22 सितंबर 2026
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कोल इंडिया का वार्षिक CSR व्यय ₹1,000 करोड़ के करीब, 12 वर्षों में ₹7,276 करोड़ खर्च

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कोल इंडिया का वार्षिक CSR व्यय ₹1,000 करोड़ के करीब, 12 वर्षों में ₹7,276 करोड़ खर्च

सारांश

कोल इंडिया ने 12 वर्षों में CSR पर ₹7,276 करोड़ खर्च किए — वैधानिक सीमा से ₹1,481 करोड़ अधिक। 90% से ज़्यादा राशि सीधे कोयला-उत्पादक और आदिवासी-बहुल ज़िलों में लगाई गई। वार्षिक व्यय अब ₹1,000 करोड़ के करीब पहुँच गया है।

मुख्य बातें

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच CSR पर ₹7,276 करोड़ व्यय किए — वैधानिक आवश्यकता ₹5,795 करोड़ से ₹1,481 करोड़ अधिक।
कंपनी का वार्षिक CSR व्यय अब लगभग ₹1,000 करोड़ के स्तर पर पहुँच गया है।
CSR व्यय का कम से कम 80% खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में किया जाता है।
90% से अधिक CSR व्यय कोयला-उत्पादक राज्यों में — जहाँ खनन का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।
कंपनी अधिनियम 2013 से पहले भी CIL 'सामुदायिक विकास नीति 2005' के तहत सक्रिय था; 2013-14 में व्यय ₹409 करोड़ था।

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पर ₹7,276 करोड़ व्यय किए हैं, जबकि इस अवधि के लिए वैधानिक आवश्यकता केवल ₹5,795 करोड़ थी। इस प्रकार कंपनी का वार्षिक CSR व्यय अब लगभग ₹1,000 करोड़ के स्तर पर पहुँच गया है। कोयला मंत्रालय ने यह जानकारी मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को साझा की।

वैधानिक सीमा से अधिक व्यय

आँकड़ों के अनुसार, CIL ने अपनी सांविधिक CSR अनिवार्यता से ₹1,481 करोड़ अधिक खर्च किया है — यानी वैधानिक सीमा से करीब 25 प्रतिशत ज़्यादा। कोयला मंत्रालय ने कहा कि कंपनी ने न केवल अपने वैधानिक उत्तरदायित्व को पूरा किया है, बल्कि प्रति वर्ष उससे कहीं अधिक कार्य किया है।

गौरतलब है कि कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 के लागू होने से पहले भी CIL और उसकी सहायक कंपनियाँ 'सामुदायिक विकास (CD) नीति 2005' के अंतर्गत खनन क्षेत्रों के आसपास कल्याणकारी कार्यों में सक्रिय थीं।

CSR से पहले का इतिहास

कंपनी अधिनियम 2013 के लागू होने से पूर्व के तीन वर्षों में CIL का सामुदायिक विकास व्यय वित्त वर्ष 2011-12 में ₹82 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2013-14 में ₹409 करोड़ तक पहुँचा था। उस दौर में सहायक कंपनियाँ खनन संचालन स्थलों के 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गाँवों में पेयजल सुविधा, स्वास्थ्य शिविर और छोटे अवसंरचना कार्य करती थीं। हालाँकि उस व्यवस्था में एक सुसंगत संस्थागत ढाँचे का अभाव था।

CIL की CSR नीति: स्थानीय प्राथमिकता

कंपनी अधिनियम 2013 ने कॉर्पोरेट इंडिया के लिए CSR को वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाया — इसके अंतर्गत औसत शुद्ध लाभ का एक निर्धारित हिस्सा CSR पर खर्च करना और बोर्ड-स्तरीय CSR समिति के माध्यम से निगरानी करना ज़रूरी हो गया।

CIL ने अपनी आंतरिक नीति के ज़रिये इसे और आगे बढ़ाया। कंपनी अपने वार्षिक CSR व्यय का कम से कम 80 प्रतिशत खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में उपयोग करती है, जिसमें परियोजना-प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। शेष राशि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की पहलों के लिए आरक्षित रहती है।

