6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड

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6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड

सारांश

6 महीने की उम्र के बाद सिर्फ दूध से शिशु का संपूर्ण विकास संभव नहीं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किस उम्र में कितनी मात्रा और कौन-से खाद्य पदार्थ दिए जाएँ — खिचड़ी से लेकर केले-पपीते तक, हर चरण की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

6 महीने की आयु के बाद शिशु को दूध के साथ पूरक आहार देना आवश्यक है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने उम्र के अनुसार आहार मात्रा के दिशा-निर्देश जारी किए।
6-7 महीने में दिन में 2 बार एक कटोरी , 9-11 महीने में 3 कटोरी और 12-24 महीने में 4-5 कटोरी भोजन दें।
आहार में दाल-चावल, खिचड़ी, दही, घी और केला, पपीता, गाजर, कद्दू शामिल करें।
शिशु को पहले दूध पिलाएँ, उसके बाद ठोस आहार दें।
बच्चे की भूख के संकेतों को समझें; जबरदस्ती खिलाने से बचें।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, जन्म के 6 महीने पूरे होते ही शिशु की पोषण संबंधी जरूरतें केवल स्तनपान या फॉर्मूला दूध से पूरी नहीं हो पातीं। इस अवस्था में पूरक आहार (Complementary Feeding) की शुरुआत करना शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। 14 मई को मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस विषय में विस्तृत दिशा-निर्देश साझा किए।

पूरक आहार की शुरुआत कब और कैसे करें

विशेषज्ञों के अनुसार, 6 महीने की आयु के बाद शिशु को घर का बना हल्का और पौष्टिक भोजन देना शुरू करना चाहिए। शुरुआत में 3 से 4 चम्मच की मात्रा से आरंभ करें और बच्चे की प्रतिक्रिया देखें। यदि शिशु भोजन को अच्छी तरह पचा रहा है, तो मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।

आहार में गाढ़ी दाल-चावल, खिचड़ी, हरी सब्जियाँ, दही, घी और थोड़ी मात्रा में तेल शामिल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त केला, पपीता, गाजर और कद्दू जैसे पीले व नारंगी रंग के फल-सब्जियाँ आवश्यक विटामिन और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं।

उम्र के अनुसार आहार की मात्रा

मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिशु की आयु बढ़ने के साथ-साथ भोजन की मात्रा भी क्रमशः बढ़ानी चाहिए:

6 से 7 महीने: दिन में दो बार, प्रत्येक बार एक छोटी कटोरी7 से 8 महीने: दिन में दो कटोरी भोजन। 9 से 11 महीने: मात्रा बढ़ाकर तीन कटोरी तक। 12 से 24 महीने: दिन में चार से पाँच कटोरी हल्का और पौष्टिक भोजन।

दूध और ठोस आहार का सही क्रम

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि शिशु को पहले दूध पिलाएँ और उसके बाद ठोस भोजन दें। इस क्रम से शिशु को दोनों प्रकार का पोषण संतुलित रूप से प्राप्त होता है और पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।

भूख के संकेतों को समझें

प्रत्येक शिशु की भूख और पाचन क्षमता अलग-अलग होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चे को जबरदस्ती खिलाने की बजाय उसके भूख के संकेतों — जैसे मुँह खोलना, हाथ चूसना या भोजन की ओर झुकना — को समझकर खाना दें। खेल-खेल में और स्नेहपूर्ण माहौल में खिलाने से शिशु में खाने के प्रति सकारात्मक रुचि विकसित होती है।

क्यों जरूरी है पूरक आहार

गौरतलब है कि 6 महीने के बाद शिशु के मस्तिष्क और हड्डियों का विकास तेज़ गति से होता है, जिसके लिए आयरन, जिंक और विटामिन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अनिवार्य हैं — और ये केवल दूध से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। समय पर पूरक आहार की शुरुआत न करने से कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। माता-पिता को किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता से आगे क्रियान्वयन की है — विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ कुपोषण दर अभी भी चिंताजनक है। सोशल मीडिया पोस्ट से परे, आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर यह जानकारी पहुँचाना अधिक प्रभावी होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग की दर अभी भी वैश्विक औसत से अधिक है, जिसका एक प्रमुख कारण समय पर पूरक आहार न मिलना है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिशु को पूरक आहार कब से शुरू करना चाहिए?
जन्म के 6 महीने पूरे होने के बाद शिशु को पूरक आहार देना शुरू करना चाहिए। इससे पहले केवल माँ का दूध या फॉर्मूला दूध पर्याप्त माना जाता है।
6 महीने के बच्चे को क्या खिलाएँ?
6 महीने के शिशु को गाढ़ी दाल-चावल, खिचड़ी, हरी सब्जियाँ, दही, घी और केला, पपीता, गाजर, कद्दू जैसे मौसमी फल-सब्जियाँ दी जा सकती हैं। शुरुआत 3 से 4 चम्मच से करें।
उम्र के अनुसार शिशु को कितनी मात्रा में खाना देना चाहिए?
6-7 महीने में दिन में 2 बार एक छोटी कटोरी, 7-8 महीने में 2 कटोरी, 9-11 महीने में 3 कटोरी और 12-24 महीने में 4 से 5 कटोरी भोजन दिया जा सकता है। यह मात्रा बच्चे की भूख और पाचन क्षमता के अनुसार समायोजित करें।
क्या पूरक आहार देने के बाद दूध बंद कर देना चाहिए?
नहीं, पूरक आहार शुरू करने के बाद भी दूध जारी रखना चाहिए। शिशु को पहले दूध पिलाएँ और उसके बाद ठोस भोजन दें, जिससे दोनों प्रकार का पोषण मिलता रहे।
अगर बच्चा ठोस आहार खाने से मना करे तो क्या करें?
हर बच्चे की भूख अलग होती है, इसलिए जबरदस्ती खिलाने से बचें। बच्चे के भूख के संकेतों को पहचानें और खेल-खेल में स्नेहपूर्ण माहौल में खाना खिलाएँ। यदि समस्या लगातार बनी रहे तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
राष्ट्र प्रेस
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