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बच्चों के स्वास्थ्य के लिए फल-सब्जियाँ: उम्र के अनुसार सही मात्रा और सही तरीका

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बच्चों के स्वास्थ्य के लिए फल-सब्जियाँ: उम्र के अनुसार सही मात्रा और सही तरीका

सारांश

बचपन में बनी खाने की आदतें जीवनभर का आधार बनती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 12-23 महीने के शिशु को रोज़ाना 75-100 ग्राम फल और तीन-चौथाई कप सब्जियाँ चाहिए। रंग-बिरंगी थाली और माता-पिता का खुद उदाहरण बनना — यही दो चीज़ें बच्चों को स्वस्थ खाने की राह पर ले जाती हैं।

मुख्य बातें

12 से 23 महीने के बच्चों को रोज़ाना लगभग 75-100 ग्राम फल और तीन-चौथाई कप सब्जियाँ देने की सलाह दी जाती है।
2 से 4 वर्ष की आयु में फलों की मात्रा एक से डेढ़ कप और सब्जियाँ सवा से पौने दो सर्विंग तक बढ़ाई जा सकती है।
लगभग 6 महीने की उम्र से माँ के दूध के साथ कॉम्प्लिमेंटरी फूड शुरू करना उचित माना जाता है।
रेनबो प्लेट — गाजर, पालक, शकरकंद, केला, स्ट्रॉबेरी जैसे रंगीन विकल्प — बच्चों में खाने की रुचि बढ़ाते हैं।
12 महीने के बाद डॉक्टर की सलाह से पाश्चराइज़्ड दूध और बिना चीनी वाले पेय दिए जा सकते हैं।
बच्चों की खाने की आदतें बड़े हद तक माता-पिता के खुद के खान-पान से प्रभावित होती हैं।

बच्चों के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास में फल और सब्जियाँ अहम भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में बनी खाने की आदतें जीवनभर के पोषण व्यवहार को प्रभावित करती हैं, इसलिए शुरुआत से ही विविध और पोषणयुक्त आहार की नींव रखना ज़रूरी है। नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि माता-पिता बच्चों की थाली को जितना रंग-बिरंगा बनाएँ, उतना बेहतर।

उम्र के अनुसार कितनी मात्रा ज़रूरी

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे की उम्र और शारीरिक सक्रियता के आधार पर फल-सब्जियों की मात्रा तय होती है। 12 से 23 महीने के शिशुओं को प्रतिदिन लगभग एक सर्विंग (75-100 ग्राम) फल और करीब सवा सर्विंग (तीन-चौथाई कप) सब्जियाँ दी जा सकती हैं। 2 से 4 वर्ष की आयु में यह मात्रा बढ़कर एक से डेढ़ कप कटे हुए फल और सवा से पौने दो सर्विंग सब्जियाँ हो जाती है।

फल और सब्जियाँ परोसते समय उन्हें छोटे और सुरक्षित टुकड़ों में काटना ज़रूरी है। इन्हें छोटे कंटेनरों में पहले से तैयार रखने से भूख लगने पर तुरंत स्वस्थ स्नैक उपलब्ध कराया जा सकता है।

रेनबो प्लेट: विविधता से रुचि बढ़ाने का तरीका

बच्चों की थाली में रंगों की विविधता उनकी खाने में रुचि बढ़ाती है। गाजर, मटर, पालक, शकरकंद और चुकंदर जैसी सब्जियाँ पोषण और रंग दोनों देती हैं। फलों में केला, स्ट्रॉबेरी, नाशपाती, संतरा, खरबूजा और एवोकाडो जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि केवल फल और सब्जियाँ पर्याप्त नहीं हैं — बच्चों के आहार में प्रोटीन, डेयरी उत्पाद और साबुत अनाज भी शामिल होने चाहिए ताकि समग्र पोषण सुनिश्चित हो सके।

ठोस आहार की शुरुआत कब और कैसे

आमतौर पर जब बच्चा लगभग 6 महीने का हो जाए, तब माँ के दूध या शिशु फॉर्मूला के साथ-साथ अन्य खाद्य पदार्थ — जिन्हें कॉम्प्लिमेंटरी फूड कहा जाता है — शुरू किए जा सकते हैं। अधिकांश बच्चों के लिए अलग-अलग खाद्य पदार्थ शुरू करने का कोई निश्चित क्रम आवश्यक नहीं होता। 7 से 8 महीने की आयु तक बच्चे कई खाद्य समूहों के आहार की आदत विकसित कर सकते हैं।

