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नूरिस्तान खदान विस्फोट: एक मजदूर की मौत, दूसरा घायल — अफगानिस्तान में खनन सुरक्षा पर सवाल

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नूरिस्तान खदान विस्फोट: एक मजदूर की मौत, दूसरा घायल — अफगानिस्तान में खनन सुरक्षा पर सवाल

सारांश

अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत में एक और खदान हादसे ने देश के खनन क्षेत्र की बदहाली उजागर की है। बर्ग-ए-मतल के पेचीग्राम में विस्फोट से एक मजदूर की मौत और एक घायल — यह इस साल की कई ऐसी घटनाओं में से एक है जो सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की कहानी कहती है।

मुख्य बातें

नूरिस्तान प्रांत के बर्ग-ए-मतल जिले के पेचीग्राम इलाके में शनिवार को खदान विस्फोट में एक मजदूर की मौत , दूसरा घायल।
विस्फोट का कारण और खनिज का प्रकार अभी तक कथित तौर पर अज्ञात।
मार्च में समांगन की कोयला खदान में जहरीली गैस से दो मजदूरों की मौत हुई थी; पीड़ित बामियान और दाइकुंडी के थे।
फरवरी में नंगरहार में खदान ढहने से एक मौत; बदख्शां में कार्बन मोनोऑक्साइड से चार खनिकों की जान गई।
आधुनिक उपकरणों की कमी और नियामक निगरानी के अभाव को विशेषज्ञ इन हादसों की मूल वजह मानते हैं।

अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत के बर्ग-ए-मतल जिले के पेचीग्राम इलाके में स्थित एक खदान में शनिवार को हुए विस्फोट में एक मजदूर की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय मीडिया सूत्रों के अनुसार, उस समय दोनों मजदूर खनिज निकालने के लिए खदान के भीतर उतरे हुए थे। विस्फोट का सटीक कारण और खनिज का प्रकार अभी तक अधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।

हादसे का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, बर्ग-ए-मतल जिले के पेचीग्राम क्षेत्र में यह विस्फोट शनिवार को उस समय हुआ जब दो श्रमिक भूगर्भीय खनन कार्य में लगे थे। धमाके की वजह — चाहे वह जमा गैस हो, विस्फोटक सामग्री हो या संरचनात्मक विफलता — अभी तक कथित तौर पर अज्ञात है। घायल मजदूर को उपचार के लिए ले जाया गया, हालांकि उसकी वर्तमान स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है।

अफगानिस्तान के खनन क्षेत्र में सुरक्षा का संकट

यह हादसा अफगानिस्तान के खनन उद्योग में व्याप्त गहरे सुरक्षा संकट की ओर ध्यान दिलाता है। देश के उत्तरी और पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक उपकरणों की भारी कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। मार्च में समांगन प्रांत के दारा-ए-सूफ बाला जिले की एक कोयला खदान में मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों के रिसाव से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। उन पीड़ितों की पहचान बामियान और दाइकुंडी प्रांतों के निवासियों के रूप में हुई थी।

इससे पहले फरवरी में नंगरहार प्रांत में खदान ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और एक अन्य घायल हुआ था। इसी तरह बदख्शां प्रांत के खाश जिले में एक बहुमूल्य पत्थरों की खदान में कार्बन मोनोऑक्साइड के जमाव से दम घुटने के कारण चार खनिकों की जान चली गई थी। नीलम खदान से जुड़ी एक अलग घटना में भी मलबे में दबने से एक मजदूर की मौत और एक अन्य के घायल होने की खबर सामने आई थी।

बार-बार होते हादसे और प्रणालीगत विफलता

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के पास तांबे, लिथियम, लौह अयस्क और दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं, जिनकी अनुमानित कीमत खरबों डॉलर आँकी जाती है। बावजूद इसके, देश का खनन क्षेत्र आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित जनशक्ति और नियामक निगरानी से वंचित बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय निवेशक अफगानिस्तान के खनिज संसाधनों में रुचि दिखा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस ढाँचा नहीं है।

आगे की स्थिति

स्थानीय तालिबान प्रशासन की ओर से इस ताज़ा हादसे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। खनन सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तय करने और मजदूरों को बुनियादी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की माँग एक बार फिर ज़ोर पकड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसे निकालने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई ढाँचा नहीं। तालिबान प्रशासन ने खनन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की कोशिशें की हैं, परंतु श्रम सुरक्षा मानकों पर कोई सार्थक कदम नहीं उठाया। जब तक खनन परमिट सुरक्षा अनुपालन से नहीं जोड़े जाते, ये हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान के नूरिस्तान में खदान विस्फोट कब और कहाँ हुआ?
यह विस्फोट शनिवार को नूरिस्तान प्रांत के बर्ग-ए-मतल जिले के पेचीग्राम इलाके में हुआ, जब दो मजदूर खनिज निकालने के लिए खदान में उतरे थे। एक मजदूर की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।
विस्फोट का कारण क्या था?
रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है। यह भी नहीं बताया गया कि खदान में किस तरह का खनिज निकाला जा रहा था।
अफगानिस्तान में इससे पहले कौन-से बड़े खनन हादसे हुए हैं?
मार्च में समांगन के दारा-ए-सूफ बाला जिले की कोयला खदान में जहरीली गैस से दो मजदूरों की मौत हुई थी। फरवरी में नंगरहार में खदान ढहने से एक मौत हुई, और बदख्शां के खाश जिले में कार्बन मोनोऑक्साइड से चार खनिकों की जान गई थी।
अफगानिस्तान में खनन हादसे इतने बार क्यों होते हैं?
देश के उत्तरी और पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक उपकरणों की कमी, प्रशिक्षित जनशक्ति का अभाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इन हादसों की प्रमुख वजह मानी जाती है। नियामक निगरानी की कमी इस समस्या को और गंभीर बनाती है।
इस हादसे पर तालिबान प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया है?
इस ताज़ा हादसे पर स्थानीय तालिबान प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पिछले हादसों में भी प्रशासन की प्रतिक्रिया सीमित रही है।
राष्ट्र प्रेस
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