अनुलोम-विलोम प्राणायाम से खांसी में राहत: आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे, तनाव भी होगा कम
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनुलोम-विलोम प्राणायाम बारिश के मौसम में होने वाली खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं में प्रभावी राहत दिला सकता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, ऊर्जा का स्तर सुधरता है और तनाव व चिंता में कमी आती है। 23 अगस्त को जारी इस जानकारी में मौसमी बीमारियों के प्रति सतर्क रहने की अपील भी की गई।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम क्या है और कैसे करें
अनुलोम-विलोम एक प्राचीन योगिक श्वास तकनीक है जिसमें बारी-बारी से दोनों नथुनों से सांस ली और छोड़ी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के दौरान गहरी और धीमी सांस लेने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह तकनीक श्वसन तंत्र को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है।
खांसी और श्वसन समस्याओं में लाभ
मंत्रालय का कहना है कि नियमित अनुलोम-विलोम अभ्यास से खांसी से जुड़ी परेशानियों में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है। बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी की शिकायत आम होती है और अधिकांश लोग तुरंत दवाओं की ओर रुख करते हैं। आयुष मंत्रालय इस परंपरागत योग पद्धति को एक सहायक उपाय के रूप में अपनाने की सलाह देता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
केवल शारीरिक लाभ ही नहीं, आयुष मंत्रालय के अनुसार यह प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता में सुधार, मानसिक ऊर्जा में वृद्धि और तनाव व चिंता के स्तर में कमी देखी गई है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब शहरी जीवन में मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
मौसमी बीमारियों में सतर्कता ज़रूरी
मंत्रालय ने बदलते मौसम में स्वास्थ्य संकेतों को नजरअंदाज न करने की चेतावनी भी दी है। मंत्रालय के अनुसार, तेज बुखार के साथ उलझन, सांस लेने में तकलीफ, शरीर में पानी की भारी कमी या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता गंभीर जटिलताओं और जीवन के जोखिम को कम कर सकती है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए भी जागरूकता की अपील
इसी क्रम में आयुष मंत्रालय ने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी। मंत्रालय के अनुसार, रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड और शरीर के वजन की नियमित निगरानी से हृदय संबंधी जोखिम कारकों को समय रहते पहचाना जा सकता है। जागरूकता, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों से बचाव संभव है।