12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली से तेहरान रवाना
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने के बाद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल 28 अक्टूबर 2026 को स्वदेश लौट गया। लोकसभा सदस्य प्रवीण खंडेलवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विदाई दी। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें साझा करते हुए इसकी पुष्टि की।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के प्रेसिडियम सदस्य डॉ. अहमद नादेरी ने किया। उनके साथ अब्बास मोग्तदाई खौरसगानी (भारत-ईरान संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख एवं राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष) और अली हदादी (भारत-ईरान संसदीय मैत्री समूह के प्रथम उपाध्यक्ष एवं उद्योग व खान समिति के प्रमुख) भी शामिल रहे।
गौरतलब है कि मूल रूप से ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इस सम्मेलन में भाग लेने वाले थे, किंतु 24 अक्टूबर को दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार 'अप्रत्याशित परिस्थितियों' के चलते वे नहीं आ सके और उनके स्थान पर यह प्रतिनिधिमंडल भेजा गया।
सम्मेलन की मुख्य उपलब्धियाँ
भारत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय 12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच, नई दिल्ली के संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन का समापन एक संयुक्त घोषणा-पत्र के अंगीकरण के साथ हुआ। इसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार, आतंकवाद पर कठोर रुख, डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और सतत विकास पर सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता सामने आई।
लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र में कहा, 'वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान युद्ध और संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग में निहित है।' उन्होंने आगे कहा कि दुनिया इस समय क्षेत्रीय संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर बहस तेज है और ब्रिक्स जैसे मंच ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने की कोशिश कर रहे हैं।
अध्यक्षता का हस्तांतरण
सम्मेलन के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स संसदीय मंच की अध्यक्षता औपचारिक रूप से चीन को सौंप दी। यह हस्तांतरण ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप में सदस्य देशों के बीच संसदीय कूटनीति को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-ईरान के बीच संसदीय मैत्री समूह की सक्रिय उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने के प्रयास में हैं।