कर्नाटक: 45 आइसक्रीम फैक्ट्रियों में खाद्य सुरक्षा छापे, एक्सपायर उत्पाद जब्त; 70 नमूने जाँच को भेजे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) ने 9 अक्टूबर 2026 को राज्यभर में 45 आइसक्रीम निर्माण इकाइयों का विशेष निरीक्षण किया। इस अभियान में कई फैक्ट्रियों में नियमों का उल्लंघन उजागर हुआ, एक्सपायर खाद्य उत्पाद जब्त किए गए और 70 खाद्य नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जाँच के लिए भेजे गए।
निरीक्षण अभियान का दायरा
FSDA आयुक्त की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एकत्र किए गए 70 नमूनों में आइसक्रीम, दूध, दूध का पाउडर, फ्लेवरिंग पदार्थ, चीनी, विभिन्न खाद्य एडिटिव्स और अन्य कच्चा माल शामिल हैं। इन नमूनों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जाँच के लिए संबंधित सरकारी खाद्य प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।
मुख्य उल्लंघन और जब्ती
बेंगलुरु स्थित सावारा आइसक्रीम कैफे से एक्सपायर हो चुके खाद्य उत्पाद जब्त किए गए, जिनमें मैरीगोल्ड ब्रिटानिया बिस्कुट, नंदिनी समृद्धि दूध, एल्केलाइज्ड चाय, कॉफी मिक्स और सूखा नारियल पाउडर शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' के प्रावधानों के तहत इस इकाई के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
बेंगलुरु के ही एम.एन. एंटरप्राइजेज से भी एक्सपायर उत्पाद — प्लेन कैरमेल, नेस्ले मिल्कमेड और मिल्की मिस्ट खोया — जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, इस इकाई में लेबलिंग आवश्यकताओं से जुड़ी कमियाँ भी पाई गईं।
मैसूरु की जॉन कैंडी आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लेबलिंग संबंधी खामियाँ पाए जाने पर ₹20,000 मूल्य के आइसक्रीम उत्पाद जब्त कर लिए गए। रायचूर की जेमिनी आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में साफ-सफाई का घोर अभाव मिला, जिस पर संबंधित अधिकारियों ने नोटिस जारी किया है।
विभाग की प्रतिक्रिया
FSDA आयुक्त ने स्पष्ट किया कि खामियाँ पाई जाने वाली सभी फैक्ट्रियों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए राज्यभर में आइसक्रीम निर्माण इकाइयों में इस तरह के विशेष निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
आम जनता पर असर
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य मिलावट और एक्सपायर उत्पादों की बिक्री को लेकर उपभोक्ता चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि आइसक्रीम जैसे डेयरी उत्पाद सीधे बच्चों और बड़ों दोनों के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके उत्पादन में मानक अनुपालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रयोगशाला परिणाम आने के बाद और अधिक इकाइयों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या होगा आगे
एकत्र किए गए 70 नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद विभाग अतिरिक्त कानूनी कदम उठा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस प्राप्त इकाइयों को एक निर्धारित समयसीमा के भीतर कमियाँ दूर करनी होंगी, अन्यथा उनके लाइसेंस पर कार्रवाई की जा सकती है। राज्य में आइसक्रीम निर्माण क्षेत्र की विशेष निगरानी जारी रहेगी।