कोयला-उत्पादक राज्यों को सीधा लाभ

स्थानीय क्षेत्रों पर इस केंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम यह है कि CIL का 90 प्रतिशत से अधिक CSR व्यय कोयला-उत्पादक राज्यों में ही होता है। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि CIL का संचालन भारत के कुछ सबसे कम संसाधनों वाले और आदिवासी-बहुल जिलों तक फैला हुआ है — ऐसे क्षेत्र जहाँ खनन का प्रत्यक्ष सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव सर्वाधिक महसूस किया जाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब बड़े सार्वजनिक उपक्रमों पर खनन-प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और विकास को लेकर जवाबदेही की माँग लगातार बढ़ रही है। CIL की यह रिपोर्टिंग उसी दिशा में एक संस्थागत प्रतिक्रिया के रूप में देखी जा सकती है।

आगे की दिशा

कोयला मंत्रालय के इस प्रकाशन से स्पष्ट है कि सरकार CIL के CSR प्रदर्शन को एक नीतिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक मापदंड यह होगा कि व्यय की गई राशि का सत्यापन-योग्य सामाजिक प्रभाव किस हद तक दर्ज किया जाता है — केवल खर्च के आँकड़े पर्याप्त नहीं होते।

संपादकीय दृष्टिकोण

276 करोड़ का यह आँकड़ा प्रभावशाली दिखता है, लेकिन असली सवाल यह है कि व्यय की गई राशि ने आदिवासी-बहुल खनन जिलों में मापने योग्य सामाजिक बदलाव कितना लाया। कंपनी अधिनियम 2013 के बाद से CSR रिपोर्टिंग में 'कितना खर्च हुआ' पर ज़ोर रहा है, 'क्या बदला' पर नहीं — और CIL की यह घोषणा भी उसी ढर्रे पर चलती है। यह भी गौर करने योग्य है कि 90% व्यय कोयला-उत्पादक राज्यों में होने की बात कही जा रही है, जबकि इन्हीं राज्यों में विस्थापन, प्रदूषण और आजीविका संकट की शिकायतें सबसे अधिक हैं — यानी CSR और खनन प्रभाव के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोल इंडिया लिमिटेड ने CSR पर कुल कितना व्यय किया है?
वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच CIL ने CSR पर ₹7,276 करोड़ व्यय किए हैं, जबकि इस अवधि की वैधानिक आवश्यकता ₹5,795 करोड़ थी। इस प्रकार कंपनी ने अपनी कानूनी बाध्यता से ₹1,481 करोड़ अधिक खर्च किया।
CIL का वार्षिक CSR व्यय कितना है?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कोल इंडिया का वार्षिक CSR व्यय अब लगभग ₹1,000 करोड़ के स्तर पर पहुँच गया है। यह 2013-14 के ₹409 करोड़ के सामुदायिक विकास व्यय की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
CIL अपना CSR व्यय कहाँ करता है?
CIL अपने वार्षिक CSR व्यय का कम से कम 80% खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में खर्च करता है, जिसमें परियोजना-प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। इसका परिणाम यह है कि 90% से अधिक व्यय कोयला-उत्पादक राज्यों में ही होता है।
कंपनी अधिनियम 2013 से पहले CIL की सामाजिक जिम्मेदारी कैसे निभाई जाती थी?
कंपनी अधिनियम 2013 से पहले CIL और उसकी सहायक कंपनियाँ 'सामुदायिक विकास नीति 2005' के अंतर्गत खनन स्थलों के 8 किलोमीटर के दायरे में पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और अवसंरचना कार्य करती थीं। उस दौर में एक सुसंगत संस्थागत ढाँचे का अभाव था, जिसे 2013 के अधिनियम ने दूर किया।
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 CIL पर कैसे लागू होती है?
धारा 135 के अंतर्गत CIL जैसी पात्र कंपनियों को अपने औसत शुद्ध लाभ का एक निर्धारित हिस्सा CSR पर खर्च करना अनिवार्य है। इसके लिए अनुसूची 7 के विषयों का पालन करना होता है और बोर्ड-स्तरीय CSR समिति निगरानी करती है। CIL ने इस बाध्यता से आगे जाकर अपनी आंतरिक नीति भी बनाई है।
राष्ट्र प्रेस
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