बलूचिस्तान कोयला खदान विस्फोट: 15 खनिकों की मौत, 24 से अधिक अभी भी फंसे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के सोरेंज कोलफील्ड में 31 जुलाई को एक निजी कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम 15 खनिकों की मौत हो गई और 24 से अधिक मजदूर अभी भी जमीन के भीतर फंसे हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट के बाद खदान में आग भड़क उठी और संरचना ध्वस्त हो गई।
हादसे का विवरण
अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, विस्फोट के समय एक निजी कोयला खदान में 24 खनिक जमीन से करीब 4,000 फीट नीचे काम कर रहे थे। विस्फोट की चपेट में पास की एक दूसरी खदान भी आई, जहाँ करीब 12 अन्य खनिक फंस गए।
चीफ इंस्पेक्टर ऑफ माइंस मुहम्मद आतिफ ने बताया कि हादसे के वक्त दोनों खदानों में कुल 36 कोयला खनिक मौजूद थे। गुरुवार रात तक बचाव अभियान जारी रहने के दौरान 21 खनिक लापता बताए जा रहे थे।
बचाव अभियान
माइंस एंड मिनरल्स डिपार्टमेंट और प्रोविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (PDMA) ने घटनास्थल पर तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दल विपरीत परिस्थितियों — धुएँ, आग और ढहे ढाँचे — के बीच काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान की खदानों में सुरक्षा उपाय पहले से ही सवालों के घेरे में हैं।
पृष्ठभूमि: बार-बार होती दुर्घटनाएँ
गौरतलब है कि यह पाकिस्तान में हाल के महीनों में हुई कोयला खदान दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है। इससे पहले मई में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के शांगला जिले में दो अलग-अलग खदान हादसों में दो खनिकों की मौत हुई थी और एक घायल हुआ था। उनमें से एक घटना अखोरवाल कोयला खदान की माइन नंबर 5 में हुई थी, जहाँ दो मजदूर मलबे में दब गए थे।
एक अलग घटना में, चपरमश्ती इलाके की एक खदान में काम के दौरान एक खनिक की जान चली गई थी। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने पाकिस्तान की कोयला खदानों में सुरक्षा उपायों की घोर कमी पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की है।
आम खनिकों पर असर
बलूचिस्तान की कोयला खदानें देश के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ हैं, लेकिन यहाँ काम करने वाले अधिकांश मजदूर न्यूनतम सुरक्षा उपकरणों के साथ काम करते हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि निजी खदान मालिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं और सरकारी निगरानी नाममात्र की है।
आगे क्या
बचाव अभियान अभी भी जारी है और फंसे हुए खनिकों की सही संख्या की पुष्टि होना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार, खदान में आग और ढहे ढाँचे के कारण अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हादसे की जाँच के आदेश दिए जाने की संभावना है, हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।