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नमो स्वच्छता अभियान: अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल से 79 किलो कचरा हटाया, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड

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नमो स्वच्छता अभियान: अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल से 79 किलो कचरा हटाया, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड

सारांश

गुजरात के नमो स्वच्छता अभियान के तहत अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल ने 79 किलो कचरा हटाया, 159 पुराने उपकरण स्क्रैप किए और 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड किए। RMO डॉ. हेमांगिनी पटेल के अनुसार, यह सालभर चलने वाली सतत प्रक्रिया है जिसका लक्ष्य अस्पताल-जनित संक्रमण को कम करना है।

मुख्य बातें

सोला सिविल अस्पताल, अहमदाबाद ने नमो स्वच्छता अभियान के तहत 79 किलो ठोस कचरा विभिन्न विभागों से हटाया।
159 अनुपयोगी मेडिकल उपकरणों और 1,365 खराब वस्तुओं को स्क्रैप करने की प्रक्रिया शुरू।
508 फायर एक्सटिंग्विशर की सर्विसिंग, 56 नलों की मरम्मत और 103 उपकरणों को पुनः उपयोग के लिए तैयार किया गया।
सभी कर्मियों को बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान हेतु कलर-कोडेड प्रणाली की विशेष ट्रेनिंग दी गई।
लगभग 300 पुरानी बेडशीट, तकिए के कवर और गद्दे चरणबद्ध रूप से बदले जा रहे हैं।
हेमांगिनी पटेल ने इसे एकबारगी नहीं, बल्कि वर्षभर चलने वाली सतत प्रक्रिया बताया।

गुजरात सरकार के नमो स्वच्छता अभियान के तहत अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल ने 5 जुलाई 2026 तक विभिन्न विभागों से 79 किलो ठोस कचरा हटाया, 159 अनुपयोगी मेडिकल उपकरणों को स्क्रैप करने की प्रक्रिया शुरू की और 508 फायर एक्सटिंग्विशर की सर्विसिंग पूरी की। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस पहल का मूल उद्देश्य नोसोकोमियल (अस्पताल-जनित) संक्रमण को कम करना और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

अभियान का दायरा और मुख्य कार्य

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, 79 किलो ठोस कचरे के अलावा 1,365 खराब वस्तुओं को भी चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया आरंभ की गई है। इनडोर-आउटडोर क्षेत्र, परिसर और शौचालयों सहित पूरे अस्पताल की गहन सफाई और कीटाणुशोधन किया जा रहा है। फर्श, दीवारें, खिड़कियाँ, ग्लास पैनल और सीलिंग फैन की नियमित सफाई के साथ-साथ टूटी टाइलों की मरम्मत जैसे सिविल कार्य भी शामिल हैं।

बुनियादी ढाँचे के मोर्चे पर, जाँचे गए 319 नलों में से 56 की मरम्मत या प्रतिस्थापन किया गया। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 63 बल्ब और 22 सीलिंग फैन ठीक किए गए। अस्पताल के 575 फर्नीचर, मेडिकल और आईटी उपकरणों में से 103 की मरम्मत कर उन्हें पुनः उपयोग के लिए तैयार किया गया।

संक्रमण नियंत्रण पर विशेष ध्यान

रेसिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. हेमांगिनी पटेल ने बताया कि अस्पताल-जनित संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम करने के लिए सफाई, कीटाणुशोधन और अनावश्यक सामग्री हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। उन्होंने कहा, 'मरीजों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ माहौल बनाने के लिए पूरे अस्पताल में लगातार निगरानी रखी जा रही है।'

सभी मेडिकल और पैरामेडिकल कर्मियों को कलर-कोडेड पृथक्करण प्रणाली के माध्यम से बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। लगभग 300 पुरानी बेडशीट, तकिए के कवर और गद्दों को चरणबद्ध रूप से बदलने का काम भी शुरू हो चुका है।

