13 अगस्त 2026
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मानसून सत्र में PM और गृह मंत्री रहे अनुपस्थित, गौरव गोगोई बोले — 'पहली बार सरकार को इतना डरा देखा'

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मानसून सत्र में PM और गृह मंत्री रहे अनुपस्थित, गौरव गोगोई बोले — 'पहली बार सरकार को इतना डरा देखा'

सारांश

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मानसून सत्र को लेकर केंद्र सरकार पर सबसे तीखा हमला बोला — PM और गृह मंत्री की पूरे सत्र अनुपस्थिति को 'अभूतपूर्व' बताया। छात्र आंदोलन की तीन माँगों में से सिर्फ एक मानी गई, बाकी दो पर सरकार चुप रही।

मुख्य बातें

गौरव गोगोई ने 13 अगस्त को जयराम रमेश के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
गोगोई ने दावा किया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे मानसून सत्र सदन की कार्यवाही से अनुपस्थित रहे।
कांग्रेस की तीन माँगों में से सरकार ने केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कार्रवाई की।
गोगोई ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री 15 दिनों तक गायब रहे और पैलेट गन पर बयान नहीं दिया।
कांग्रेस ने राज्य सरकारों के अधिकार कमज़ोर करने वाले विधेयकों और 'चंदा चोरी' पर बहस की माँग भी दोहराई।

कांग्रेस लोकसभा सांसद गौरव गोगोई और राज्यसभा सदस्य एवं कांग्रेस संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने 13 अगस्त को नई दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। गोगोई ने दावा किया कि मानसून सत्र में सत्तापक्ष जिस तरह से पीछे हटा, वैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।

मुख्य आरोप: PM और गृह मंत्री की अनुपस्थिति

गोगोई ने कहा, 'हमने सदन के कई सत्र देखे हैं लेकिन पहली बार इस मानसून सत्र में सत्ताधारी सरकार को इतना डरा और सहमा देखा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे सत्र सदन की कार्यवाही से दूर रहे — जो उनके अनुसार अभूतपूर्व है।

गोगोई ने विशेष रूप से कहा कि छात्र आंदोलन से जुड़ी दो दिन की चर्चा के दौरान न तो प्रधानमंत्री सदन में आए और न ही गृह मंत्री। उनके शब्दों में, 'गृह मंत्री 15 दिनों तक गायब हो गए।'

कांग्रेस की तीन माँगें और सरकार का रुख

गोगोई के अनुसार, छात्र आंदोलन से उपजे दबाव में सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा और संबंधित संशोधन विधेयक सदन में लाया गया। इस पर हुई चर्चा में कांग्रेस ने तीन माँगें रखी थीं — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पैलेट गन के इस्तेमाल पर गृह मंत्री का बयान, और छात्रों से प्रधानमंत्री की माफी।

गोगोई ने कहा कि सरकार ने इनमें से केवल पहली माँग — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — पर कार्रवाई की। शेष दोनों माँगें अनुत्तरित रहीं।

सरकार पर 'देर से तैयारी' का आरोप

'जब चर्चा हो रही थी तब तो आप नहीं आए, अब 15 दिनों बाद कहते हैं कि चर्चा के लिए तैयार हैं' — गोगोई ने व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा। उनका तर्क था कि चर्चा हो चुकी थी, बस गृह मंत्री का बयान बाकी था, जो कभी नहीं आया।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार संसदीय जवाबदेही को लेकर सरकार को घेर रहा है। गौरतलब है कि मानसून सत्र में कई विधेयकों पर पर्याप्त बहस न होने को लेकर संसदीय प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।

राज्य सरकारों के अधिकारों पर चिंता

गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि इस सत्र में ऐसे विधेयक पारित किए गए जो राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर करते हैं। उन्होंने माँग की कि गृह मंत्री सदन में आकर 'चंदा चोरी' के मुद्दे पर बहस करें।

आने वाले दिनों में कांग्रेस इन मुद्दों को संसद के बाहर भी उठाने की रणनीति पर काम कर सकती है, जो शीतकालीन सत्र से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरव गोगोई ने मानसून सत्र को लेकर क्या कहा?
गौरव गोगोई ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने किसी सत्ताधारी सरकार को इतना डरा और सहमा देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पूरे मानसून सत्र सदन से अनुपस्थित रहे।
कांग्रेस की तीन माँगें क्या थीं और सरकार ने क्या माना?
कांग्रेस ने तीन माँगें रखी थीं — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पैलेट गन पर गृह मंत्री का बयान, और छात्रों से प्रधानमंत्री की माफी। गोगोई के अनुसार सरकार ने केवल पहली माँग — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — पर कार्रवाई की।
गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर गोगोई ने क्या कहा?
गोगोई ने कहा कि गृह मंत्री छात्र आंदोलन से जुड़ी चर्चा के दौरान 15 दिनों तक सदन से गायब रहे। सत्र समाप्त होने के दो दिन पहले सरकार ने चर्चा की तैयारी जताई, जिसे गोगोई ने 'देर से और बेमानी' करार दिया।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयराम रमेश की क्या भूमिका थी?
राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस संचार विभाग के महासचिव जयराम रमेश ने गौरव गोगोई के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह कांग्रेस की संसदीय रणनीति और संचार को एक साथ सामने रखने का प्रयास था।
कांग्रेस ने राज्यों के अधिकारों पर क्या आरोप लगाया?
गोगोई ने आरोप लगाया कि मानसून सत्र में ऐसे विधेयक लाए गए जो राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर करते हैं। उन्होंने 'चंदा चोरी' के मुद्दे पर भी सदन में बहस की माँग दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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