मानसून सत्र का पहला सप्ताह हंगामे में बर्बाद, लोकसभा-राज्यसभा में नहीं चला प्रश्नकाल
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2024 का पहला पूरा सप्ताह लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गया। नई दिल्ली में 24 जुलाई तक चले इस सप्ताह में लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों में एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी। विपक्ष की केंद्रीय माँग रही — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा — जिसके बिना विपक्षी सांसदों ने किसी भी चर्चा में भाग लेने से इनकार किया।
शुक्रवार को क्या हुआ
शुक्रवार, 24 जुलाई को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी पर उतर आए। लोकसभा में कई सांसद अपनी सीटें छोड़कर वेल में आ गए, जिससे कार्यवाही ठप हो गई और सदन को पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में भी कुछ ऐसा ही दृश्य रहा। जैसे ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए खड़े हुए, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शोर-शराबा बढ़ गया। खड़गे जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और उन पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाना चाह रहे थे। हंगामे के कारण राज्यसभा भी दोपहर 12 बजे तक स्थगित हुई और बाद में फिर से कार्यवाही बाधित होने पर एक बार और स्थगन लागू करना पड़ा।
विपक्ष की माँग और नेताओं के बयान
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद ही सदन में चर्चा संभव होगी। सदन से बाहर निकले विपक्षी सांसदों ने भी इस्तीफे की माँग को लेकर नारेबाजी जारी रखी।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने दोपहर बाद कार्यवाही पुनः शुरू होने पर भी यही माँग दोहराई — शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और सरकार को सदन में इस विषय पर बयान देना चाहिए। इस पर फिर हंगामा शुरू हो गया और सदन स्थगित करना पड़ा।
पूरे सप्ताह का असर
मानसून सत्र के दौरान पूरे सप्ताह प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य विधायी कार्य बाधित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के पास कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और पारित करने की ज़िम्मेदारी है। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में प्रश्नकाल सांसदों के लिए सरकार से सीधे जवाब माँगने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है — उसका पूरे सप्ताह ठप रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दृष्टि से गंभीर माना जाता है।
आगे क्या होगा
सोमवार को सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी। यह देखना होगा कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच किसी समझौते की ज़मीन तैयार होती है या गतिरोध जारी रहता है। विपक्ष की माँग अभी भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिकी है, जबकि सरकार की ओर से इस पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं आया है।