1 से 2 वर्ष की आयु के बीच बच्चे धीरे-धीरे परिवार के साथ भोजन करने की आदत अपनाने लगते हैं। करीब 2 वर्ष की उम्र तक अधिकांश बच्चे परिवार जैसा खाना खाने में सक्षम हो जाते हैं, बशर्ते भोजन उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षित तरीके से तैयार किया गया हो।

खाने में नखरे: चिंता नहीं, धैर्य ज़रूरी

इस उम्र में बच्चों का खाने में नखरा करना सामान्य व्यवहार है। हो सकता है बच्चा कल तक पसंद किया हुआ खाना आज अस्वीकार कर दे। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चा पहली बार कोई फल या सब्जी न खाए तो घबराने की ज़रूरत नहीं — कुछ समय बाद वही चीज़ फिर से देने की कोशिश करनी चाहिए। कई बच्चों को किसी नए स्वाद को स्वीकार करने से पहले उसे कई बार चखना पड़ता है।

पेय पदार्थ और माता-पिता की भूमिका

6 से 12 महीने की आयु में बच्चे को थोड़ी मात्रा में सादा पानी दिया जा सकता है। 12 महीने के बाद डॉक्टर की सलाह से पाश्चराइज़्ड गाय का दूध, कम लैक्टोज़ या लैक्टोज़-फ्री दूध और बिना अतिरिक्त चीनी वाले फोर्टिफाइड डेयरी विकल्प शुरू किए जा सकते हैं। मीठे पेय से परहेज़ करना बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि माता-पिता स्वयं यदि फल, सब्जियाँ और पौष्टिक भोजन खाते हैं, तो बच्चे भी इन आदतों को अपनाने की अधिक संभावना रखते हैं। बच्चे को स्वस्थ खाने के लिए कहना पर्याप्त नहीं — खुद उसका उदाहरण बनना सबसे प्रभावशाली तरीका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ताज़े फल-सब्जियों की पहुँच और उपभोग असमान बना हुआ है। सलाह सही है, लेकिन यह मध्यमवर्गीय शहरी परिवारों के नज़रिए से लिखी गई लगती है — ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए एवोकाडो या स्ट्रॉबेरी जैसे विकल्प व्यावहारिक नहीं हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को इस पोषण संदेश को सस्ते और स्थानीय रूप से उपलब्ध विकल्पों से जोड़ना होगा, अन्यथा यह सलाह उन्हीं तक पहुँचेगी जिन्हें इसकी सबसे कम ज़रूरत है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6 महीने के बच्चे को कौन से फल और सब्जियाँ दी जा सकती हैं?
लगभग 6 महीने की उम्र से माँ के दूध के साथ-साथ मसला हुआ केला, शकरकंद, गाजर और पकी हुई पालक जैसे कॉम्प्लिमेंटरी फूड शुरू किए जा सकते हैं। किसी निश्चित क्रम की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन खाद्य पदार्थ मुलायम और बारीक होने चाहिए।
2 से 4 साल के बच्चे को रोज़ाना कितने फल और सब्जियाँ देनी चाहिए?
2 से 4 वर्ष की आयु में बच्चे को प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ कप कटे हुए फल और सवा से पौने दो सर्विंग सब्जियाँ दी जा सकती हैं। यह मात्रा बच्चे की शारीरिक सक्रियता के अनुसार थोड़ी कम-ज़्यादा हो सकती है।
बच्चा नई सब्जी या फल खाने से मना करे तो क्या करें?
बच्चे का पहली बार कोई नया खाद्य पदार्थ अस्वीकार करना सामान्य है और इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कई बच्चों को किसी नए स्वाद को स्वीकार करने से पहले उसे कई बार चखना पड़ता है, इसलिए कुछ समय बाद वही चीज़ फिर से देने की कोशिश करनी चाहिए।
बच्चों के लिए रेनबो प्लेट क्या है और यह क्यों फायदेमंद है?
रेनबो प्लेट का मतलब है बच्चे की थाली में अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियाँ शामिल करना — जैसे नारंगी गाजर, हरा मटर, लाल स्ट्रॉबेरी और बैंगनी चुकंदर। विविध रंग विभिन्न विटामिन और खनिज तत्वों का संकेत देते हैं और बच्चों में खाने के प्रति रुचि भी बढ़ाते हैं।
बच्चों को कौन से पेय पदार्थ देने चाहिए और कब से?
6 से 12 महीने की आयु में थोड़ी मात्रा में सादा पानी दिया जा सकता है। 12 महीने के बाद डॉक्टर की सलाह से पाश्चराइज़्ड गाय का दूध और बिना चीनी वाले फोर्टिफाइड डेयरी विकल्प शुरू किए जा सकते हैं। मीठे पेय और पैकेज्ड जूस से परहेज़ करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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