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सनबर्न क्यों होता है? अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को बचाने के असरदार उपाय

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सनबर्न क्यों होता है? अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को बचाने के असरदार उपाय

सारांश

गर्मियों में तेज धूप से त्वचा का जलना सिर्फ असुविधा नहीं — यह UV किरणों द्वारा कोशिकाओं को पहुँचाई गई वास्तविक क्षति है। बादलों में भी, पानी और रेत से परावर्तित होकर भी ये किरणें नुकसान करती हैं। सही सनस्क्रीन, कपड़े और समय का चुनाव इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

मुख्य बातें

सनबर्न का मुख्य कारण सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं के DNA को क्षतिग्रस्त करती हैं।
UV किरणें बादलों, पानी, बर्फ और रेत से परावर्तित होकर भी त्वचा को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
लंबे समय तक UV संपर्क से त्वचा कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
SPF 30+ सनस्क्रीन हर 3-4 घंटे में लगाना, और सुबह 10 से दोपहर 4 बजे के बीच धूप से बचना सबसे प्रभावी उपाय है।
सनबर्न होने पर ठंडे पानी और मॉइश्चराइज़र से राहत लें; अधिक जलन पर चिकित्सक से परामर्श करें।

सनबर्न — यानी तेज धूप से त्वचा का जलना, लाल होना और दर्द करना — गर्मियों की सबसे आम त्वचा समस्याओं में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मुख्य वजह सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं को सीधा नुकसान पहुँचाती हैं। 10 जून को जारी स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार, सही सावधानियाँ अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सूर्य की किरणें त्वचा को क्यों जलाती हैं

सूर्य का प्रकाश कई प्रकार की किरणों से मिलकर बना होता है। इन्फ्रारेड किरणें गर्मी देती हैं, विजिबल लाइट हमें दिखाई देती है, और अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें — जो आँखों से नज़र नहीं आतीं — सबसे अधिक ऊर्जावान और हानिकारक होती हैं।

जब UV किरणें त्वचा पर पड़ती हैं, तो वे त्वचा की कोशिकाओं के DNA को क्षतिग्रस्त कर देती हैं। इस क्षति के जवाब में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सूजन और दर्द की प्रतिक्रिया देती है, जो सनबर्न के रूप में सामने आती है — लालिमा, जलन और सूजन इसी प्रक्रिया के संकेत हैं।

UV किरणों की पहुँच कहाँ तक

विशेषज्ञों के अनुसार, UV किरणें केवल सीधी धूप में ही सक्रिय नहीं होतीं। ये पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट जैसी सतहों से परावर्तित होकर वापस लौट सकती हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बादल छाए होने पर भी ये किरणें आसानी से धरती तक पहुँच जाती हैं।

इसका अर्थ यह है कि छाते के नीचे बैठे रहने या흐린 मौसम में भी सनबर्न का खतरा बना रहता है। लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर तक का जोखिम बढ़ सकता है।

सनबर्न से बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय इस प्रकार हैं:

सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान UV किरणें सबसे तीव्र होती हैं। हल्के रंग के, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। चौड़ी किनारे वाली टोपी और सनग्लासेस का उपयोग करें।

SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले लगाएँ और हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ। पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना भी ज़रूरी है।

सनबर्न होने पर क्या करें

यदि सनबर्न हो जाए, तो प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडे पानी से ठंडा करें। मॉइश्चराइज़र लगाने से राहत मिल सकती है। जलन अधिक होने पर या फफोले पड़ने की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

गौरतलब है कि सूर्य का प्रकाश विटामिन D का एक प्रमुख प्राकृतिक स्रोत भी है, जो हड्डियों की मज़बूती के लिए आवश्यक है। इसलिए धूप से पूरी तरह दूरी नहीं, बल्कि संतुलित और सुरक्षित तरीके से धूप लेना ही सही रणनीति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यह UV-जनित DNA क्षति की एक दृश्यमान अभिव्यक्ति है — और त्वचा कैंसर की दिशा में पहला कदम भी हो सकती है। भारत में जहाँ गर्मियाँ लंबी और तीव्र होती हैं, वहाँ सनस्क्रीन की संस्कृति अभी भी शहरी मध्यवर्ग तक सीमित है। ग्रामीण और मैदानी इलाकों में खुले में काम करने वाली आबादी सबसे अधिक जोखिम में है, फिर भी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में UV सुरक्षा को लगभग अनदेखा किया जाता है। विटामिन D की ज़रूरत को ढाल बनाकर असुरक्षित धूप सेवन को उचित ठहराने की प्रवृत्ति भी चिंताजनक है — संतुलन और सुरक्षा दोनों साथ-साथ संभव हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सनबर्न क्या होता है और यह क्यों होता है?
सनबर्न तब होता है जब सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें त्वचा की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे शरीर सूजन और दर्द की प्रतिक्रिया देता है। यह लालिमा, जलन और सूजन के रूप में सामने आता है।
क्या बादल वाले दिन भी सनबर्न हो सकता है?
हाँ, बादल UV किरणों को पूरी तरह नहीं रोकते — ये किरणें बादलों के पार आसानी से पहुँच जाती हैं। इसके अलावा, पानी, रेत, बर्फ और कंक्रीट से परावर्तित होकर भी UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
सनबर्न से बचाव के लिए कौन-सा सनस्क्रीन सही है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन धूप में निकलने से पहले लगाएँ और हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ। पसीना या पानी के संपर्क में आने पर और जल्दी दोबारा लगाना ज़रूरी है।
सनबर्न होने पर तुरंत क्या करें?
प्रभावित जगह को ठंडे पानी से ठंडा करें और मॉइश्चराइज़र लगाएँ। यदि जलन अधिक हो, फफोले पड़ें या बुखार आए, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
UV किरणों से लंबे समय में क्या नुकसान हो सकता है?
लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ना (झुर्रियाँ, धब्बे) और आँखों की समस्याएँ भी हो सकती हैं। नियमित सुरक्षा उपाय इस जोखिम को काफी कम कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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