भारत-भूटान सीमा समन्वय: थिम्पू में संयुक्त तकनीकी बैठक, कार्य योजना को मिला अंतिम रूप
सारांश
मुख्य बातें
सर्वे ऑफ इंडिया और भूटान की रॉयल गवर्नमेंट के अंतर्गत इंटरनेशनल बाउंड्रीज यूनिट के बीच 19-20 अगस्त 2026 को थिम्पू में एक संयुक्त तकनीकी बैठक आयोजित की गई, जिसमें द्विपक्षीय सीमाओं के रखरखाव, समन्वय और उभरती प्रौद्योगिकी के उपयोग की समीक्षा की गई। बैठक के अंत में आगामी अवधि के लिए एक संयुक्त कार्य कार्यक्रम को भी अंतिम रूप दिया गया। भारतीय दूतावास ने 21 अगस्त 2026 को यह जानकारी साझा की।
बैठक में क्या हुआ
भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि बैठक में सीमा रखरखाव से जुड़े चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही, सीमा प्रबंधन में उभरती तकनीक के अनुप्रयोग पर भी विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक भूटान के राष्ट्रीय भूमि आयोग के तहत गठित इंटरनेशनल बाउंड्रीज यूनिट के साथ मिलकर आयोजित की गई थी।
भूटानी राजा की इंडिया हाउस यात्रा
इसी सप्ताह, भूटान के महामहिम राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक अपनी पत्नी महामहिम आशी देकी यांगजोम के साथ इंडिया हाउस पहुँचे, जहाँ भूटान इंडिया फ्रेंडशिप एसोसिएशन के थिम्पू, फुएंत्शोलिंग, समत्से, गेलेफू, नगांगलाम और समद्रुप जोंगखर चैप्टर के पदाधिकारियों से मुलाकात हुई। दूतावास ने कहा कि यह मुलाकात भारत-भूटान के बीच लोगों और समुदाय-स्तर के संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदेश सचिव मिस्री की यात्रा की पृष्ठभूमि
ये घटनाक्रम विदेश सचिव विक्रम मिस्री की पिछले महीने की भूटान यात्रा के बाद सामने आए हैं। उस यात्रा के दौरान मिस्री ने भूटान के प्रधानमंत्री दशो शेरिंग टोबगे से थिम्पू में मुलाकात की थी, जिसमें विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं पर चर्चा हुई थी। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भूटानी प्रधानमंत्री ने भारत के अटूट समर्थन के लिए सराहना व्यक्त की।
राजा वांगचुक का भारत के प्रति समर्थन
मिस्री की यात्रा के दौरान राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से भी भेंट हुई थी, जिसमें भूटानी राजा ने भारत के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने के अपने संकल्प को दोहराया। गौरतलब है कि भारत-भूटान संबंध अपनी विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं — दोनों देशों के बीच खुली सीमा, विशेष मित्रता संधि और भारत की भूटान के विकास में केंद्रीय भूमिका इस रिश्ते को दक्षिण एशिया में अनूठा बनाती है।
आगे क्या
संयुक्त कार्य कार्यक्रम के अंतिम रूप लेने के बाद अब दोनों देशों की तकनीकी टीमें सीमा रखरखाव के क्षेत्र में नई तकनीक के समन्वित उपयोग की दिशा में काम करेंगी। यह प्रक्रिया भारत-भूटान के व्यापक द्विपक्षीय ढाँचे को और मज़बूती देने की कड़ी के रूप में देखी जा रही है।