क्या रील्स देखने से गर्दन की सेहत बिगड़ रही है?

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क्या रील्स देखने से गर्दन की सेहत बिगड़ रही है?

सारांश

आजकल के डिजिटल युग में रील्स का बढ़ता चलन गर्दन और रीढ़ की हड्डी की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। जानिए कैसे यह आदत कम उम्र में ही सर्वाइकल समस्याओं के खतरे को बढ़ा रही है।

मुख्य बातें

गर्दन दर्द और सर्वाइकल समस्याएँ बढ़ रही हैं।
रील्स देखने से गर्दन और रीढ़ पर दबाव पड़ता है।
एक ही स्थिति में रहने से मांसपेशियों में तनाव होता है।
समय पर ध्यान न देने से समस्या स्थायी हो सकती है।
डॉक्टरों से सलाह लेना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी दैनिक गतिविधियों का अभिन्न अंग बन चुका है। कामकाज के साथ-साथ लोग शॉर्ट वीडियो, अर्थात् रील्स के माध्यम से मनोरंजन करते रहते हैं।

छोटे बच्चे, युवा और वृद्ध सभी घंटों तक रील्स देखने में व्यस्त रहते हैं। देखने में यह आदत साधारण लगती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत धीरे-धीरे गर्दन की सेहत को प्रभावित कर रही है। अब कम उम्र के लोग भी गर्दन दर्द, अकड़न और सर्वाइकल जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और इसका एक बड़ा कारण है लगातार रील्स देखना।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मोबाइल पर रील्स देखता है, तो उसका सिर अक्सर आगे की ओर झुका रहता है। सामान्य स्थिति में गर्दन पर सिर का वजन लगभग पाँच किलो होता है, लेकिन जब सिर झुकता है, तो यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से गर्दन की मांसपेशियों और नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पाइन को नुकसान पहुँचाने लगता है। प्रारंभ में हल्का दर्द महसूस होता है, जिसे लोग थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि रील्स देखते समय व्यक्ति एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठा या लेटा रहता है। गर्दन हिलती नहीं है और मांसपेशियाँ लगातार तनाव में रहती हैं। इससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में जकड़न आ जाती है, जो आगे चलकर गंभीर दर्द का रूप ले लेती है। कई मामलों में यह दर्द गर्दन से कंधों और बाजुओं तक फैल जाता है, जिससे दैनिक कार्य करना भी मुश्किल हो जाता है।

केवल गर्दन ही नहीं, रील्स देखने की आदत का असर रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है। यह हड्डी हमारे शरीर को सीधा रखने में मदद करती है। जब गलत पोस्चर लंबे समय तक बना रहता है, तो रीढ़ की प्राकृतिक बनावट बिगड़ने लगती है। इसका सीधा असर गर्दन के ऊपरी हिस्से पर पड़ता है। चिकित्सा भाषा में इसे सर्वाइकल स्पाइन डिसऑर्डर कहा जाता है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या स्थायी हो सकती है।

रील्स की लत का असर मस्तिष्क और आँखों पर भी पड़ता है। लगातार स्क्रीन देखने से आँखों में जलन, भारीपन और धुंधलापन महसूस होता है। वहीं, मस्तिष्क हर समय वीडियो देखने के कारण विश्राम नहीं कर पाता। इससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संतुलन बिगड़ जाता है। तनाव बढ़ने से मांसपेशियों का दर्द और बढ़ जाता है, जिससे गर्दन की समस्याएँ और गंभीर हो जाती हैं।

इससे भी अधिक, लंबे समय तक रील्स देखने से सिरदर्द, चक्कर आना और कभी-कभी हाथों में झनझनाहट जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह नसों पर पड़ने वाले दबाव का संकेत हो सकता है। यदि समय पर इन संकेतों को नहीं समझा गया, तो आगे चलकर दवाइयों और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना सही होगा कि डिजिटल सामग्री का अत्यधिक उपयोग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। समाज को इस समस्या के प्रति जागरूक होना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रील्स देखने से गर्दन में दर्द क्यों होता है?
गर्दन का सही पोस्चर न बनाए रखने से और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से गर्दन में दर्द हो सकता है।
क्या रील्स देखने से सिरदर्द हो सकता है?
जी हाँ, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सिरदर्द और आँखों में जलन हो सकती है।
गर्दन की समस्याओं से कैसे बचा जाए?
नियमित रूप से व्यायाम करें, सही पोस्चर बनाए रखें और स्क्रीन देखने का समय सीमित करें।
राष्ट्र प्रेस
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