सनबर्न क्यों होता है? अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को बचाने के असरदार उपाय
सारांश
मुख्य बातें
सनबर्न — यानी तेज धूप से त्वचा का जलना, लाल होना और दर्द करना — गर्मियों की सबसे आम त्वचा समस्याओं में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मुख्य वजह सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें हैं, जो त्वचा की कोशिकाओं को सीधा नुकसान पहुँचाती हैं। 10 जून को जारी स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार, सही सावधानियाँ अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सूर्य की किरणें त्वचा को क्यों जलाती हैं
सूर्य का प्रकाश कई प्रकार की किरणों से मिलकर बना होता है। इन्फ्रारेड किरणें गर्मी देती हैं, विजिबल लाइट हमें दिखाई देती है, और अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें — जो आँखों से नज़र नहीं आतीं — सबसे अधिक ऊर्जावान और हानिकारक होती हैं।
जब UV किरणें त्वचा पर पड़ती हैं, तो वे त्वचा की कोशिकाओं के DNA को क्षतिग्रस्त कर देती हैं। इस क्षति के जवाब में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सूजन और दर्द की प्रतिक्रिया देती है, जो सनबर्न के रूप में सामने आती है — लालिमा, जलन और सूजन इसी प्रक्रिया के संकेत हैं।
UV किरणों की पहुँच कहाँ तक
विशेषज्ञों के अनुसार, UV किरणें केवल सीधी धूप में ही सक्रिय नहीं होतीं। ये पानी, बर्फ, रेत और कंक्रीट जैसी सतहों से परावर्तित होकर वापस लौट सकती हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बादल छाए होने पर भी ये किरणें आसानी से धरती तक पहुँच जाती हैं।
इसका अर्थ यह है कि छाते के नीचे बैठे रहने या흐린 मौसम में भी सनबर्न का खतरा बना रहता है। लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर तक का जोखिम बढ़ सकता है।
सनबर्न से बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय इस प्रकार हैं:
सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान UV किरणें सबसे तीव्र होती हैं। हल्के रंग के, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। चौड़ी किनारे वाली टोपी और सनग्लासेस का उपयोग करें।
SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले लगाएँ और हर 3-4 घंटे में दोबारा लगाएँ। पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखना भी ज़रूरी है।
सनबर्न होने पर क्या करें
यदि सनबर्न हो जाए, तो प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडे पानी से ठंडा करें। मॉइश्चराइज़र लगाने से राहत मिल सकती है। जलन अधिक होने पर या फफोले पड़ने की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
गौरतलब है कि सूर्य का प्रकाश विटामिन D का एक प्रमुख प्राकृतिक स्रोत भी है, जो हड्डियों की मज़बूती के लिए आवश्यक है। इसलिए धूप से पूरी तरह दूरी नहीं, बल्कि संतुलित और सुरक्षित तरीके से धूप लेना ही सही रणनीति है।