मिर्गी नियंत्रण में कारगर 6 योगासन: आयुष मंत्रालय की सलाह, वज्रासन से भ्रामरी तक
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 29 मई 2025 को मिर्गी (एपिलेप्सी) से पीड़ित लोगों के लिए विशेष योगासनों की सूची जारी की है, जिनके नियमित अभ्यास से तंत्रिका तंत्र को शांत करने, तनाव घटाने और दौरे पड़ने की आवृत्ति कम करने में सहायता मिल सकती है। मंत्रालय के अनुसार, विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले यह जानकारी उन लाखों लोगों तक पहुँचाने का प्रयास है जो इस न्यूरोलॉजिकल स्थिति से जूझ रहे हैं।
मिर्गी और योग का संबंध
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मिर्गी एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय तरंगें असंतुलित हो जाती हैं। दवाओं के साथ-साथ नियमित योग अभ्यास इस स्थिति के प्रबंधन में सहायक भूमिका निभा सकता है। मंत्रालय का कहना है कि योग शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की माँग लगातार उठती रही है।
मुख्य अनुशंसित योगासन
उत्तानपादासन: लेटकर पैरों को ऊपर उठाने वाला यह आसन पेट की माँसपेशियों को मजबूत करता है और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। मंत्रालय के अनुसार इससे तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
भ्रामरी प्राणायाम: आँखें बंद करके 'म' की ध्वनि के साथ साँस छोड़ने की इस तकनीक को मिर्गी के मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है। यह मस्तिष्क को शांत करता है और चिंता व तनाव को दूर करने में सहायक है।
ताड़ासन: खड़े होकर पूरे शरीर को तानकर किया जाने वाला यह अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है, मुद्रा सुधारता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन: इस ट्विस्टिंग आसन से कमर और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है और तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने में भी सहायक है।
वज्रासन: भोजन के बाद भी किया जा सकने वाला यह आसन पाचन सुधारता है और मन को शांत रखता है — मिर्गी के मरीजों के लिए यह सुलभ और सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
भुजंगासन: सर्प मुद्रा वाला यह आसन छाती और फेफड़ों को खोलता है तथा समग्र ऊर्जा स्तर बढ़ाता है।
विशेषज्ञों की सलाह
योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन आसनों को सही तकनीक और धीरे-धीरे बढ़ती तीव्रता के साथ करना आवश्यक है। विशेष रूप से मिर्गी के मरीजों को शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करना चाहिए। गौरतलब है कि योग को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक माना जाना चाहिए।
आयुष मंत्रालय की अपील
मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया है कि वे 21 जून के विश्व योग दिवस से पहले इन आसनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। मंत्रालय का मानना है कि योग केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही ज़रूरी है। नियमित अभ्यास से न केवल मिर्गी के दौरों की आवृत्ति घट सकती है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार संभव है।