बांग्लादेश में खसरे से 656 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 4 और की जान गई; टीकाकरण पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 15 जून 2026 को सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक के आँकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों के कारण चार और बच्चों की मौत हो गई, जिससे ढाका सहित पूरे देश में इस महामारी से मरने वालों की कुल संख्या 656 तक पहुँच गई है।
मौतों का ब्यौरा और संक्रमण की स्थिति
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, नई चार मौतों में से एक को प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए खसरे का मामला बताया गया है, जबकि तीन मौतें संदिग्ध श्रेणी में रखी गई हैं। अब तक देश में प्रयोगशाला-पुष्ट मौतों की संख्या 93 और संदिग्ध मौतों की संख्या 563 हो चुकी है।
पिछले 24 घंटों में 972 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मरीजों की संख्या 86,923 हो गई। इसी अवधि में 64 नए लैब-पुष्ट मामले दर्ज हुए और कुल पुष्टि किए गए संक्रमितों की संख्या 10,387 पहुँच गई। डीजीएचएस के आँकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से अब तक 71,467 संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 67,878 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
टीकाकरण अभियान के बावजूद प्रकोप जारी
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश सरकार ने दावा किया है कि लक्षित बच्चों में टीकाकरण कवरेज 100 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद देशभर के अस्पतालों में रोज़ाना 1,000 से अधिक बच्चों को खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है। देशव्यापी आपातकालीन टीकाकरण अभियान समाप्त हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, परंतु मौतों का सिलसिला थमा नहीं है।
टीकाकरण विशेषज्ञों ने वैक्सीन की प्रभावशीलता और कवरेज में मौजूद खामियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सरकार के रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने कहा, 'यदि टीकाकरण कवरेज वास्तव में 90 प्रतिशत से अधिक हो गई होती, तो संक्रमण के मामलों में काफी तेज़ी से गिरावट आनी चाहिए थी।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कई बार कागजों पर टीकाकरण 100 प्रतिशत दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता में हज़ारों बच्चे अब भी टीके से वंचित रह जाते हैं।'
यूनिसेफ की चेतावनियाँ और सरकार की निष्क्रियता
गौरतलब है कि पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने खुलासा किया था कि उसने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार को कई बार लिखित पत्रों और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बैठकों के माध्यम से वैक्सीन की कमी को लेकर आगाह किया था।
बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने ढाका में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2024 से ही सरकार को चेतावनी दी जा रही थी कि वैक्सीन की कमी भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि '2024 से 2026 के बीच यूनिसेफ ने कई पत्र भेजे और 10 अलग-अलग बैठकों में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन समय पर वैक्सीन की खरीद के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।'
फ्लावर्स के अनुसार, यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टेड चैबन ने भी पिछले वर्ष अगस्त में बांग्लादेश यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ बैठक में वैक्सीन की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक टीकाकरण कवरेज की ज़मीनी सच्चाई सामने नहीं आती और वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला को पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक बांग्लादेश में खसरे का यह संकट और गहरा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की नज़र अब बांग्लादेश सरकार के अगले कदमों पर टिकी है।