15वाँ भूटान इकोस फेस्टिवल: 'इंसान होने की कला' थीम पर थिंपू में भव्य आयोजन, महारानी वांगचुक भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
थिंपू में 1 से 3 अगस्त 2026 तक आयोजित 15वें भूटान इकोस: ड्रुक्युल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल की शुरुआत भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक भव्य डिनर से हुई, जिसमें भूटान की महारानी आशी दोरजी वांगमो वांगचुक विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इस वर्ष उत्सव की थीम 'इंसान होने की कला' रखी गई, जो आज के तकनीकी युग में मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।
उद्घाटन डिनर और सांस्कृतिक प्रस्तुति
31 जुलाई को आयोजित उद्घाटन डिनर में दूतावास के कल्चरल सेंटर, NWCC थिंपू में भारतीय संस्कृति की शिक्षिका डॉ. सबा हाशमी और भूटानी संगीत समूह ड्रुक रिवाइवल ने समकालीन, शास्त्रीय और सूफी भारतीय संगीत की जुगलबंदी प्रस्तुत की। इस सांगीतिक संगम ने शाम को अविस्मरणीय बना दिया।
भारतीय दूतावास ने आयोजन की झलकियाँ सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिसमें रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। दूतावास के अनुसार, इस वर्ष की थीम यह अवसर देती है कि हम बदलाव भरे तकनीकी दौर में इंसान होने की अहमियत को गहराई से समझें।
महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम
रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ भूटान, थिंपू में आयोजित इस तीन-दिवसीय उत्सव में क्रिएटिव और एनालिटिकल टॉक्स, कृतियों का सम्मान और स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं की यादगार प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं। साहित्य, कला और विचार के इस संगम ने भारत-भूटान सांस्कृतिक सेतु को और मज़बूत किया।
पहले JSW पुरस्कार से सम्मानित हुए अश्विन सांघी
1 अगस्त को भारत के बेस्टसेलिंग लेखक अश्विन सांघी को इस उत्सव के पहले JSW पुरस्कार से नवाज़ा गया। 'द कृष्णा की' और 'द सेलकोट सागा' जैसी चर्चित कृतियों के लिए जाने जाने वाले सांघी का सबसे हालिया उपन्यास 'द अयोध्या अलायंस' 2025 में प्रकाशित हुआ था। यह पुरस्कार भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में 2025 में घोषित किया गया था।
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद सांघी ने कहा, 'महारानी के हाथों से यह सम्मान पाना, एक ऐसा पल है जिसे मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। किसी भी पुरस्कार को पाने वाला पहला व्यक्ति अपने आप में खास है। ये मुझे विनम्रता का पाठ पढ़ाता है। अच्छा ये है कि आप किसी लिस्ट में शामिल नहीं हो रहे हैं, आप उसे शुरू करने में मदद कर रहे हैं। मैं इस देश को बहुत प्यार करता हूँ और ये इन्हें समर्पित है।'
महोत्सव की पृष्ठभूमि
यह महोत्सव 2010 में 'माउंटेन इकोस' के नाम से शुरू हुआ था। कोविड-19 महामारी के बाद इसके स्वरूप में बदलाव आया और 2021-2022 से इसे आधिकारिक रूप से 'भूटान इकोस – ड्रुक्युल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल' के नाम से आयोजित किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह आयोजन भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।
15वें संस्करण के साथ यह उत्सव अब केवल एक साहित्यिक मंच नहीं, बल्कि द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बन गया है — और आने वाले वर्षों में इसके विस्तार की उम्मीद और प्रबल होती दिख रही है।