6 महीने बाद शिशु को पूरक आहार क्यों जरूरी? उम्र के अनुसार मात्रा और सही खाद्य पदार्थों की पूरी गाइड
सारांश
मुख्य बातें
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, जन्म के 6 महीने पूरे होते ही शिशु की पोषण संबंधी जरूरतें केवल स्तनपान या फॉर्मूला दूध से पूरी नहीं हो पातीं। इस अवस्था में पूरक आहार (Complementary Feeding) की शुरुआत करना शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य माना जाता है। 14 मई को मंत्रालय ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस विषय में विस्तृत दिशा-निर्देश साझा किए।
पूरक आहार की शुरुआत कब और कैसे करें
विशेषज्ञों के अनुसार, 6 महीने की आयु के बाद शिशु को घर का बना हल्का और पौष्टिक भोजन देना शुरू करना चाहिए। शुरुआत में 3 से 4 चम्मच की मात्रा से आरंभ करें और बच्चे की प्रतिक्रिया देखें। यदि शिशु भोजन को अच्छी तरह पचा रहा है, तो मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।
आहार में गाढ़ी दाल-चावल, खिचड़ी, हरी सब्जियाँ, दही, घी और थोड़ी मात्रा में तेल शामिल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त केला, पपीता, गाजर और कद्दू जैसे पीले व नारंगी रंग के फल-सब्जियाँ आवश्यक विटामिन और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं।
उम्र के अनुसार आहार की मात्रा
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिशु की आयु बढ़ने के साथ-साथ भोजन की मात्रा भी क्रमशः बढ़ानी चाहिए:
6 से 7 महीने: दिन में दो बार, प्रत्येक बार एक छोटी कटोरी। 7 से 8 महीने: दिन में दो कटोरी भोजन। 9 से 11 महीने: मात्रा बढ़ाकर तीन कटोरी तक। 12 से 24 महीने: दिन में चार से पाँच कटोरी हल्का और पौष्टिक भोजन।
दूध और ठोस आहार का सही क्रम
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि शिशु को पहले दूध पिलाएँ और उसके बाद ठोस भोजन दें। इस क्रम से शिशु को दोनों प्रकार का पोषण संतुलित रूप से प्राप्त होता है और पाचन तंत्र पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता।
भूख के संकेतों को समझें
प्रत्येक शिशु की भूख और पाचन क्षमता अलग-अलग होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चे को जबरदस्ती खिलाने की बजाय उसके भूख के संकेतों — जैसे मुँह खोलना, हाथ चूसना या भोजन की ओर झुकना — को समझकर खाना दें। खेल-खेल में और स्नेहपूर्ण माहौल में खिलाने से शिशु में खाने के प्रति सकारात्मक रुचि विकसित होती है।
क्यों जरूरी है पूरक आहार
गौरतलब है कि 6 महीने के बाद शिशु के मस्तिष्क और हड्डियों का विकास तेज़ गति से होता है, जिसके लिए आयरन, जिंक और विटामिन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अनिवार्य हैं — और ये केवल दूध से पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। समय पर पूरक आहार की शुरुआत न करने से कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। माता-पिता को किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया की स्थिति में तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।