ब्रोंकियल अस्थमा में राहत दिलाएंगे ये 6 योगाभ्यास, आयुष मंत्रालय की विशेष सिफारिश
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2025 से पहले ब्रोंकियल अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए छह विशेष योगाभ्यासों और शुद्धिकरण क्रियाओं की सिफारिश की है, जिनके नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र को मजबूत करने और सांस संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। मंत्रालय के अनुसार, 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस से ठीक 21 दिन पहले यह जानकारी इसलिए साझा की गई है ताकि लोग समय रहते इन अभ्यासों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकें।
मुख्य अभ्यास और उनके लाभ
मंत्रालय ने जिन छह अभ्यासों की विशेष रूप से सिफारिश की है, वे हैं — जलनेति, सूत्रनेति, कपालभाति, सरल मत्स्यासन, भ्रामरी प्राणायाम और भुजंगासन। इनका संयुक्त उद्देश्य श्वसन मार्ग को साफ रखना, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाना और सांस लेने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना है।
शुद्धिकरण क्रियाओं की भूमिका
जलनेति और सूत्रनेति योग की पारंपरिक शुद्धिकरण क्रियाएं हैं, जो नासामार्ग की सफाई में सहायक मानी जाती हैं। इनके नियमित अभ्यास से श्वसन तंत्र को राहत मिल सकती है। वहीं कपालभाति श्वास संबंधी मांसपेशियों को सक्रिय करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है।
मानसिक शांति और शारीरिक लचीलापन
योग विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव और चिंता कई बार अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। भ्रामरी प्राणायाम मानसिक शांति और तनाव कम करने में उपयोगी माना जाता है, जिससे अस्थमा के मरीजों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। इसी तरह भुजंगासन और सरल मत्स्यासन छाती को फैलाने, श्वसन क्षमता बढ़ाने और शरीर में लचीलापन विकसित करने में मददगार माने जाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
योग विशेषज्ञों के अनुसार, शारीरिक लचीलेपन के साथ-साथ नियमित योगाभ्यास आंतरिक मजबूती और मानसिक संतुलन विकसित करने में भी सहायक है। ये अभ्यास शरीर से अवरोधों को दूर करने, सहनशक्ति बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में भूमिका निभाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को इन अभ्यासों को शुरू करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब विश्व योग दिवस 2025 की तैयारियाँ पूरे देश में जोर पकड़ रही हैं। आयुष मंत्रालय लगातार योग को स्वास्थ्य प्रबंधन के एक पूरक साधन के रूप में बढ़ावा दे रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि यदि इन अभ्यासों को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए, तो दीर्घकालिक श्वसन स्वास्थ्य में सुधार संभव है।