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बुजुर्गों में गिरने का खतरा: योगासन से कैसे मिलती है सुरक्षा, आयुष मंत्रालय की सलाह

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बुजुर्गों में गिरने का खतरा: योगासन से कैसे मिलती है सुरक्षा, आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

60 पार की उम्र में गिरना सबसे बड़ा स्वास्थ्य जोखिम है — और शोध बताता है कि वृक्षासन से सेतु बंधासन तक, नियमित योग इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। आयुष मंत्रालय रोज़ 20-30 मिनट के अभ्यास की सलाह देता है।

मुख्य बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गिरना बुजुर्गों में चोट और विकलांगता का प्रमुख कारण है।
60 वर्ष से अधिक आयु में संतुलन बिगड़ना, मांसपेशियों की कमज़ोरी और जोड़ों की अकड़न गिरने के जोखिम को बढ़ाती है।
मेटा-एनालिसिस शोध के अनुसार, नियमित योग करने वाले बुजुर्गों में बैलेंस और मोबिलिटी दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
वृक्षासन, ताड़ासन, भुजंगासन और सेतु बंधासन पैरों, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं।
आयुष मंत्रालय की सलाह है कि रोज़ाना 20-30 मिनट का योगाभ्यास पर्याप्त लाभकारी हो सकता है।
पहली बार शुरू करने वालों को किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।

बढ़ती उम्र के साथ गिरने का जोखिम तेज़ी से बढ़ता है — और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास इस जोखिम को काफी हद तक कम करने में सक्षम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी चेतावनी देता है कि गिरना बुजुर्गों में चोट और विकलांगता का प्रमुख कारण है।

बुजुर्गों में गिरने का खतरा क्यों बढ़ता है

60 वर्ष की आयु पार करते ही शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं — संतुलन बिगड़ना, मांसपेशियों में कमज़ोरी और जोड़ों की अकड़न इनमें सबसे आम हैं। ये समस्याएँ रोज़मर्रा के साधारण कामों को भी जोखिम भरा बना देती हैं। छोटी-सी असावधानी भी गंभीर चोट का कारण बन सकती है।

शोध क्या कहता है

एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों पर किए गए अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। शोध के नतीजों के अनुसार, नियमित योग करने वाले बुजुर्गों में बैलेंस (संतुलन) और मोबिलिटी (गतिशीलता) दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिससे गिरने की आशंका स्पष्ट रूप से घटी। रिसर्च यह भी बताती है कि योग शरीर के तालमेल और स्थिरता को बेहतर बनाता है।

कौन-से योगासन हैं सबसे उपयोगी

विशेषज्ञों के अनुसार, वृक्षासन, ताड़ासन, भुजंगासन और सेतु बंधासन जैसे सरल आसन पैरों, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं। ये आसन शरीर की संतुलन क्षमता को बढ़ाते हैं और स्थिरता प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, योग मानसिक शांति देता है, डर और घबराहट कम करता है, जिससे आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।

आयुष मंत्रालय की सलाह

आयुष मंत्रालय के मुताबिक, योग केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है — यह बुजुर्गों को एक सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में भी सहायक है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोज़ाना केवल 20 से 30 मिनट का योगाभ्यास भी सार्थक लाभ दे सकता है।

शुरुआत कैसे करें

जो बुजुर्ग पहली बार योग शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास शुरू करना उचित रहता है। यह सावधानी विशेष रूप से उन लोगों के लिए ज़रूरी है जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो। सही मार्गदर्शन के साथ योग बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार का एक सिद्ध और सुरक्षित माध्यम बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि भारत में ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के बुजुर्गों तक प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की पहुँच अभी भी सीमित है। आयुष मंत्रालय की सलाह और शोध के निष्कर्ष मुख्यतः शहरी या नियंत्रित परिवेश पर आधारित हैं — ज़मीनी स्तर पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना यह लाभ सार्वभौमिक नहीं बन सकता। सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में योग को प्राथमिक देखभाल से जोड़ना, न कि केवल जागरूकता अभियानों तक सीमित रखना, असली बदलाव ला सकता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुजुर्गों में गिरने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
60 वर्ष की आयु के बाद शरीर में संतुलन बिगड़ना, मांसपेशियों में कमज़ोरी और जोड़ों की अकड़न जैसी समस्याएँ सामान्य हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ये कारक मिलकर गिरने की आशंका को काफी बढ़ा देते हैं और यह बुजुर्गों में चोट व विकलांगता का प्रमुख कारण है।
योगासन गिरने के जोखिम को कैसे कम करता है?
शोध के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से शरीर का संतुलन, तालमेल और गतिशीलता बेहतर होती है। एक मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के योग करने वाले बुजुर्गों में बैलेंस और मोबिलिटी दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया, जिससे गिरने की संभावना घटी।
बुजुर्गों के लिए कौन-से योगासन सबसे फायदेमंद हैं?
वृक्षासन, ताड़ासन, भुजंगासन और सेतु बंधासन विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं। ये आसन पैरों, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं और शरीर की स्थिरता बढ़ाते हैं।
बुजुर्गों को रोज़ाना कितने समय तक योग करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय और विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़ाना केवल 20 से 30 मिनट का योगाभ्यास भी सार्थक लाभ दे सकता है। नियमितता और सही तकनीक समय की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है।
क्या बीमार बुजुर्ग भी योग कर सकते हैं?
पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त बुजुर्गों को किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही अभ्यास शुरू करना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे व्यक्ति अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही योग कार्यक्रम अपनाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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