तेलंगाना में खाद्य-औषधि विभागों का विलय: 'टीजी सेफ' बनी नई एकीकृत नियामक संस्था
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार ने 16 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग और औषधि नियंत्रण विभाग को एकीकृत कर टीजी सेफ (TG SAFE) — अर्थात् तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स — की स्थापना की है। स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के तहत यह नई संस्था राज्य में खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता निगरानी को एक ही छत के नीचे संचालित करेगी।
टीजी सेफ: क्या है नई व्यवस्था
सरकारी आदेश के अनुसार, एकीकृत प्रशासन 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' तथा 'दवा और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940' के तहत अपनी कानूनी शक्तियाँ बरकरार रखेगा। दोनों विभागों के संबंधित कानूनी अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने कानूनों के अंतर्गत स्वतंत्र रूप से अधिकारों का प्रयोग करते रहेंगे — अर्थात् विलय प्रशासनिक है, कानूनी ढाँचा यथावत रहेगा।
नई संस्था के अंतर्गत दवा प्रशासन, खाद्य सुरक्षा, प्रवर्तन, कानूनी एवं अभियोजन, प्रयोगशाला तथा प्रशासनिक विंग एकसाथ काम करेंगे।
नेतृत्व: कौन संभालेंगे टीजी सेफ की कमान
तेलंगाना में औषधि नियंत्रण प्रशासन के महानिदेशक के पद पर तैनात रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अविनाश मोहंती को टीजी सेफ का आयुक्त नियुक्त किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस नियुक्ति के लिए अलग से आदेश जारी किया है।
विलय की ज़रूरत क्यों पड़ी
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तेलंगाना में लाइसेंस प्राप्त खाद्य व्यापार प्रतिष्ठानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। असुरक्षित, नकली और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों तथा दवाओं पर अंकुश लगाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अनुपालन एवं प्रवर्तन को और सशक्त बनाना ज़रूरी हो गया था।
आदेश में कहा गया है, "खाद्य सुरक्षा विभाग और दवा नियंत्रण विभाग के सार्वजनिक स्वास्थ्य, उपभोक्ता सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और प्रभावी नियामक प्रवर्तन से संबंधित साझा उद्देश्य हैं। निगरानी, खुफिया जानकारी, प्रवर्तन, कानूनी सहायता और नियामक परिणामों में सुधार के लिए एक एकीकृत प्रशासनिक ढाँचे की आवश्यकता है।"
गौरतलब है कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त के अधीन काम करने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग और 1981 से स्वतंत्र रूप से संचालित दवा नियंत्रण विभाग — दोनों लाइसेंसिंग, निरीक्षण, नमूनाकरण, परीक्षण और प्रवर्तन के ज़रिये खाद्य पदार्थ, दवाएँ और प्रसाधन सामग्री को विनियमित करते आए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई अन्य राज्य इसी मॉडल को पहले ही अपना चुके हैं।
आगे की राह: राज्य-स्तरीय समीक्षा समिति
दोनों अधिनियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक राज्य-स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति का दायित्व होगा — प्रणाली का आधुनिकीकरण, सेवा नियमों में एकरूपता, सही कैडर संख्या का निर्धारण, इंटेलिजेंस और डेटा-विश्लेषण प्रणाली का निर्माण, तथा फील्ड यूनिट और प्रयोगशाला सेवाओं के लिए बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण। लक्ष्य है — राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप एक तकनीक-आधारित नियामक ढाँचा तैयार करना।
इस एकीकरण के साथ तेलंगाना उन अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो खाद्य और औषधि नियमन को एकसाथ संचालित करते हैं — और यह कदम राज्य की नियामक क्षमता को दीर्घकालिक रूप से मज़बूत करने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।