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गर्मी में घमौरियां और त्वचा रोग: NHM के अनुसार लक्षण पहचानें और करें सही बचाव

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गर्मी में घमौरियां और त्वचा रोग: NHM के अनुसार लक्षण पहचानें और करें सही बचाव

सारांश

भीषण गर्मी में घमौरियां सिर्फ असुविधा नहीं — समय पर ध्यान न दिया जाए तो गंभीर संक्रमण बन सकती हैं। NHM की सलाह है: ठंडी जगह रहें, सूती कपड़े पहनें, बिना डॉक्टरी सलाह क्रीम न लगाएं। बच्चे और मोटापाग्रस्त लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।

मुख्य बातें

NHM के अनुसार गर्मी में पसीना बंद रोमछिद्रों में फंसने से घमौरियां (प्रिकली हीट) होती हैं।
सबसे अधिक जोखिम बच्चों , मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों और अत्यधिक पसीना आने वाले लोगों को है।
प्रमुख लक्षण: लाल दाने, तेज़ खुजली, चुभन और कभी-कभी हल्का बुखार ।
बचाव: ठंडी जगह रहें , सूती-ढीले कपड़े पहनें, दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं।
बिना डॉक्टरी सलाह के प्रभावित त्वचा पर क्रीम या मलहम न लगाएं ।
दाने बढ़ने, तेज़ बुखार या संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें ।

नई दिल्ली में 1 जून 2026 को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भीषण गर्मी के इस मौसम में घमौरियां और अन्य त्वचा संबंधी बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अनुसार, बढ़ते तापमान और उमस भरी हवाओं के कारण त्वचा की छोटी-छोटी समस्याएं यदि समय पर नज़रअंदाज़ की जाएं तो गंभीर रूप ले सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तत्काल सावधानी बरतना ज़रूरी है।

घमौरियां क्यों होती हैं

NHM के अनुसार, जब अत्यधिक पसीना त्वचा की सिलवटों या बंद रोमछिद्रों में फंस जाता है, तो त्वचा में सूजन और जलन उत्पन्न होती है — इसे आम भाषा में घमौरियां या प्रिकली हीट कहते हैं। यह समस्या विशेष रूप से बच्चों, मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों और जिन्हें अत्यधिक पसीना आता है, उनमें अधिक देखी जाती है। यह ऐसे समय में और गंभीर हो जाती है जब दिन का तापमान लगातार ऊंचा बना रहता है।

मुख्य लक्षण जो पहचानने ज़रूरी हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, घमौरियों के प्रमुख लक्षणों में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने या फुंसियां निकलना, तेज़ खुजली और चुभन जैसी अनुभूति शामिल हैं। यह समस्या मुख्यतः गर्दन, छाती, कमर, कांख और त्वचा की सिलवटों वाले हिस्सों में होती है। कुछ मामलों में हल्का बुखार या जलन भी हो सकती है, जो संक्रमण की ओर संकेत कर सकती है।

बचाव के आसान उपाय

NHM ने गर्मी में त्वचा की देखभाल के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, ठंडी और कम नमी वाली जगह पर रहें — जहाँ पंखा या कूलर चल रहा हो। प्रभावित त्वचा को साफ और सूखा रखें और नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। सादे टैल्कम पाउडर का उपयोग राहत दे सकता है, लेकिन तेज़ खुशबू या रासायनिक तत्वों वाले उत्पादों से बचें।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि प्रभावित जगह पर बिना डॉक्टरी सलाह के कोई क्रीम या मलहम न लगाएं, क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। इसके अलावा ढीले और सूती कपड़े पहनें जो हवा को आने-जाने दें, और बाहर निकलते समय छाता या स्कार्फ का उपयोग करें।

विशेषज्ञों की सावधानियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा देर धूप में न रहें और दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। अत्यधिक तेल-मसाले वाले या भारी भोजन से परहेज़ करें, क्योंकि यह शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है। बच्चों की त्वचा पर विशेष निगरानी रखें, क्योंकि उनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है।

डॉक्टर से कब मिलें

यदि दाने तेज़ी से बढ़ने लगें, तेज़ बुखार आए या संक्रमण के लक्षण — जैसे मवाद, सूजन या असहनीय दर्द — दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी का यह मौसम त्वचा के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन समय पर सावधानी और सही देखभाल से अधिकांश समस्याओं से बचा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में प्राथमिक स्तर पर त्वचा रोग प्रबंधन अब भी कमज़ोर कड़ी है। NHM की सलाह व्यावहारिक है, परंतु ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ कूलर-पंखे की पहुंच सीमित है, वहाँ ये उपाय अपर्याप्त साबित होते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी का मौसम लंबा और तीव्र होता जा रहा है, ऐसे में त्वचा रोगों को मौसमी असुविधा मानकर नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं — इन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंडे में स्थायी स्थान मिलना चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्मी में घमौरियां क्यों होती हैं?
NHM के अनुसार, जब अत्यधिक पसीना त्वचा की सिलवटों या बंद रोमछिद्रों में फंस जाता है, तो सूजन और जलन होती है जिसे घमौरियां या प्रिकली हीट कहते हैं। यह समस्या बच्चों, मोटापाग्रस्त व्यक्तियों और अधिक पसीना आने वाले लोगों में अधिक होती है।
घमौरियों के मुख्य लक्षण क्या हैं?
घमौरियों में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने या फुंसियां निकलती हैं, तेज़ खुजली और चुभन होती है। यह समस्या मुख्यतः गर्दन, छाती, कमर और कांख में होती है, और कभी-कभी हल्का बुखार भी आ सकता है।
गर्मी में त्वचा की देखभाल के लिए क्या करें?
NHM की सलाह है कि ठंडी और कम नमी वाली जगह पर रहें, ढीले सूती कपड़े पहनें और त्वचा को साफ-सूखा रखें। दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं और बिना डॉक्टरी सलाह के प्रभावित जगह पर क्रीम या मलहम न लगाएं।
घमौरियों में डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
यदि दाने तेज़ी से बढ़ें, तेज़ बुखार आए, या मवाद, असहनीय दर्द जैसे संक्रमण के लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना स्थिति को गंभीर बना सकता है।
क्या बच्चों को गर्मी में त्वचा रोगों का अधिक खतरा है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की त्वचा अधिक संवेदनशील होती है और उन्हें घमौरियों का खतरा अधिक रहता है। बच्चों को धूप से बचाएं, हल्के सूती कपड़े पहनाएं और उनकी त्वचा पर नियमित नज़र रखें।
राष्ट्र प्रेस
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