मानसून सत्र: लगातार तीसरे दिन संसद में हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा में प्रश्नकाल ठप
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा और राज्यसभा में 22 जुलाई को मानसून सत्र के तीसरे लगातार दिन भी प्रश्नकाल की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के कारण कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य विधायी कार्य लगातार तीन दिनों से बाधित हैं।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यसभा में कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा भड़क उठा। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे ही सोमवार को जंतर मंतर पर छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव शुरू हो गया। उपसभापति ने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि प्रश्नकाल के उत्तरों की तैयारी में काफी मेहनत लगती है और यह जनता से जुड़ा विषय है, इसलिए कार्यवाही चलने दी जाए — लेकिन हंगामा थमा नहीं।
लोकसभा में भी कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारेबाजी पर उतर आए। कई सांसद अपनी सीटों से उठकर सदन के मध्य में आ गए, जिससे कोई सुचारु विधायी कामकाज संभव नहीं हो सका।
विपक्ष का प्रदर्शन
विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर केंद्र सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव, और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के अनेक सांसद शामिल हुए। सांसदों ने 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारे लगाए।
सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र की शुरुआत से ही दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि यह मानसून सत्र में तीसरा लगातार दिन है जब प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य विधायी कार्य बाधित रहे। सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के चलते संसद का अधिकांश समय व्यवधान की भेंट चढ़ा।
आम जनता पर असर
प्रश्नकाल संसदीय लोकतंत्र का वह महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसके माध्यम से सांसद सरकार से जवाबदेही माँगते हैं और जनहित के मुद्दे उठाते हैं। लगातार तीन दिनों तक इसके बाधित रहने से न केवल विधायी कार्य अटका, बल्कि जनता के प्रतिनिधित्व का अवसर भी छिना।
क्या होगा आगे
दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे के बाद पुनः शुरू होनी थी, लेकिन गतिरोध के संकेत बरकरार हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक सरकार और विपक्ष के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती, मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा व्यवधान में ही बीत सकता है।