बलूचिस्तान कोयला खदान में गैस विस्फोट: 4 खनिकों की मौत, 5 घायल; सेना ने चलाया बचाव अभियान
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के हरनाई जिले की एक कोयला खदान में रविवार, 14 सितंबर 2026 को गैस विस्फोट होने से चार खनिकों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। सूत्रों के अनुसार, खदान के भीतर गैस जमा होने के कारण यह विस्फोट हुआ, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना की बचाव टीम तत्काल मौके पर पहुँची।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट की सूचना मिलते ही पाकिस्तान सेना की रेस्क्यू टीम हरनाई की खदान में पहुँची। टीम ने चार श्रमिकों के शव बाहर निकाले और पाँचों घायल खनिकों को सुरक्षित बचाया। घायलों को आगे के उपचार के लिए प्रांतीय राजधानी क्वेटा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
खदान में गैस जमाव की वजह से हुए इस धमाके ने एक बार फिर पाकिस्तान की खनन सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। गैस रिसाव और खदान धँसने की घटनाएँ बलूचिस्तान में बार-बार सामने आती रही हैं।
ताज़ा हादसे से पहले का पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब गत अगस्त 2026 में भी बलूचिस्तान के डुकी जिले की एक कोयला खदान में जहरीली मीथेन गैस साँस के ज़रिए शरीर में जाने से तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी। उनमें दो अफगान नागरिक और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। अधिकारियों और स्थानीय मीडिया के मुताबिक, खदान में काम के दौरान मीथेन गैस इकट्ठा होने से खनिक बेहोश हो गए थे। अन्य मज़दूरों ने तुरंत माइंस एंड मिनरल्स विभाग को सूचना दी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू हुआ, लेकिन बचाव दल के पहुँचने से पहले ही तीनों की मौत हो चुकी थी।
इससे भी पहले जुलाई 2026 में बलूचिस्तान के सोरांगे इलाके की एक कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट में 34 श्रमिकों की जान चली गई थी। प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) के अनुसार, उस धमाके के बाद खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिससे कई मज़दूर मलबे के नीचे दब गए थे। हादसे के समय खदान में कुल 41 खनिक मौजूद थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
गौरतलब है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक प्रांत है, लेकिन यहाँ की खदानें वेंटिलेशन प्रणाली, गैस-डिटेक्शन उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था के मामले में अत्यंत पिछड़ी बताई जाती हैं। आलोचकों का कहना है कि खनन कंपनियाँ और सरकारी एजेंसियाँ अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती हैं।
केवल वर्ष 2026 के भीतर तीन अलग-अलग खदान दुर्घटनाओं में बलूचिस्तान में कम से कम 41 खनिकों की जानें जा चुकी हैं — यह आँकड़ा इस क्षेत्र में खनन सुरक्षा की दुर्दशा की ओर इशारा करता है।
आगे क्या होगा
घायल खनिकों का क्वेटा के अस्पतालों में उपचार जारी है। स्थानीय प्रशासन ने खदान में जाँच के आदेश दिए हैं, हालाँकि अब तक किसी आधिकारिक रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खदानों में गैस-मॉनिटरिंग और वेंटिलेशन की अनिवार्य व्यवस्था नहीं होगी, ऐसे हादसे रुकेंगे नहीं।