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मिशन पोषण 2.0 पर एनसीडब्ल्यू प्रमुख विजया रहाटकर ने जताया समर्थन, महिला सुरक्षा के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना भी साझा की

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मिशन पोषण 2.0 पर एनसीडब्ल्यू प्रमुख विजया रहाटकर ने जताया समर्थन, महिला सुरक्षा के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना भी साझा की

सारांश

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मिशन पोषण 2.0 को बच्चों और माताओं के सशक्त भविष्य की नींव बताया। साथ ही पुणे में अधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला सुरक्षा, FIR की समय-सीमा और जेंडर समीक्षा बैठकों पर केंद्रित 10 सूत्रीय कार्य योजना साझा की।

मुख्य बातें

एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 26 जुलाई को एक्स पर मिशन पोषण 2.0 को 'पोषित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया।
मिशन का लक्ष्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
पोषण अभियान के आठ वर्ष पूरे होने पर मंत्रालय ने तकनीक-आधारित प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया।
रहाटकर ने महाराष्ट्र के पुणे में जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के लिए आयोजित नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी साझा की।
समापन सत्र में अधिकारियों को महिला सुरक्षा के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना पर ध्यान देने को कहा गया, जिसमें तिमाही जेंडर समीक्षा बैठकें और FIR की तय समय-सीमा शामिल हैं।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने रविवार, 26 जुलाई को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) के प्रमुख राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम मिशन पोषण 2.0 के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मंत्रालय की एक पोस्ट को पुनः साझा करते हुए इस मिशन को 'पोषित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया।

मिशन पोषण 2.0 की मुख्य विशेषताएँ

रहाटकर द्वारा साझा किए गए संदेश में कहा गया, 'मिशन पोषण 2.0 एक पोषित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं से जोड़कर यह मिशन एक सशक्त भविष्य की नींव रख रहा है।'

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बताया कि पोषण अभियान के आठ वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह मिशन समन्वय, तकनीक-आधारित प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी पर बढ़ते जोर को दर्शाता है। मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम का विकास विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास, बेहतर सेवा वितरण और व्यवहार परिवर्तन की अनिवार्यता को उजागर करता है।

सेवा वितरण और बाल विकास पर ज़ोर

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, शुरुआती बचपन की देखभाल को सुदृढ़ करने और अंतिम छोर तक सेवाएँ पहुँचाने वाली व्यवस्थाओं को मज़बूत करने पर निरंतर ध्यान दिया जा रहा है। पोषण को स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जोड़कर यह मिशन कमज़ोर वर्गों के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है।

मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि बेहतर पोषण से स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और उत्पादकता में सुधार होता है और यह देश के मानव संसाधन विकास से सीधे जुड़ा है। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए पोषण, बाल विकास और सेवा वितरण में निरंतर निवेश एक स्वस्थ और सक्षम आबादी तैयार करने के लिए अनिवार्य बताया गया।

पुणे में नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

रहाटकर ने महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी भी एक्स पर साझा की। उन्होंने शनिवार को लिखा, 'जिला मजिस्ट्रेटों और जिला पुलिस अधीक्षकों के लिए 'चेंज के लिए उत्प्रेरक' के तहत आयोजित नेतृत्व विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।'

समापन सत्र में अधिकारियों को महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

महिला सुरक्षा के लिए 10 सूत्रीय कार्य योजना

रहाटकर द्वारा साझा की गई कार्य योजना में शामिल प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं — महिला कल्याण योजनाओं का नियमित ऑडिट और प्रभावी क्रियान्वयन; सभी योजनाओं की डिजिटल निगरानी और समय पर समीक्षा; सुरक्षा अधिकारी, बाल विवाह निषेध अधिकारी और POSH स्थानीय समिति सहित सभी रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियाँ।

कार्य योजना में यह भी कहा गया कि वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, DLSA, AHTU और महिलाओं के विरुद्ध अपराध (CAW) सेल के बीच मज़बूत समन्वय स्थापित किया जाए। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में हर तिमाही जेंडर समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए और महिलाओं की शिकायतों के त्वरित व पारदर्शी समाधान की व्यवस्था विकसित की जाए।

इसके अतिरिक्त, महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में FIR, जाँच और चार्जशीट तय समय-सीमा में पूरी करने, पुलिस व संबंधित अधिकारियों के लिए नियमित जेंडर संवेदनशीलता प्रशिक्षण, NGO, ASHA कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सेवाओं के साथ प्रभावी समन्वय, तथा महिलाओं की सुरक्षा और हेल्पलाइन सेवाओं को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर महिला सुरक्षा और पोषण सुधार दोनों नीतिगत प्राथमिकताओं में हैं। एनसीडब्ल्यू की यह सक्रियता ज़िला-स्तरीय प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़िला-स्तरीय क्रियान्वयन की होगी — जहाँ आँकड़े अक्सर लक्ष्यों से पिछड़ते रहे हैं। पुणे का प्रशिक्षण कार्यक्रम एक सकारात्मक पहल है, परंतु 10 सूत्रीय कार्य योजना की निगरानी और जवाबदेही का कोई स्वतंत्र तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में FIR की समय-सीमा और जेंडर समीक्षा बैठकों जैसे प्रावधान पहले भी नीतियों में रहे हैं — इन्हें ज़मीन पर उतारने के लिए निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संसाधन दोनों चाहिए।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन पोषण 2.0 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
मिशन पोषण 2.0 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का प्रमुख राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल सेवाओं से जोड़ना है। यह मिशन तकनीक-आधारित प्रशासन, सामुदायिक भागीदारी और क्षेत्रों के बीच समन्वय पर केंद्रित है।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मिशन पोषण 2.0 पर क्या कहा?
विजया रहाटकर ने एक्स पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पोस्ट साझा करते हुए मिशन पोषण 2.0 को 'पोषित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन कमज़ोर वर्गों के लिए एक सशक्त भविष्य की नींव रख रहा है।
पुणे में आयोजित नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम किसके लिए था?
यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में जिला मजिस्ट्रेटों और जिला पुलिस अधीक्षकों के लिए 'चेंज के लिए उत्प्रेरक' पहल के तहत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य अधिकारियों को महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए बेहतर नेतृत्व हेतु तैयार करना था।
महिला सुरक्षा के लिए साझा की गई 10 सूत्रीय कार्य योजना में क्या शामिल है?
कार्य योजना में महिला कल्याण योजनाओं का नियमित ऑडिट, डिजिटल निगरानी, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियाँ, वन स्टॉप सेंटर और CAW सेल के बीच समन्वय, तिमाही जेंडर समीक्षा बैठकें, FIR व चार्जशीट की समय-सीमा, जेंडर संवेदनशीलता प्रशिक्षण और जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।
2047 के विकसित भारत लक्ष्य में पोषण की क्या भूमिका बताई गई है?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, बेहतर पोषण से स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और उत्पादकता में सुधार होता है, जो मानव संसाधन विकास के लिए अनिवार्य है। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए पोषण और बाल विकास में निरंतर निवेश ज़रूरी बताया गया है।
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