8 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सिद्धार्थनगर में गोलगप्पे खाने से 150 से ज़्यादा बीमार, 30+ बच्चों सहित अस्पताल में भर्ती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सिद्धार्थनगर में गोलगप्पे खाने से 150 से ज़्यादा बीमार, 30+ बच्चों सहित अस्पताल में भर्ती

सारांश

दीपावली की मिठास के बीच सिद्धार्थनगर के एक गाँव में गोलगप्पे ज़हर बन गए। 150 से ज़्यादा बीमार, 18 बच्चे PICU में — और यह यूपी में महज एक महीने में दूसरी बड़ी सामूहिक फूड पॉइजनिंग घटना है।

मुख्य बातें

सिद्धार्थनगर, यूपी में 8 नवंबर 2026 को गोलगप्पे खाने के बाद 150 से ज़्यादा लोग बीमार पड़े।
30 से 33 मरीज़ अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती, जिनमें 18 बच्चे PICU में।
गोलगप्पे खाने के दो दिन बाद उल्टी-दस्त के लक्षण शुरू हुए; दो-तीन की हालत शुरुआत में गंभीर थी, अब सभी स्थिर।
डॉक्टरों के अनुसार और मरीज़ आने की संभावना, बस से अतिरिक्त मरीज़ लाए जा रहे हैं।
पिछले महीने अमेठी में भी इसी तरह की घटना में 102 लोग बीमार हुए थे, जिनमें 39 बच्चे थे।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 8 नवंबर 2026 को दीपावली के त्योहार के दौरान एक स्थानीय विक्रेता से गोलगप्पे खाने के बाद 150 से अधिक लोग बीमार पड़ गए, जिन्हें सामूहिक फूड पॉइजनिंग का शिकार बताया जा रहा है। बीमार पड़ने वालों में से 30 से ज़्यादा लोगों — जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं — को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

खेसराहा थाना क्षेत्र के कलनाखोर पेदारी गाँव और आसपास के दो-तीन गाँवों में इस घटना के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात एक चिकित्सक ने बताया कि अब तक लगभग 30 से 33 मरीज़ इमरजेंसी विभाग में भर्ती हो चुके हैं।

चिकित्सक के अनुसार, लगभग 18 बच्चों को पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में रखा गया है, जबकि शेष 15 मरीज़ 15 वर्ष से अधिक आयु के हैं। डॉक्टर ने यह भी बताया कि खेसराहा क्षेत्र के गाँव में गोलगप्पे खाने के दो दिन बाद लोगों में उल्टी और दस्त के गंभीर लक्षण उभरने लगे।

मरीज़ों की स्थिति

चिकित्सक ने बताया कि भर्ती किए गए मरीज़ों में से दो-तीन की स्थिति शुरुआत में गंभीर थी, लेकिन समय पर उपचार के बाद अब सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अभी और मरीज़ आने की उम्मीद है — उनके अनुसार, 'बस के ज़रिए और भी मरीज़ आ रहे हैं।'

गौरतलब है कि त्योहारी सीज़न में स्ट्रीट फूड की माँग तेज़ी से बढ़ती है, जिससे खाद्य सुरक्षा की निगरानी और भी ज़रूरी हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी से बनी पुदीने-इमली की चटनी या बासी भरावन फूड पॉइजनिंग के सामान्य कारण होते हैं।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य टीमें प्रभावित गाँवों में भेजी गई हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा संबंधित विक्रेता के खिलाफ जाँच शुरू किए जाने की सूचना है, हालाँकि आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।

यूपी में फूड पॉइजनिंग का बढ़ता पैटर्न

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सड़क किनारे खाने से जुड़ी बीमारियाँ लगातार सुर्खियाँ बन रही हैं। पिछले महीने ही अमेठी जिले के कोटवा गाँव में एक मेले में 'खस्ता' खाने के बाद लगभग 102 लोग बीमार पड़ गए थे, जिनमें 39 बच्चे और 63 वयस्क शामिल थे। उस घटना में 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

अमेठी मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्वयं घटनास्थल पर पहुँचे थे और प्रभावित लोगों की जाँच व उपचार की निगरानी की थी। उस बार गाँव के मुखिया की शिकायत पर स्वास्थ्य टीम मौके पर पहुँची थी।

आगे की स्थिति

सिद्धार्थनगर की इस घटना में मरीज़ों की संख्या अभी भी बढ़ने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग से यह अपेक्षा है कि वह संबंधित विक्रेता के खाद्य नमूने परीक्षण के लिए भेजेगा और गाँवों में ओआरएस वितरण सहित निगरानी टीमें तैनात करेगा। त्योहारी सीज़न में स्ट्रीट फूड की सुरक्षा को लेकर सख्त निगरानी की माँग फिर से उठ खड़ी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो साफ़ संकेत देती है कि त्योहारी भीड़ में स्ट्रीट फूड की निगरानी व्यवस्था बुरी तरह चरमरा रही है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियम कागज़ों पर हैं, लेकिन ज़मीन पर लाइसेंसिंग और नियमित जाँच की स्थिति कमज़ोर है। जब तक विक्रेताओं की नियमित जाँच और दूषित खाद्य सामग्री पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, दीपावली जैसे त्योहार हर साल ऐसी त्रासदी दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धार्थनगर में गोलगप्पे खाने से कितने लोग बीमार हुए?
दीपावली के दौरान सिद्धार्थनगर के खेसराहा थाना क्षेत्र में एक स्थानीय विक्रेता से गोलगप्पे खाने के बाद 150 से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इनमें से 30 से 33 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जिनमें 18 बच्चे PICU में हैं।
गोलगप्पे खाने के बाद लक्षण कब सामने आए?
चिकित्सकों के अनुसार, गोलगप्पे खाने के लगभग दो दिन बाद लोगों में उल्टी और दस्त के लक्षण प्रकट हुए। यह देरी दूषित पानी या भरावन सामग्री से होने वाली फूड पॉइजनिंग की सामान्य प्रवृत्ति के अनुरूप है।
भर्ती मरीज़ों की स्थिति अभी कैसी है?
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआत में दो-तीन मरीज़ों की हालत गंभीर थी, लेकिन समय पर उपचार के बाद अब सभी की स्थिति स्थिर है। हालाँकि, डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि और मरीज़ आने की संभावना बनी हुई है।
क्या यूपी में पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, पिछले महीने ही अमेठी जिले के कोटवा गाँव में एक मेले में 'खस्ता' खाने से करीब 102 लोग बीमार हुए थे, जिनमें 39 बच्चे थे। उस घटना में 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था और मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वयं मौके पर पहुँचे थे।
सिद्धार्थनगर फूड पॉइजनिंग मामले में प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
अधिकारियों ने स्वास्थ्य टीमें प्रभावित गाँवों में भेजी हैं और संबंधित विक्रेता के खिलाफ जाँच शुरू करने की सूचना है। खाद्य नमूनों को परीक्षण के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है, हालाँकि आधिकारिक विस्तृत बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले