इबोला अलर्ट: भारत ने एयर सुविधा पोर्टल सक्रिय किया, DRC में 1,118 मामले और 291 मौतें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने इबोला वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे के मद्देनज़र एयर सुविधा पोर्टल को सक्रिय कर दिया है, जिसके तहत इबोला-प्रभावित देशों से आने वाले या वहाँ से गुज़रने वाले यात्रियों को विमान से उतरने से पहले सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म (SDF) ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से यह व्यवस्था लागू है।
एयर सुविधा पोर्टल: क्या बदला
रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले हवाई अड्डों पर कागज़-आधारित (पेपर-बेस्ड) स्वास्थ्य घोषणा प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। अब यात्री उड़ान से पहले ही ऑनलाइन SDF भर सकते हैं, जिससे प्रवेश बिंदुओं — हवाई अड्डों और बंदरगाहों — पर स्वास्थ्य निगरानी तेज़ और सुगम दोनों होगी। यह बदलाव यात्रियों की आवाजाही को बाधित किए बिना स्वास्थ्य जाँच को मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
फ्रांस में संदिग्ध मामला: क्या हुआ
फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने बुधवार (स्थानीय समय) को बताया कि एक अनुभवी डॉक्टर, जो डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में मिशन पर थे, के इबोला वायरस टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर को विमान में बैठते समय कोई लक्षण नहीं था, परंतु उड़ान के दौरान सिरदर्द होने पर उन्होंने स्वयं अलर्ट जारी किया ताकि पेरिस पहुँचने पर उचित चिकित्सा व्यवस्था हो सके।
फ्लाइट लैंड होते ही डॉक्टर को अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया। मंत्री के अनुसार, वह 21 दिनों — जो इबोला का इन्क्यूबेशन पीरियड है — तक आइसोलेशन में रहेंगे। इसके अतिरिक्त, उस उड़ान में सफर करने वाले 5 अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी आइसोलेट किया गया है।
DRC में स्थिति कितनी गंभीर
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में अब तक इबोला के 1,118 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 291 मौतें दर्ज की गई हैं। DRC सरकार ने ताज़ा स्थिति को लेकर अपडेट जारी किया है। इबोला का यह प्रकोप मुख्यतः मध्य और पूर्वी अफ्रीका तक सीमित है।
यूरोप में खतरे का आकलन
यूरोपीय सेंटर फॉर डिज़ीज़ प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) का अनुमान है कि यूरोप में रहने वाले लोगों के लिए इबोला संक्रमण का खतरा अत्यंत कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस का प्रसार मुख्यतः सीधे शारीरिक संपर्क से होता है, जिससे हवाई मार्ग से व्यापक फैलाव की आशंका सीमित रहती है।
भारत की तैयारी और आगे की राह
भारत की यह पहल WHO की PHEIC घोषणा के बाद उठाए गए वैश्विक एहतियाती कदमों के अनुरूप है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेल्फ-डिक्लेरेशन प्रणाली न केवल डेटा संग्रह को तेज़ करती है, बल्कि संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान में भी सहायक होती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले हफ्तों में DRC और अन्य प्रभावित देशों में स्थिति किस दिशा में जाती है।