विश्व योग दिवस से पहले आयुष मंत्रालय ने बताई 'पॉज, ब्रीद, रीकनेक्ट' ध्यान तकनीक
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 8 जून 2025 को विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर एक सरल और प्रभावी ध्यान तकनीक साझा की है, जिसे 'पॉज, ब्रीद, रीकनेक्ट' नाम दिया गया है — अर्थात् रुकें, सांस लें और स्वयं से पुनः जुड़ें। मंत्रालय का यह अभियान उन लाखों भारतीयों को लक्षित करता है जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक शांति खोज रहे हैं।
मंत्रालय का संदेश और उद्देश्य
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस के निकट आने के साथ नागरिकों को योग और ध्यान को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करने की मुहिम तेज़ कर दी है। मंत्रालय लगातार नए योगासनों और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी साझा कर रहा है। इस बार का केंद्र बिंदु है — ध्यान, जिसे विशेषज्ञ मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की आधारशिला मानते हैं।
ध्यान तकनीक: चरण-दर-चरण विधि
मंत्रालय द्वारा बताई गई ध्यान विधि शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए भी सुलभ है। सबसे पहले किसी शांत और आरामदायक स्थान पर ध्यान मुद्रा में बैठें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। दोनों हाथों को जाँघों पर ज्ञान मुद्रा (अंगूठे और तर्जनी को मिलाकर) में रखें।
इसके बाद धीरे-धीरे आँखें बंद करें और चेहरे को हल्का ऊपर उठाएँ। सामान्य गति से सांस लेते-छोड़ते रहें और सबसे पहले अपना पूरा ध्यान केवल सांस पर केंद्रित करें। फिर ध्यान को आज्ञा चक्र (दोनों भौंहों के मध्य बिंदु) पर स्थिर करें। इस अवस्था में कम से कम पाँच मिनट या जितनी देर सहज अनुभव हो, बने रहें।
अभ्यास समाप्त करने के लिए ध्यान को धीरे-धीरे सांस की ओर वापस लाएँ और फिर आसपास के परिवेश की ओर। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह क्रम मन को झटके से बाहर लाने की बजाय सहज रूप से सामान्य स्थिति में लौटाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
योग विशेषज्ञों का कहना है कि ध्यान मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और भावनात्मक संतुलन स्थापित करने का सबसे सुलभ उपाय है। उनके अनुसार, व्यस्त दिनचर्या में भी प्रतिदिन केवल कुछ मिनटों की सचेत सांस और ध्यान अभ्यास से जीवन में स्पष्टता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है। नियमित अभ्यास से तनाव में कमी, नींद की गुणवत्ता में सुधार और मानसिक अशांति का निवारण होता है — ऐसा विशेषज्ञ बताते हैं।
आम जनता पर असर
यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो ध्यान में नए हैं या जिनके पास समय की कमी है। मंत्रालय का तर्क है कि योग और ध्यान केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं — ये मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी उतने ही अनिवार्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।
आगे की राह
विश्व योग दिवस (21 जून) के करीब आते ही मंत्रालय के इस तरह के जागरूकता अभियान और तेज़ होने की संभावना है। विशेषज्ञ नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि इस तकनीक को एक बार आज़माएँ और धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ।