पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए MDNIY के 10 योगासन, गैस-कब्ज से मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) ने गैस, कब्ज, अपच और एसिडिटी जैसी पेट की आम समस्याओं से राहत दिलाने के लिए 10 योगासनों की सूची जारी की है, जिन्हें नियमित रूप से करने पर पाचन तंत्र को स्वाभाविक रूप से दुरुस्त रखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत खान-पान, बैठे रहने की आदत, तनाव और नींद की कमी — ये सभी मिलकर पाचन से जुड़ी परेशानियों को बढ़ावा देते हैं, और ऐसे में दवाओं से अधिक प्रभावी विकल्प के रूप में योग सामने आता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम और ताड़ासन
नाड़ी शोधन प्राणायाम — जिसे अनुलोम-विलोम भी कहते हैं — में नाक के दोनों छिद्रों से बारी-बारी सांस ली और छोड़ी जाती है। यह शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है और तनाव घटाता है, जिससे पाचन हार्मोन सही ढंग से काम करते हैं और गैस-अपच की परेशानी कम होती है।
ताड़ासन में सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाते हुए शरीर को ऊपर की ओर खींचा जाता है। यह आंतों को रिलेक्स करता है और उनमें फंसी गैस बाहर निकालने में सहायक है। सुबह खाली पेट करने पर पूरा पाचन तंत्र सक्रिय हो जाता है।
त्रिकोणासन और कपालभाति
त्रिकोणासन में दोनों पैरों के बीच दूरी बनाकर एक तरफ झुककर हाथ से पैर को छूने की कोशिश की जाती है। यह लिवर और अग्न्याशय को सक्रिय करता है, जिससे पाचक रस अधिक बनते हैं और भोजन जल्दी पचता है।
कपालभाति में पेट की मांसपेशियों को अंदर खींचते हुए तेज गति से सांस बाहर छोड़ी जाती है। यह मेटाबॉलिज्म तेज करता है और कब्ज दूर करने में कारगर है। हालाँकि, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, हर्निया या पेट के अल्सर से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
वज्रासन और पवनमुक्तासन
वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है जिसे भोजन के तुरंत बाद किया जा सकता है। इसमें घुटने मोड़कर एड़ियों पर बैठते हुए रीढ़ सीधी रखी जाती है। इससे पैरों में रक्त प्रवाह कम होकर पेट की ओर बढ़ता है, जिससे भोजन शीघ्र पचता है और एसिडिटी नहीं बनती।
पवनमुक्तासन में घुटनों को पेट से लगाने पर आंतों पर दबाव पड़ता है और रुकी हुई गैस बाहर निकलती है। जिन लोगों को अत्यधिक गैस बनती है, उनके लिए MDNIY इसे सर्वाधिक उपयुक्त आसन मानता है।
उष्ट्रासन, भुजंगासन और मंडूकासन
उष्ट्रासन (कैमल पोज) में घुटनों के बल बैठकर शरीर पीछे की ओर मोड़कर एड़ियाँ पकड़ी जाती हैं। इससे पेट के समस्त अंगों में रक्त संचार बढ़ता है, अपच और भारीपन कम होता है तथा भूख बढ़ती है।
भुजंगासन (कोबरा पोज) में पेट ज़मीन पर रखते हुए छाती ऊपर उठाई जाती है। यह कब्ज दूर करने और भोजन को आंतों में आगे बढ़ाने में प्रभावी है।
मंडूकासन में वज्रासन की मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों की मुट्ठी नाभि के पास रखी जाती है और सांस छोड़ते हुए शरीर आगे झुकाया जाता है। यह गैस, अपच और कब्ज में राहत देता है। कमर दर्द या पेट की सर्जरी के बाद इसे डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
शशांकासन और सावधानियाँ
शशांकासन में वज्रासन से आगे झुककर माथा ज़मीन पर टिकाया जाता है। यह आंतों में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, तनाव और एसिडिटी घटाता है तथा पूरे पाचन तंत्र को शांत रखता है।
MDNIY के अनुसार, इन आसनों को नियमित और सही तकनीक से करने पर सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।