभीर लक्षणों पर तुरंत डॉक्टरी सहायता लेने की अपील की है — यह संतुलित संदेश है। हालाँकि, सरकारी स्वास्थ्य संचार में योग के लाभों को अक्सर बिना पर्याप्त नैदानिक साक्ष्य के प्रस्तुत किया जाता है। जनता को यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि किस स्तर की खांसी या श्वसन समस्या में प्राणायाम उपयोगी है और कब यह पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुलोम-विलोम प्राणायाम खांसी में कैसे मदद करता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम श्वसन तंत्र को संतुलित करता है और खांसी से जुड़ी समस्याओं में राहत दिला सकता है। इसमें बारी-बारी से दोनों नथुनों से गहरी और धीमी सांस ली जाती है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम कैसे करें?
अनुलोम-विलोम में बारी-बारी से एक नथुने को बंद कर दूसरे से सांस ली और छोड़ी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के दौरान सांस गहरी और गति धीमी रखनी चाहिए। नियमित अभ्यास से अधिकतम लाभ मिलता है।
क्या अनुलोम-विलोम तनाव और चिंता कम करने में सहायक है?
हाँ, आयुष मंत्रालय का कहना है कि नियमित अनुलोम-विलोम अभ्यास से तनाव और चिंता का स्तर कम होता है। इसके अलावा एकाग्रता और मानसिक ऊर्जा में भी सुधार देखा गया है।
बदलते मौसम में किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, तेज बुखार के साथ उलझन, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में पानी की भारी कमी या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर बिना देरी डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए आयुष मंत्रालय की क्या सलाह है?
आयुष मंत्रालय ने रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड और शरीर के वजन की नियमित निगरानी की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार जागरूकता, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय संबंधी जोखिम को समय रहते कम किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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