क्या वर्क प्रेशर और बढ़ते स्क्रीन टाइम से थक गए हैं? महामुद्रा का अभ्यास करें और अपने शरीर को रिचार्ज करें
सारांश
Key Takeaways
- महामुद्रा तनाव और थकान को कम करने में सहायक है।
- यह स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करती है।
- अभ्यास से अपान वायु का नियंत्रण होता है।
- सुखासन या पद्मासन में बैठकर किया जा सकता है।
- व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सलाह लें।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की जीवनशैली में बढ़ते कार्यभार, लंबे समय तक स्क्रीन पर बिताए गए समय और अनियमित दिनचर्या के कारण मानसिक दबाव और शारीरिक थकान एक आम समस्या बन गई है। इस स्थिति में प्राचीन योग पद्धति महामुद्रा एक प्रभावी उपाय के रूप में उभरती है, जो न केवल शरीर को सशक्त बनाती है, बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाने में सहायक होती है।
योग की शास्त्रों में महामुद्रा को 'अमृत का सोपान' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि यह अभ्यास शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर नई ऊर्जा से भर देता है। 'महामुद्रा' एक संस्कृत शब्द है जिसमें 'महा' का अर्थ है महान और 'मुद्रा' का अर्थ है वह स्थिति जो आनंद देती है।
आयुष मंत्रालय और योगिक परंपराओं के अनुसार, महामुद्रा एक उन्नत हठयोग अभ्यास है, जो मानसिक शांति, शारीरिक ऊर्जा के संतुलन और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यधिक प्रभावशाली मानी जाती है। यह तनाव कम करने और रक्त संचार को सुधारने में सहायक होती है।
यह मुद्रा स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करती है, जिससे शरीर और मन की थकान दूर होती है। इसके अभ्यास से अपान वायु (पांच मुख्य प्राणों में से एक, जो नाभि के नीचे 'पेल्विक क्षेत्र' में स्थित होती है) नियंत्रण में रहती है, जिससे शरीर में सुप्त कुंडलिनी जागृत होती है।
इसे करना बहुत आसान है, हालाँकि शुरुआती साधकों के लिए यह थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन नियमित अभ्यास से शरीर को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में आराम से बैठें। अब दोनों पैरों को आगे की ओर फैलाएं। दाएँ पैर को मोड़कर एड़ी को पेरिनियम (गुदा और जननेंद्रिय के बीच) के पास रखें। बाएँ पैर को सीधा रखें। गहरी सांस लें और सांस रोककर (कुंभक) आगे झुकें।
दोनों हाथों से बाएँ पैर के अंगूठे को पकड़ें। सिर को घुटने की ओर लाएँ। मूलबंध (पेल्विक फ्लोर को सिकोड़ना) और जालंधर बंध (ठोड़ी को छाती से लगाना) लगाएं। कुछ सेकंड के लिए रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौटें। दूसरे पैर से भी इसी तरह करें। शुरुआत में ३-५ बार करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं।
यदि आपकी पीठ या रीढ़ में समस्या है, तो इस आसन को करने से पहले डॉक्टर या योग गुरु से सलाह लें। गर्भवती महिलाएं और उच्च रक्तचाप वाले लोग बिना विशेषज्ञ के परामर्श के न करें।