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ब्रोंकियल अस्थमा में राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 योग अभ्यास, विश्व योग दिवस से 21 दिन पहले सलाह

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ब्रोंकियल अस्थमा में राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 योग अभ्यास, विश्व योग दिवस से 21 दिन पहले सलाह

सारांश

विश्व योग दिवस से 21 दिन पहले आयुष मंत्रालय ने ब्रोंकियल अस्थमा पीड़ितों के लिए जलनेति, कपालभाति, भ्रामरी और भुजंगासन समेत छह अभ्यासों की सिफारिश की है। मंत्रालय का कहना है कि ये अभ्यास श्वसन मार्ग साफ करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 31 मई 2025 को ब्रोंकियल अस्थमा पीड़ितों के लिए 6 योग अभ्यासों की सिफारिश की।
अनुशंसित अभ्यासों में जलनेति , सूत्रनेति , कपालभाति , सरल मत्स्यासन , भ्रामरी प्राणायाम और भुजंगासन शामिल हैं।
इन अभ्यासों का लक्ष्य श्वसन मार्ग की सफाई, फेफड़ों की क्षमता वृद्धि और मानसिक तनाव में कमी है।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि गंभीर रोगी इन्हें शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
यह सलाह विश्व योग दिवस 21 जून से ठीक 21 दिन पहले जारी की गई है।

आयुष मंत्रालय ने 31 मई 2025 को ब्रोंकियल अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए छह विशेष योग अभ्यासों और शुद्धिकरण क्रियाओं की सिफारिश की है। विश्व योग दिवस (21 जून) से ठीक 21 दिन पहले जारी इस सलाह में मंत्रालय का कहना है कि नियमित योगाभ्यास से श्वसन तंत्र को मजबूत करने और सांस संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

मंत्रालय ने क्यों जारी की यह सलाह

मंत्रालय के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए बेहतर श्वसन क्षमता अनिवार्य है। हर सांस शरीर और मन को ऊर्जा प्रदान करती है, और श्वसन प्रक्रिया में कोई भी बाधा दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। मंत्रालय का मानना है कि सही योगाभ्यास और अनुशासित दिनचर्या से फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

कौन-से अभ्यास हैं अनुशंसित

मंत्रालय ने जलनेति, सूत्रनेति, कपालभाति, सरल मत्स्यासन, भ्रामरी प्राणायाम और भुजंगासन को विशेष रूप से सुझाया है। इन अभ्यासों का उद्देश्य श्वसन मार्ग को स्वच्छ रखना, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाना और सांस लेने की प्रक्रिया को सहज बनाना है।

जलनेति और सूत्रनेति योग की शुद्धिकरण क्रियाओं में आती हैं। इनके माध्यम से नासिका मार्गों की सफाई होती है, जिससे श्वसन तंत्र को राहत मिल सकती है। वहीं, कपालभाति को श्वास संबंधी मांसपेशियों को सक्रिय करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

मानसिक संतुलन पर भी ध्यान

योग विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव और चिंता कई बार अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। भ्रामरी प्राणायाम को मानसिक शांति और तनाव कम करने में उपयोगी माना जाता है, और इसका नियमित अभ्यास मन को स्थिर रखने में मदद कर सकता है।

भुजंगासन और सरल मत्स्यासन छाती को फैलाने, श्वसन क्षमता बढ़ाने और शरीर में लचीलापन विकसित करने में मददगार माने जाते हैं। इन आसनों के नियमित अभ्यास से फेफड़ों को बेहतर तरीके से कार्य करने में सहायता मिल सकती है।

विशेषज्ञों की सावधानी

योग विशेषज्ञों के अनुसार, शारीरिक लचीलेपन के साथ-साथ नियमित योगाभ्यास आंतरिक मजबूती और मानसिक संतुलन विकसित करने में भी भूमिका निभाता है। ये अभ्यास सहनशक्ति बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि, आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग इन अभ्यासों को शुरू करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस की तैयारियाँ पूरे देश में जोरों पर हैं। मंत्रालय की यह पहल अस्थमा पीड़ितों को योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है, ताकि दवाओं पर निर्भरता कम हो सके और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना जरूरी है कि ये सिफारिशें नैदानिक परीक्षणों के ठोस साक्ष्य के बजाय पारंपरिक योग ज्ञान पर आधारित हैं। भारत में अस्थमा रोगियों की बड़ी संख्या को देखते हुए, योग को पूरक चिकित्सा के रूप में प्रोत्साहित करना सकारात्मक है — परंतु इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प बताना भ्रामक हो सकता है। मंत्रालय ने स्वयं परामर्श की शर्त रखी है, जो उचित है, किंतु इस सावधानी को और अधिक स्पष्टता से रेखांकित किया जाना चाहिए।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रोंकियल अस्थमा में कौन-से योग अभ्यास फायदेमंद माने जाते हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार जलनेति, सूत्रनेति, कपालभाति, सरल मत्स्यासन, भ्रामरी प्राणायाम और भुजंगासन ब्रोंकियल अस्थमा में सहायक हो सकते हैं। ये अभ्यास नासिका मार्ग की सफाई, फेफड़ों की क्षमता वृद्धि और तनाव कम करने में मदद करते हैं।
क्या योग अस्थमा की दवाओं की जगह ले सकता है?
नहीं — योग विशेषज्ञों और मंत्रालय दोनों का कहना है कि योग अस्थमा प्रबंधन में पूरक भूमिका निभा सकता है, न कि चिकित्सकीय उपचार का विकल्प। गंभीर रोगियों को कोई भी नया अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक और योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
कपालभाति और भ्रामरी में क्या अंतर है?
कपालभाति एक सक्रिय श्वास क्रिया है जो श्वसन मांसपेशियों को सक्रिय करती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है। भ्रामरी प्राणायाम एक शांत करने वाली क्रिया है जो मानसिक तनाव और चिंता कम करने में सहायक मानी जाती है, जो अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
आयुष मंत्रालय ने यह सलाह अभी क्यों जारी की?
यह सलाह विश्व योग दिवस (21 जून) से 21 दिन पहले 31 मई 2025 को जारी की गई है। मंत्रालय हर वर्ष इस अवधि में स्वास्थ्य-केंद्रित योग जागरूकता अभियान चलाता है, इस बार ध्यान श्वसन रोगों पर केंद्रित किया गया है।
जलनेति और सूत्रनेति क्या होती हैं?
जलनेति और सूत्रनेति योग की शुद्धिकरण क्रियाएँ (षट्कर्म) हैं जिनमें नासिका मार्गों की सफाई की जाती है। इनसे श्वसन तंत्र में जमा अवरोध दूर होते हैं और सांस लेने की प्रक्रिया सहज बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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