सफाई कर्मचारी रमीला मकवाना, जो कोविड-19 महामारी के समय से अस्पताल में सेवारत हैं, ने बताया कि मरीजों के बिस्तर, लॉकर, वेंटिलेटर और मॉनिटर जैसे संवेदनशील उपकरणों को प्रतिदिन अच्छी तरह साफ और कीटाणुमुक्त किया जाता है। उन्होंने बताया, 'जरूरत पड़ने पर मरीजों की चादर दिन में दो बार तक बदली जाती है।'

मरीज परिजनों की प्रतिक्रिया

सानंद निवासी प्रकाश कुमार मेनिया ने बताया कि डॉक्टरों, सफाई कर्मचारियों और अन्य स्टाफ ने तत्परता और सहयोग के साथ सेवा दी। उन्होंने आगंतुकों से अस्पताल परिसर की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील भी की।

बोडकदेव की अमी पटेल ने कहा कि सोला सिविल अस्पताल का अनुभव सरकारी अस्पतालों को लेकर उनकी पूर्व धारणा बदलने वाला रहा। उनके शब्दों में, 'लगातार सफाई, साफ पेयजल और व्यवस्थित माहौल के कारण यह अस्पताल किसी कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं लगता।'

आगे की राह

डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि यह अभियान एकबारगी नहीं, बल्कि वर्षभर चलने वाली सतत प्रक्रिया है। अस्पताल प्रशासन संक्रमण नियंत्रण उपायों को और मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे को बनाए रखने तथा मरीजों और आगंतुकों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। यह पहल गुजरात के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में संस्थागत स्वच्छता मानकों को स्थायी रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ये बदलाव संस्थागत आदत बनते हैं या चुनावी चक्र से जुड़े अभियान तक सिमट जाते हैं। भारत के सरकारी अस्पतालों में नोसोकोमियल संक्रमण दर का कोई सार्वजनिक, एकीकृत डेटाबेस नहीं है, जिससे यह मापना कठिन है कि ऐसे अभियानों से संक्रमण दर वास्तव में घटती है या नहीं। स्वच्छता को 'सालभर की प्रक्रिया' कहना सही दिशा है, परंतु इसके लिए नियमित तृतीय-पक्ष ऑडिट और पारदर्शी परिणाम-रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नमो स्वच्छता अभियान क्या है?
नमो स्वच्छता अभियान गुजरात सरकार द्वारा राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में चलाया जा रहा स्वच्छता एवं संक्रमण-नियंत्रण अभियान है। इसका उद्देश्य गहन सफाई, कीटाणुशोधन और बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के माध्यम से अस्पताल-जनित संक्रमण को कम करना है।
सोला सिविल अस्पताल में इस अभियान के तहत क्या-क्या काम हुए?
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, 79 किलो ठोस कचरा हटाया गया, 159 अनुपयोगी मेडिकल उपकरण और 1,365 खराब वस्तुएँ स्क्रैप की गईं, 508 फायर एक्सटिंग्विशर सर्विस्ड किए गए, 56 नलों की मरम्मत हुई और 103 उपकरण पुनः उपयोग के लिए तैयार किए गए।
अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण के लिए क्या विशेष उपाय किए गए?
सभी मेडिकल और पैरामेडिकल कर्मियों को कलर-कोडेड प्रणाली के तहत बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान की ट्रेनिंग दी गई है। मरीजों के बिस्तर, वेंटिलेटर और मॉनिटर जैसे उपकरणों को प्रतिदिन कीटाणुमुक्त किया जाता है और जरूरत पड़ने पर चादर दिन में दो बार बदली जाती है।
क्या यह अभियान स्थायी है या एकबारगी?
RMO डॉ. हेमांगिनी पटेल के अनुसार, यह एकदिवसीय अभियान नहीं, बल्कि वर्षभर चलने वाली सतत प्रक्रिया है। प्रशासन संक्रमण नियंत्रण उपायों को निरंतर मजबूत करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
मरीज परिजनों ने अभियान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सानंद के प्रकाश कुमार मेनिया ने स्टाफ की तत्परता की सराहना की, जबकि बोडकदेव की अमी पटेल ने कहा कि अस्पताल की स्वच्छता और व्यवस्था ने सरकारी अस्पतालों को लेकर उनकी पूर्व धारणा पूरी तरह बदल दी।
राष्ट्र प्रेस
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