महिलाओं की नींद में ‘जेंडर गैप’: जानिए क्यों हैं कम घंटे

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महिलाओं की नींद में ‘जेंडर गैप’: जानिए क्यों हैं कम घंटे

सारांश

क्या आपने कभी सोचा है कि महिलाएं सोने में पुरुषों से पीछे क्यों हैं? शोध बताते हैं कि यह केवल नींद की मात्रा का अंतर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी है। जानें इस जेंडर गैप के पीछे के कारण।

मुख्य बातें

जेंडर गैप महिलाओं और पुरुषों की नींद में स्पष्ट अंतर है।
मातृत्व का नींद पर गहरा प्रभाव होता है।
महिलाएं अक्सर गहरी नींद से वंचित रहती हैं।
हार्मोनल बदलाव नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं।
नींद की कमी से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विश्वभर में किए गए विभिन्न शोधों ने एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प तथ्य को उजागर किया है कि महिलाओं और पुरुषों की नींद में एक स्पष्ट अंतर है, जिसे "जेंडर स्लीप गैप" के नाम से जाना जाता है। यह केवल नींद की मात्रा का अंतर नहीं है, बल्कि इसकी गुणवत्ता और उससे जुड़ी मानसिक प्रभावों का भी मामला है।

एक अध्ययन, जो 2017 में किया गया, के अनुसार, 45 वर्ष से कम उम्र की केवल 48 प्रतिशत माताएं प्रतिदिन कम से कम 7 घंटे की नींद ले पाती हैं, जबकि बिना बच्चों वाली 62 प्रतिशत महिलाएं इतनी नींद प्राप्त करती हैं। यह स्पष्ट करता है कि मातृत्व का महिलाओं की नींद पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

इसी प्रकार, 2025 में 'स्लीप साइकल' की एक वैश्विक रिपोर्ट में पाया गया कि 57 प्रतिशत महिलाएं औसतन सामान्य मूड में जागती हैं, जो पुरुषों की तुलना में लगभग तीन अंक कम है। यह अंतर भले ही छोटा हो, लेकिन यह लगातार नींद की कमी और उसकी खराब गुणवत्ता की ओर संकेत करता है।

महिलाओं की नींद अक्सर बार-बार बाधित होती है और उन्हें गहरी नींद कम मिलती है, जिससे उनके शरीर और मस्तिष्क को पूरा आराम नहीं मिलता। इसके पीछे एक बड़ा कारण जीवन के विभिन्न चरणों में होने वाले हार्मोनल बदलाव हैं, जैसे मासिक धर्म, गर्भावस्था और मेनोपॉज, जो नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, सामाजिक कारण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। परिवार और बच्चों की देखभाल, घर और कार्य के बीच संतुलन बनाना, और लगातार मानसिक दबाव महिलाओं की नींद को और कमजोर बना देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाएं दिनभर अधिक मल्टीटास्किंग और भावनात्मक प्रोसेसिंग करती हैं, जिसके कारण उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन जब यह आवश्यकता पूरी नहीं होती, तो इसका प्रभाव उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

लगातार नींद की कमी से महिलाओं में थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव, हार्मोनल असंतुलन और हृदय तथा मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, "जेंडर स्लीप गैप" को समझना और इसे कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य की नींव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समग्र जीवन गुणवत्ता का भी है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम क्यों सोती हैं?
महिलाओं की नींद में कमी का मुख्य कारण मातृत्व, हार्मोनल बदलाव और मानसिक दबाव है।
जेंडर स्लीप गैप क्या है?
यह महिलाओं और पुरुषों की नींद में मात्रा और गुणवत्ता का अंतर है।
नींद की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं?
थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव, और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
महिलाओं की नींद की गुणवत्ता कैसे बेहतर की जा सकती है?
परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर और तनाव को प्रबंधित करके नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
क्या सामाजिक कारण भी नींद को प्रभावित करते हैं?
हां, परिवार की देखभाल और काम का तनाव महिलाओं की नींद को कमजोर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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