कांग्रेस सांसदों का एनडीए पर हमला: शिक्षा, रोजगार और गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर सदन में उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के कई वरिष्ठ सांसदों ने 7 अगस्त को संसद में एनडीए सरकार पर तीखे प्रहार किए — शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, रोजगार संकट, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बयान और गृह मंत्री की सदन से अनुपस्थिति को लेकर। विपक्ष का आरोप था कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाकर युवाओं को गुमराह कर रही है।
भागवत के बयान पर खेड़ा का पलटवार
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी बातों को 'अधिक महत्व देने की आवश्यकता नहीं है।' खेड़ा ने स्पष्ट किया कि भागवत संसद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए जवाबदेही सरकार में बैठे मंत्रियों की है। उन्होंने माँग की कि जिम्मेदार मंत्री सदन में आकर अपना पक्ष रखें।
संसद विस्तार प्रस्ताव पर चिदंबरम की चिंता
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने लोकसभा में सदस्यों की संख्या 815 तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि वर्तमान 543 सांसदों के साथ भी सभी सदस्यों को पर्याप्त बोलने का समय नहीं मिलता। उनके अनुसार, और अधिक सदस्य जोड़ने से संसदीय बहस और कमज़ोर होगी, न कि मज़बूत।
सामाजिक असमानता और संसाधन वितरण का मुद्दा
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने सामाजिक न्याय का सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि गरीब और वंचित वर्गों तक संसाधन समान रूप से पहुँचें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस जिम्मेदारी में विफल रही है, जिसके चलते आर्थिक और सामाजिक असमानता लगातार गहरी होती जा रही है।
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कहा कि 'केवल भाषण देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर हुई है और रोजगार के अवसर घटे हैं, जिससे युवाओं, मध्यम वर्ग और गरीबों में निराशा बढ़ी है। उन्होंने गृह मंत्री से सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की माँग की।
गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर विपक्ष का हमला
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पीठासीन अधिकारी की इच्छा के बावजूद गृह मंत्री का सदन में न आना 'लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक' है और यह सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सवाल किया कि गृह मंत्री सदन से क्यों बच रहे हैं। गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा सुधार की माँग करने वाले छात्रों की आवाज़ सुनने के बजाय उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई की गई, जिससे देशभर में छात्रों में असंतोष फैला है।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा — केंद्र सरकार को इन मुद्दों को स्वीकार कर ठोस कदम उठाने होंगे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा और रोजगार को लेकर विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलन तेज़ हुए हैं। संसद का मानसून सत्र विपक्ष के इन सवालों के साथ आगे बढ़ेगा।