हरी सब्जियों के सेवन का सही तरीका: आयुर्वेद की सलाह
सारांश
Key Takeaways
- हरी सब्जियों का सेवन सभी के लिए फायदेमंद है।
- कच्ची सब्जियों का सेवन करने से बचें।
- आयुर्वेद के अनुसार सब्जियों को पकाने का सही तरीका अपनाएं।
- बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरतें।
- पौष्टिकता बनाए रखने के लिए सब्जियों को सही तरीके से पकाएं।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हमारे पूर्वज हमेशा हरी सब्जियों के सेवन की सलाह देते हैं। हरी सब्जियों का उपयोग हर आयु वर्ग के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इनका सेवन पाचन में सुधार, प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, इनके सेवन का सही तरीका बहुत कम लोगों को पता होता है।
आजकल, सैंडविच से लेकर नूडल्स तक में कच्ची सब्जियों का उपयोग किया जा रहा है, जो पाचन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, हरी सब्जियों का सेवन करने का एक सही तरीका होता है, ताकि शरीर को इसका पूरा लाभ मिल सके। हरी पत्तेदार सब्जियां पोषण से भरपूर होती हैं, लेकिन आयुर्वेद में सलाह दी गई है कि इन्हें कम मात्रा में और सही तरीके से पकाकर खाया जाना चाहिए, क्योंकि कई हरी सब्जियां वात दोष को बढ़ा सकती हैं और पचने में भारी होती हैं। इसके लिए आयुर्वेद में कुछ उत्तम तरीके बताए गए हैं, जिससे हरी सब्जियों की पौष्टिकता को बनाए रखते हुए पाचन प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है।
कच्ची सब्जियों का सेवन करने से बचें, विशेषकर पालक, शिमला मिर्च और गोभी (पत्तागोभी)। इन सब्जियों में परजीवी टेपवर्म होते हैं, जो पेट से लेकर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, कच्ची हरी सब्जियों में वात की अधिकता होती है। पकने के बाद, सब्जियों में वात की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए, हरी सब्जियों को उबालें, उनका अतिरिक्त पानी निचोड़ें और अंत में घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं।
ध्यान देने योग्य एक और बात यह है कि बुजुर्गों और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन सीमित करने दें। ऐसा इसलिए है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ शरीर में वात की अधिकता बढ़ जाती है और पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। बच्चों का पाचन भी बड़ों की तुलना में कमज़ोर होता है। इस प्रकार, बुजुर्गों और बच्चों दोनों को सही मात्रा और सही तरीके से सब्जियों का सेवन करने देना महत्वपूर्ण है।
बुजुर्गों और बच्चों को तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू अधिक मात्रा में दें। ये हरी सब्जियों की तरह ही पौष्टिक होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करते हैं, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे रूप में भी दिया जा सकता है।