31 जुलाई 2026
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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट: 15 खनिकों की मौत, 24 से अधिक अभी भी फंसे

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बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट: 15 खनिकों की मौत, 24 से अधिक अभी भी फंसे

सारांश

बलूचिस्तान के सोरेंज कोलफील्ड में मीथेन गैस विस्फोट ने एक बार फिर पाकिस्तान की खदान सुरक्षा की पोल खोल दी — 15 मौतें, 24 से अधिक फंसे, और PDMA का बचाव अभियान जारी। यह देश में बार-बार होती खदान त्रासदियों की एक और दर्दनाक कड़ी है।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान के सोरेंज कोलफील्ड में 31 जुलाई को मीथेन गैस विस्फोट में कम से कम 15 खनिकों की मौत हुई।
विस्फोट के समय दोनों खदानों में कुल 36 खनिक मौजूद थे; 24 से अधिक अभी भी फंसे हैं।
एक खदान में खनिक जमीन से 4,000 फीट नीचे काम कर रहे थे।
माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट और PDMA का बचाव अभियान जारी है।
इससे पहले मई में खैबर पख्तूनख्वा की खदानों में भी दो खनिकों की मौत हो चुकी है।
मजदूर संगठनों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा उपायों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सोरेंज कोलफील्ड में 31 जुलाई को एक निजी कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम 15 खनिकों की मौत हो गई और 24 से अधिक मजदूर अभी भी जमीन के भीतर फंसे हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट के बाद खदान में आग भड़क उठी और संरचना ध्वस्त हो गई।

हादसे का विवरण

अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, विस्फोट के समय एक निजी कोयला खदान में 24 खनिक जमीन से करीब 4,000 फीट नीचे काम कर रहे थे। विस्फोट की चपेट में पास की एक दूसरी खदान भी आई, जहाँ करीब 12 अन्य खनिक फंस गए।

चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ ने बताया कि हादसे के वक्त दोनों खदानों में कुल 36 कोयला खनिक मौजूद थे। गुरुवार रात तक बचाव अभियान जारी रहने के दौरान 21 खनिक लापता बताए जा रहे थे।

बचाव अभियान

माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट और प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) ने घटनास्थल पर तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दल विपरीत परिस्थितियों — धुएँ, आग और ढहे ढाँचे — के बीच काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान की खदानों में सुरक्षा उपाय पहले से ही सवालों के घेरे में हैं।

पृष्ठभूमि: बार-बार होती दुर्घटनाएँ

गौरतलब है कि यह पाकिस्तान में हाल के महीनों में हुई कोयला खदान दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है। इससे पहले मई में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में दो अलग-अलग खदान हादसों में दो खनिकों की मौत हुई थी और एक घायल हुआ था। उनमें से एक घटना अखोरवाल कोयला खदान की माइन नंबर 5 में हुई थी, जहाँ दो मजदूर मलबे में दब गए थे।

एक अलग घटना में, चपरमश्ती इलाके की एक खदान में काम के दौरान एक खनिक की जान चली गई थी। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा उपायों की घोर कमी पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की है।

आम खनिकों पर असर

बलूचिस्तान की कोयला खदानें देश के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ हैं, लेकिन यहाँ काम करने वाले अधिकांश मजदूर न्यूनतम सुरक्षा उपकरणों के साथ काम करते हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि निजी खदान मालिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं और सरकारी निगरानी नाममात्र की है।

आगे क्या

बचाव अभियान अभी भी जारी है और फंसे हुए खनिकों की सही संख्या की पुष्टि होना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार, खदान में आग और ढहे ढाँचे के कारण अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हादसे की जाँच के आदेश दिए जाने की संभावना है, हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर हादसे के बाद जाँच के वादे हवा में उड़ जाते हैं। मई में शांगला और अब सोरेंज — यह सिलसिला बताता है कि चेतावनियाँ दी जाती हैं, लेकिन सुनी नहीं जातीं। जब तक खदान सुरक्षा को केवल कागज़ी अनुपालन से आगे बढ़कर वास्तविक जवाबदेही से नहीं जोड़ा जाता, तब तक ये संख्याएँ बढ़ती रहेंगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट में कितने लोगों की मौत हुई?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोरेंज कोलफील्ड में 31 जुलाई को हुए मीथेन गैस विस्फोट में कम से कम 15 खनिकों की मौत हो गई। 24 से अधिक खनिक अभी भी जमीन के भीतर फंसे हुए हैं और बचाव अभियान जारी है।
सोरेंज कोलफील्ड विस्फोट में कितने खनिक फंसे हैं?
चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ के अनुसार, हादसे के समय दोनों खदानों में कुल 36 खनिक मौजूद थे। एक खदान में 24 और दूसरी में 12 खनिक फंसे थे; गुरुवार रात तक 21 लापता बताए जा रहे थे।
बलूचिस्तान खदान में बचाव अभियान कौन चला रहा है?
माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट और प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) ने घटनास्थल पर बचाव अभियान शुरू किया है। खदान में आग और ढहे ढाँचे के कारण अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।
पाकिस्तान में कोयला खदान हादसे इतने बार क्यों होते हैं?
मजदूर संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान की निजी कोयला खदानों में सुरक्षा उपायों की गंभीर कमी है और सरकारी निगरानी नाममात्र की है। मई 2026 में खैबर पख्तूनख्वा के शांगला जिले में भी दो अलग हादसों में दो खनिकों की मौत हुई थी।
सोरेंज कोलफील्ड कहाँ स्थित है?
सोरेंज कोलफील्ड पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। यह क्षेत्र देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक है, जहाँ बड़ी संख्या में खनिक निजी खदानों में कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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