मत्स्यासन से दूर होगी थकान और सुस्ती, आयुष मंत्रालय ने बताए रोज़ाना अभ्यास के फायदे
सारांश
मुख्य बातें
मत्स्यासन को थकान और सुस्ती दूर करने के सबसे प्रभावी योगासनों में से एक माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान, नींद की कमी और घंटों एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने से शरीर और मस्तिष्क दोनों पर थकान हावी हो जाती है। ऐसे में मत्स्यासन का नियमित अभ्यास शरीर को भीतर से ऊर्जावान बनाने में सहायक हो सकता है।
मत्स्यासन और श्वसन तंत्र पर असर
इस आसन के अभ्यास से छाती पूरी तरह खुलती है, जिससे गहरी साँस लेने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है। गहरी साँस के ज़रिए शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है, रक्त अधिक शुद्ध और सक्रिय होता है, और थकी हुई कोशिकाओं को नई ऊर्जा मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगती है, भारीपन और सुस्ती की अनुभूति क्रमशः कम होने लगती है।
रीढ़ और तंत्रिका तंत्र को राहत
मत्स्यासन रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर खिंचाव देता है, जिससे नसों पर पड़ा दबाव घटता है। रीढ़ के आसपास का तंत्रिका तंत्र शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। जब यह क्षेत्र शिथिल होता है, तो मस्तिष्क को भी राहत मिलती है और मानसिक थकान में कमी आती है।
पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम और तनाव में कमी
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मत्स्यासन शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है — यही तंत्र शरीर को विश्राम की अवस्था में ले जाता है। इसके सक्रिय होने पर हृदय गति सामान्य होती है और तनाव का स्तर घटता है। यह आसन चिंता और मानसिक दबाव को कम करने में भी सहायक माना जाता है, जिससे व्यक्ति अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
पाचन और रक्त संचार पर प्रभाव
यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे भोजन का उचित पाचन होता है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है। पर्याप्त पोषण मिलने से कमज़ोरी और सुस्ती स्वाभाविक रूप से कम होती है। इसके अतिरिक्त, यह रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को सुधारता है, जिससे शरीर के प्रत्येक अंग तक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है।
नींद की गुणवत्ता में सुधार
मत्स्यासन के निरंतर अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जाता है। जब मन शांत होता है और तनाव घटता है, तो शरीर गहरी नींद ले पाता है — और गहरी नींद ही थकान से उबरने का सबसे प्राकृतिक माध्यम है। आयुष मंत्रालय की सलाह है कि इस आसन को रोज़ाना नियमित रूप से करने पर ही इसके पूरे लाभ मिलते हैं।