पप्पू यादव पर हमले के बाद कांग्रेस का संसद में हमला, अमित शाह से मांगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 3 अगस्त को संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया, जब पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव पर हुए कथित हमले को लेकर पार्टी नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की माँग की। कांग्रेस ने इस घटना को देश में कानून-व्यवस्था की गंभीर विफलता करार दिया और कहा कि जब एक निर्वाचित सांसद की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो आम नागरिक की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस नेता और सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। उन्होंने जंतर-मंतर पर बच्चों के साथ हुई कथित घटना और अब एक सांसद पर हमले को हालात बिगड़ने का संकेत बताया। खेड़ा ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को स्पष्ट करना चाहिए कि देश किस दिशा में जा रहा है और ऐसी घटनाएँ क्यों बार-बार हो रही हैं।
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने संसद के स्थगन पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने सवाल किया कि जो गृह मंत्री पिछले सत्रों में लगातार सदन में मौजूद रहते थे, वे इस बार संसद में क्यों नहीं आ रहे।
सांसद की सुरक्षा पर सवाल
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई घटना की निंदा की और कहा कि यह अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। उन्होंने सरकार से तीन माँगें रखीं — हमलावर की पहचान सार्वजनिक करना, सुरक्षा में हुई चूक की जाँच कराना और भविष्य में सांसदों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। हालाँकि मल्लू रवि ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद के दौरान थप्पड़ या चप्पल फेंकने जैसी घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता।
अयोध्या और छात्र मुद्दे पर कांग्रेस का रुख
पवन खेड़ा ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े विवाद पर कहा कि कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रमुख लोगों की वैचारिक पृष्ठभूमि तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से उनके संबंध पर सवाल उठाए। खेड़ा ने सनातन धर्म के कथित अपमान के मामले में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मौजूद लोगों की भूमिका पर सवाल उठाना गलत नहीं है।
वेणुगोपाल ने छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों और कथित डोनेशन घोटाले के मामले पर भी गृह मंत्री से सदन में जवाब देने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
संसद और लोकतांत्रिक विमर्श
कांग्रेस का कहना है कि संसद लोकतांत्रिक विमर्श का मंच है और सरकार को विपक्ष के सवालों से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान गृह मंत्री की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया हो — पिछले कुछ सत्रों में भी इस तरह के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आगे देखना होगा कि क्या सरकार विपक्ष की माँगों पर संसद में चर्चा का रास्ता खोलती है।